राजस्थान, सुरेन्द्र राणा;हिमाचल की धरती पर जन्मे ब्रह्माकुमार प्रकाश भाई जी ने अपना जीवन ईश्वरीय सेवा, त्याग और तपस्या को समर्पित किया है। 28 सितम्बर 1965 को शिमला ज़िले के एक गाँव में जन्मे प्रकाश भाई जी बचपन से ही शांत और आध्यात्मिक प्रवृत्ति के रहे।
नौ वर्ष की आयु में पहली बार ब्रह्माकुमारीज़ के केंद्र से जुड़कर उन्होंने आध्यात्मिकता के मार्ग पर कदम रखा। माउंट आबू स्थित पांडव भवन (मधुबन) में सात दिवसीय प्रशिक्षण ने उनके जीवन की दिशा तय की। दादी चम्पा और दादी गुलज़ार जी के सान्निध्य ने उन्हें सेवा का संकल्प दिलाया।
शुरुआती दौर में परिवहन विभाग में सेवा करने के बाद उन्हें दादी कश्मीरिनी जी की सेवा का अवसर मिला। लगभग 14 वर्षों तक देश के कोने-कोने में सेवा यात्रा के दौरान उन्होंने अनेक लोगों को ईश्वरीय मार्ग से जोड़ा।
भारत ही नहीं, बल्कि अमेरिका, लंदन, फ्रांस, इटली, स्विट्ज़रलैंड, थाईलैंड, दुबई, मॉरीशस, नेपाल और भूटान जैसे देशों में भी उन्होंने आध्यात्मिकता का संदेश फैलाया।
वर्तमान में प्रकाश भाई जी मधुबन में हेडक्वार्टर मैनेजमेंट कोऑर्डिनेटर कमेटी के सदस्य के रूप में दादी कॉटेज से विभिन्न सेवाओं का संचालन कर रहे हैं। उन्होंने हिमाचल, पंजाब और हरियाणा के भाई–बहनों की सुविधा के लिए “दौलतपुर–आबू रोड वाया साबरमती” ट्रेन शुरू करवाने में भी अहम भूमिका निभाई।
आज भी वे हजारों लोगों को बाबा की याद और दादियों की शिक्षा से प्रेरित कर रहे हैं। जन्मदिन के अवसर पर उन्हें ढेरों शुभकामनाएँ दी जा रही हैं।
