सुरेंद्र राणा की रिपोर्ट!
शिमला (23 जनवरी 2026): पहाड़ों की रानी शिमला में आज सीजन की पहली भारी बर्फबारी ने व्यवस्थाओं की धज्जियां उड़ा दी हैं। स्थिति यह है कि आधे शिमला में बिजली और पानी के लिए संकट पैदा हो गया है, लेकिन प्रशासन अभी भी गहरी नींद में सोया हुआ है।
अंधेरे और प्यास की चपेट में शिमला:
ऊपर शिमला से लेकर संजौली, छोटा शिमला, और घोड़ा चौकी तक के इलाकों में बिजली की लाइनें पूरी तरह चरमरा गई हैं। आधे से ज्यादा शहर आज अंधेरे में डूबा हुआ है। कड़ाके की ठंड में हीटर तो दूर, मोबाइल चार्ज करने तक की सुविधा नहीं है। बिजली गुल होने का सीधा असर पेयजल सप्लाई पर पड़ा है; पंपिंग ठप होने से पानी का संकट पैदा हो गया है।
आज सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब इस समय स्नो-कटर सड़कों पर होने चाहिए थे, तो वे कहाँ गायब हैं? करोड़ों की लागत से खरीदी गई मशीनें आखिर क्यों नहीं चल रही हैं? अगर पहली ही बर्फबारी में ये मशीनें सड़कों से बर्फ नहीं हटा सकतीं, तो फिर इनका फायदा क्या?
प्रशासन ने जो सर्दियों के लिए बड़े-बड़े आदेश और दावे किए थे, वे धरातल पर पूरी तरह फेल साबित हुए हैं। शिमला की जनता पूछ रही है कि आखिर कब तक उन्हें इस बदइंतजामी का खामियाजा भुगतना पड़ेगा? न सड़कों पर रेत है, न नमक और न ही बिजली बहाली की कोई उम्मीद।
यह प्रशासन की घोर लापरवाही है। जब जनता ठंड में ठिठुर रही है और प्यासी है, तब अधिकारी केवल कागजों पर काम कर रहे हैं। पंजाब दस्तक प्रशासन से मांग करता है कि तुरंत स्नो-कटर चलाए जाएं और बिजली-पानी की सप्लाई बहाल की जाए।
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यह प्रशासन की घोर लापरवाही है। जब जनता ठंड में ठिठुर रही है और प्यासी है, तब अधिकारी केवल कागजों पर काम कर रहे हैं। पंजाब दस्तक प्रशासन से मांग करता है कि तुरंत स्नो-कटर चलाए जाएं और बिजली-पानी की सप्लाई बहाल की जाए।
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