मोहाली, 18 जनवरी (सुरेंद्र राणा):
आज 18 जनवरी का दिन अध्यात्म के इतिहास में एक ऐतिहासिक दिन है। आज ही के दिन 1969 में प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के साकार संस्थापक प्रजापिता ब्रह्मा बाबा अव्यक्त हुए थे। इस पावन स्मृति दिवस के उपलक्ष्य में आज सुख शांति भवन, फेस-7 मोहाली में ‘विश्व शांति दिवस’ का आयोजन किया गया।
बाबा की कुटिया में दिव्य अनुभव
सुख शांति भवन परिसर के अंदर बनी ‘बाबा की कुटिया’ आज के कार्यक्रम का मुख्य केंद्र रही। सभी बीके भाई-बहनों और ईश्वरीय विद्यार्थियों ने कुटिया के भीतर जाकर बाबा की यादों को अपने मन में बसाया। कुटिया का अलौकिक वातावरण हर किसी को बाबा की सादगी और उनकी महान तपस्या की याद दिला रहा था।
शांति स्तंभ पर पुष्पांजलि
कुटिया में साधना के पश्चात सभी ने ‘विश्व शांति स्तंभ’ (Peace Pillar) पर पंक्तिबद्ध होकर बाबा की पावन स्मृति में पुष्प अर्पित किए। यहाँ का वातावरण अत्यंत दिव्य और शांत बना रहा।
पवित्र ‘भोग’ और फल वितरण
सुबह विशेष योग साधना के पश्चात ब्रह्मा बाबा को सात्विक ‘भोग’ लगाया गया। इस अवसर पर उपस्थित सभी भाई-बहनों को दूध और ताजे फलों का प्रसाद वितरित किया गया। केंद्र की बहनों ने बाबा के जीवन के ऐतिहासिक पहलुओं और उनके त्याग पर प्रकाश डाला।
दोपहर का ‘ब्रह्म भोजन’
दोपहर के समय केंद्र पर ‘ब्रह्म भोजन’ का विशेष प्रबंध रहा। सभी ईश्वरीय विद्यार्थियों ने बहुत ही मर्यादित और शांत भाव से बैठकर यह प्रसाद ग्रहण किया। यह पूरा आयोजन बाबा की याद और पूर्ण अनुशासन के साथ संपन्न हुआ।
मन में समाया बाबा का संदेश
आज का यह ऐतिहासिक समय हर किसी के मन में गहरी शांति और प्रेरणा भर गया। सभी ने बाबा की यादों को हृदय में संजोते हुए उनके बताए हुए सत्यता, पवित्रता और विश्व शांति के मार्ग पर चलने का अटूट संकल्प लिया। ‘स्व-परिवर्तन से विश्व परिवर्तन’ का लक्ष्य अब हर किसी के मन में एक नई उमंग जगा रहा है।
