शिमला, सुरेंद्र राणा:हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा नगर निगम शिमला के मेयर और डिप्टी मेयर का कार्यकाल ढाई साल से बढ़ाकर पाँच साल करने के फैसले ने नगर निगम की मासिक बैठक में हंगामा खड़ा कर दिया। वीरवार को हुई बैठक के दौरान भाजपा पार्षदों के साथ-साथ कांग्रेस के कई पार्षदों ने भी इस निर्णय का विरोध किया। बैठक शुरू होते ही भाजपा पार्षदों ने नारेबाजी करते हुए सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। उनका आरोप था कि सरकार ने यह फैसला लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ और महिला विरोधी तरीके से लिया है। हंगामा इतना बढ़ गया कि महापौर को बैठक कुछ देर के लिए स्थगित करनी पड़ी। इसके बाद महापौर और कुछ कांग्रेस पार्षद बैठक छोड़कर बाहर चले गए।नाभा वार्ड की पार्षद सिमी नंदा ने कहा कि वह सरकार और पार्टी के साथ हैं, लेकिन निगम में पहले से तय ढाई-ढाई साल के रोस्टर को बरकरार रहना चाहिए।
उन्होंने कहा, “हम सिर्फ इस फैसले के खिलाफ हैं क्योंकि राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी की लाइन यही है कि सभी को प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।वहीं, कांग्रेस पार्षद कांता सुयाल ने कहा कि नगर निगम में इस बार महिलाओं की संख्या अधिक है, ऐसे में महिलाओं को प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए था। उन्होंने बताया कि भाजपा पार्षदों ने अपने तरीके से विरोध किया, जबकि कांग्रेस पार्षदों ने मौन प्रदर्शन कर अपनी असहमति जताई।बाइट,,, कांग्रेस पार्षद।भाजपा पार्षद बिट्टू पाना व अन्य पार्षदों ने कहा कि यह तानाशाही वाला फैसला है पहले भी नगर निगम में वोटिंग के द्वारा ढाई साल बाद महिला को प्रतिनिधत्व मिलता था। उनका कहना है कि एक तरफ तो कांग्रेस के नेता हाथ में संविधान लेकर चलते हैं दूसरी तरफ संविधान का पालन नहीं किया जा रहा। उन्होंने कहा कि जब तक इस फैसले पर पुनर्विचार नहीं किया जाता है उनका विरोध जारी रहेगा
