शिमला, ब्यूरो: प्रदेश हाई कोर्ट ने अनुबंध कार्यकाल को पेंशन लाभ के लिए न गिनने पर सरकार के आला अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की चेतावनी दी है। कोर्ट ने अदालती आदेशों की अनुपालना न करने पर सरकार के खिलाफ कड़ी टिप्पणी भी की है। कोर्ट ने कहा है कि सरकार आदेशों की अनुपालना न कर बेवजह कोर्ट के बहुमूल्य समय को बर्बाद कर रही है, इसलिए कोर्ट के पास सरकार का प्रतिनिधित्व करने वाले अधिकारियों और विभागाध्यक्षों को जेल भेजने की कार्रवाई शुरू करने को मजबूर होना पड़ रहा है। कोर्ट ने प्रदेश सरकार के चीफ सेक्रेटरी को आदेश दिए हैं कि वह दोषी अधिकारियों को जेल की सजा से पहले जरूरी गुजारे भत्ते का इंतजाम कर लें। न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रोमेश वर्मा की खंडपीठ ने कहा कि पिछली तारीख को पास किए गए आदेश के हिसाब से अनुपालना शपथपत्र दायर नहीं किया है, जिससे कोर्ट के निर्देशों की अनुपालना का पता चले। कोर्ट ने कहा कि अनुपालना याचिकाएं मई, 2025 में दायर की गई थीं यानी लगभग छह महीने पहले, इसलिए, उनके पास कोर्ट के आदेशों को लागू करने के लिए जबरदस्ती एक्शन लेने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है। कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को अनुबंध काल को पेंशन के लिए गिने जाने के आदेश की अनुपालना को सुनिश्चित करने के लिए दो हफ्ते का अतिरिक्त समय दिया है।उल्लेखनीय है कि हाई कोर्ट में 1300 के करीब अवमानना से जुड़े मामले लंबित है और अकसर देखा गया है कि सरकार बिना अनुपालना याचिका अथवा अवमानना याचिका के कोर्ट के फैसलों पर अमल नहीं कर रही है। इससे कोर्ट के बहुमूल्य समय की बर्बादी होती है। कोर्ट ने कहा कि सरकार में जिसका जितना बड़ा ओहदा होता है उसकी उतनी ही बड़ी जिम्मेदारी कानून के अनुसार काम करने की भी होती है। अदालती आदेशों की अवहेलना करना एक बहुत गंभीर मसला है। कोर्ट ने सैकड़ों अनुपालना याचिकाकर्ताओं की ओर से दायर याचिकाओं की सुनवाई के बाद यह आदेश दिए। कोर्ट ने प्रार्थीयों की अनुबंध आधार पर दी सेवाओं को पेंशन संबंधी लाभों के लिए गिने जाने के आदेश जारी किए थे।
