Himachal News : एबीवीपी वर्कर्ज के प्रदर्शन पर सदन में मुख्यमंत्री-नेता विपक्ष में तीखी नोकझोंक

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धर्मशाला: सुरेन्द्र राणा: तपोवन में बुधवार को सदन के अंदर व बाहर खूब गरमाहट व हंगामा देखने को मिला। एक तरफ युवा जोश सडक़ों में उतरकर नारेबाजी करते हुए पुलिस जवानों से भिड़ गया, वहीं सदन के भीतर मुख्यमंत्री सुक्खू और नेता विपक्ष जयराम ठाकुर कार्यकर्ताओं की बात करते हुए आपस में उलझ गए। एबीवीपी के आंदोलन से शुरू हुई बात भाजपा के गुरुवार को होने वाले धरने-प्रदर्शन तक पहुंच गई। इतना ही नहीं, सदन में हंगामा इतना बढ़ गया कि नेता विपक्ष जयराम ठाकुर विपक्षी विधायकों के साथ सदन से बाहर चले गए। सदन में मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि एबीवीपी के कार्यकर्ता बिना अनुमति के जोरावर सिंह मैदान में पहुंचे थे। उन्होंने साढ़े 12 बजे के बाद पहुंचकर सडक़ भी बंद कर दी। कार्यकर्ताओं ने बेरिगेट तोडक़र विधानसभा की तरफ आने का प्रयास किया। ऐसे में पुलिस की ओर से कानून व्यवस्था बनाने के प्रयास किए, जिसमें दोनों ही पक्षों में धक्का मुक्की हुई है। इस संघर्ष में 10 की बजाय मात्र चार से पांच एबीवीपी कार्यकर्ता आंशिक रूप से घायल हुए हैं। इस दौरान पुलिस महिला जवानों सहित कुल तीन महिलाओं को भी चोट आई है। सीएम ने बताया कि कानून के तहत कार्रवाई की गई है। भाजपा की रैली भी गुरुवार को है, ऐसे में तीन हजार क्षमता के जोरावर मैदान में अनुमति दी गई है। उन्होंने कहा कि स्वर्ण आयोग के प्रदर्शन में पुलिस कर्मी भी जख्मी हुए थे, यहां पर भी लाठीचार्ज नहीं हुआ, दोनों तरफ से धक्का-मुक्की हुई है।

सीएम ने बताया कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की ओर से अनुमति विधानसभा मार्च पास की मांगी गई थी, जोकि नहीं दी गई थी। इसके बावजूद एबीवीपी के कार्यकर्ता जोरावर सिंह मैदान में पहुंच गए और उन्होंने आगे विधानसभा की ओर बढऩे का प्रयास किया। उधर, नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने सदन में कहा कि विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं ने परमिशन को अप्लाई किया था, तो उसे डीनाई क्यों किया गया। शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे एबीवीपी कार्यकर्ताओं के साथ लाठीचार्ज बहुत निंदनीय कृत्य है। दस से ज्यादा बच्चे घायल हुए हैं, जिनमें दो बेटियां शामिल हैं। पूर्व सरकार के समय में भी लोग अपनी बात रखते थे, यहां तक कि स्वर्ण आयोग के लोग विधानसभा के परिसर तक पहुंचे और, वहां पर उन्होंने खुद पहुंचकर बात की। उन्होंने कहा कि राजनीतिक रूप से रैली को बदलने की बात कही जा रही है, तो आंदोलन को भी उसी तर्ज पर किया जाएगा। पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ने कहा कि हमने परमिशन मांगने पर पैसे जमा करवाए, जबकि बाद में चिट्ठी डालकर पुलिस मैदान में भेजने की बात कही। उन्होंने कहा कि पांच हजार के करीब लोगों तक रैली रखने की सहमति भी दी। इस संबंध में सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू से भी मिले थे। उन्होंने कहा कि गारंटी देने का औचित्य सही नहीं है। सौहार्दपूर्ण तरीके से बात होगी, तो सही है। अगर रैली रद्द की जाती है, तो आंदोलन को उसी तर्ज पर किया जाएगा।

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