पंजाब दस्तक; सनातन परंपरा में भाई और बहन का रिश्ता केवल खून के रिश्ते तक सीमित नहीं, बल्कि यह प्रेम, विश्वास और त्याग की अनमोल डोर है। इस रिश्ते की पवित्रता और मजबूती को मनाने के लिए हर साल रक्षाबंधन का पर्व धूमधाम से मनाया जाता है। इस वर्ष 09 अगस्त 2025, शनिवार को सावन महीने की पूर्णिमा तिथि पर यह पर्व पूरे भारतवर्ष में उल्लास और श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है। इसे श्रावणी पर्व भी कहा जाता है, जिसका संबंध न केवल भाई-बहन के रिश्ते से है, बल्कि जनेऊ संस्कार और पूजा-विधि से भी जुड़ा हुआ है।
मुख्य मुहूर्त : सुबह 5:35 बजे से दोपहर 1:24 बजे तक अभिजीत मुहूर्त : दोपहर 12:00 बजे से 12:53 बजे तक प्रदोष काल : शाम 7:19 बजे से रात 9:24 बजे तक इन मुहूर्तों में राखी बांधना अत्यंत शुभ और मंगलकारी माना जाता है। यदि इन समयों में राखी बांधने का अवसर मिले, तो इसका फल और भी अधिक शुभकारी होता है। राखी बांधने से पहले स्नान-ध्यान कर स्वयं को पवित्र कर लें और भगवान की पूजा करें। सबसे पहले भगवान को राखी अर्पित करें, फिर भाई को पूर्व या उत्तर दिशा में बैठाएं। रोली और चंदन से तिलक करें, अक्षत छिड़कें और भाई के दाएं हाथ में राखी बांधते हुए मिठाई खिलाएं। दीपक से आरती उतारें और भाई के सुख-समृद्धि की मंगलकामना करें। भाई, बहन के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद ले और उपहार स्वरूप अपनी बहन को प्रेम का प्रतीक दे।🔮 राखी बांधने के मंत्रपौराणिक मंत्र :ॐ येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः। तेन त्वामपि बध्नामि रक्षे मा चल मा चल॥
