पंजाब दस्तक
सुरेंद्र राणा
आज सहकार भारती का स्थापना दिवस हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस कार्यक्रम में सहकारिता के माध्यम से प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों पर ले जाने और स्थानीय लघु उद्योगों को बढ़ावा देने पर विस्तृत चर्चा की गई।
श्रद्धांजलि और दीप प्रज्वलन से शुरुआत
कार्यक्रम में आए लोगों ने सबसे पहले सहकार भारती के संस्थापक और मार्गदर्शक स्वर्गीय लक्ष्मणराव इनामदार जी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। इसके पश्चात दीप प्रज्वलन कर स्थापना दिवस समारोह का विधिवत शुभारंभ किया गया। उपस्थित कार्यकर्ताओं और अतिथियों ने उनके बताए मार्ग पर चलने और सहकारी आंदोलन को ईमानदारी से आगे बढ़ाने की शपथ ली।
स्थापना का इतिहास और उद्देश्य
वक्ताओं ने बताया कि सहकार भारती की स्थापना 11 जनवरी 1978 को पुणे में ‘वकील साहब’ के नाम से प्रसिद्ध स्वर्गीय लक्ष्मणराव इनामदार जी के मार्गदर्शन में हुई थी। संगठन का मुख्य उद्देश्य सहकारी आंदोलन को राजनीतिक चंगुल से मुक्त कर उसे आम आदमी के कल्याण का माध्यम बनाना है। “बिना संस्कार, नहीं सहकार” के मंत्र के साथ शुरू हुआ यह सफर आज देश के कोने-कोने में पहुँच चुका है।
लघु उद्योगों और स्वरोजगार पर केंद्रित चर्चा
इस संगोष्ठी में विशेष रूप से हिमाचल के परिवेश में सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों की भूमिका पर जोर दिया गया:
स्थानीय स्वरोजगार: युवाओं को सरकारी नौकरियों के पीछे भागने के बजाय सहकारिता के माध्यम से स्वयं का छोटा उद्योग शुरू करने के लिए प्रेरित किया गया।
बाजार और बिचौलियों से मुक्ति: चर्चा हुई कि कैसे सहकारी समितियां बनाकर किसान और बागवान अपने उत्पादों की सीधी मार्केटिंग कर सकते हैं, जिससे उन्हें बेहतर मुनाफा मिले।
प्रशिक्षण और सहायता: सहकार भारती आने वाले समय में ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यशालाएं आयोजित करेगी ताकि छोटे उद्यमियों को सरकारी योजनाओं और ऋण सुविधाओं की सही जानकारी मिल सके।
संस्कार और शुचिता का संदेश
संगठन के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सहकार भारती केवल एक संस्था नहीं बल्कि एक विचार है। इस अवसर पर यह संकल्प लिया गया कि सहकारी समितियों में पारदर्शिता और ईमानदारी को बढ़ावा दिया जाएगा ताकि समाज के सबसे निचले स्तर के व्यक्ति को भी इसका लाभ मिल सके।
ताजा खबरों के लिए सब्सक्राइब और फॉलो करें: Punjab दस्तक
