सेब पेड़ कटान को सेब उत्पादक संघ ने बताया अवैज्ञानिक व अमानवीय, हाई कोर्ट से फैंसले पर पुनर्विचार करने की मांग

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शिमला, सुरेन्द्र राणा: हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट के आदेश के बाद शिमला जिले में वन भूमि से कब्जे हटाने के लिए वन, राजस्व विभाग ने मुहिम को तेज कर दिया है और कोटखाई व कुमारसैन में वन भूमि पर बने बगीचों में सेब से लदे पेड़ों को काटा गया है जिससे सेब बागवानों की चिंताएं बढ़ गई हैं।हिमाचल प्रदेश सेब उत्पादक संघ और किसान सभा ने सेब कटान की कार्रवाई को अवैज्ञानिक करार दिया है और हाई कोर्ट से अपने फैसले पर पुनर्विचार करने के साथ सरकार से कोर्ट में सही पक्ष रखने की मांग की है।

शिमला में पत्रकार वार्ता कर किसान नेता राकेश सिंघा ने कहा कि वन भूमि से कब्जे हटाने के नाम पर प्रदेश के किसानों को उजाड़ने का काम किया जा रहा है।अवैज्ञानिक और अमानवीय तरीके से सेब के पेड़ काटे जा रहे हैं। भारी बारिश के दौरान इस तरह से पेड़ो का कटान हो रहा जो त्रासदी को न्योता देता है। हाई कोर्ट ने भी इस बात को नजरंदाज किया है। हिमाचल सरकार ने कोर्ट में अपना पक्ष सही नहीं रखा जबकि धर्मशाला विधानसभा सत्र के दौरान भूमिहीनों को 10 बीघा जमीन देने का बिल पास किया था लेकिन दूसरी तरफ कोर्ट में ऐसा पक्ष नहीं रखा गया। दोहरा मापदंड सरकार अपना रही है। बागवान सेब के पौधों के कटान को स्वीकार नहीं करेगा और इसके खिलाफ बड़ा जनांदोलन खड़ा किया जाएगा जिसकी रूपरेखा कल हाटकोटी में तैयार की जाएगी।

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