आदि हिमानी चामुंडा मंदिर के कपाट बंद, अब 15 मार्च के बाद होगी यात्रा

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कांगड़ा, सुरेन्द्र राणा: धौलाधार की ऊंची पहाड़ियों पर स्थित आदि हिमानी चामुंडा मंदिर के कपाट शीतकालीन अवधि के लिए बंद कर दिए गए। सामान्य तौर पर हर वर्ष 15 नवंबर को कपाट बंद कर दिए जाते थे, लेकिन इस बार मौसम साफ रहने और मंदिर के निर्माण कार्य चलते रहने के कारण इन्हें एक दिसंबर को बंद किया गया।

मंदिर अधिकारी राकेश कुमार ने बताया कि श्रद्धालुओं से अनुरोध है कि वे 15 मार्च से पहले हिमानी चामुंडा की यात्रा न करें। उन्होंने कहा कि 15 मार्च 2026 तक निर्धारित रोक लागू रहेगी और इसके बाद ही श्रद्धालुओं को यात्रा की अनुमति दी जाएगी।

श्री आदि हिमानी चामुंडा मंदिर, मौजूदा श्री चामुंडा देवी मंदिर के उत्तर–पूर्व में एक ऊंची पहाड़ी की चोटी पर स्थित है। यहां तक पहुंचने के लिए भक्तों को धर्मशाला–पालमपुर राज्य राजमार्ग पर स्थित जद्रंगल गांव से लगभग 13 किलोमीटर का रास्ता तय करना होता है। अंतिम मोटर योग्य सड़क कार्दियाना तक जाती है, जहां से आगे 8.5 किलोमीटर लंबी कठिन पैदल यात्रा शुरू होती है। मध्यम कठिनाई स्तर वाली यह ट्रैकिंग यात्रा सामान्यतः 6–7 घंटे का समय लेती है।

साल के अधिकांश समय भक्त यहां दर्शन के लिए आते हैं, हालांकि सर्दियों के दौरान ऊपरी इलाकों में भारी बर्फबारी और मौसम की मार के चलते यात्रा बंद रहती है। मार्ग में आधे रास्ते तक पानी की सुविधा उपलब्ध रहती है, जबकि उसके बाद तीर्थयात्रियों को आवश्यक सामान स्वयं ले जाना पड़ता है। ट्रैक पर स्थान–स्थान पर स्थित चाय की दुकानें व छोटे विश्राम स्थल यात्रियों को राहत देते हैं।

स्थानीय किंवदंतियों के अनुसार, देवी चामुंडा ने इसी पर्वत शिखर से चंड और मुंड नामक राक्षसों का वध किया था। आज भी भक्त मौजूदा श्री चामुंडा मंदिर के समीप शिव मंदिर के ऊपर स्थित विशाल बोल्डर को इस कथा का प्रतीक मानते हैं। वर्ष 2014 में विनाशकारी आग से नष्ट हुए मंदिर का पुनर्निर्माण श्रद्धालुओं और मंदिर ट्रस्ट के सहयोग से तेजी से आगे बढ़ रहा है।

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