बिलासपुर, काजल: वन विभाग की मॉक ड्रिल उस समय सवालों के घेरे में आ गई, जब घुमारवीं वन परिक्षेत्र के अंतर्गत भींगू जंगल में आग पर काबू पाने का अभ्यास करते-करते असल में आग फैल गई और आग ने दो बीघा क्षेत्रफल में फैले जंगल को अपनी चपेट में ले लिया। ग्रामीणों के अनुसार इस क्षेत्र में जैव विविधता संरक्षण के अंतर्गत अनार की दाड़ू प्रजाति के करीब 1000 और सागवान के पौधे लगाए गए थे, जिनमें से अधिकांश आग की भेंट चढ़ गए।
अधिकारियों का दावा, नियमानुसार की गई मॉक ड्रिल
वन परिक्षेत्र अधिकारी हंसराज और वन खंड अधिकारी देशराज ने दावा किया कि मॉक ड्रिल के लिए एक बीघा क्षेत्र निर्धारित किया गया था, जहां कोई भी पेड़ नहीं था। अधिकारियों का दावा है कि मॉक ड्रिल नियमानुसार की गई।
ग्रामीणों ने कसा तंज-नतीजा कुछ नहीं निकलता
ग्रामीणों ने सरकारी तंत्र पर तंज कसते हुए कहा कि हर वर्ष जंगलों में आग लगती है। हर बार सिर्फ मॉक ड्रिल करवाकर लाखों रुपये खर्च कर दिए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर नतीजा कुछ नहीं निकलता। अब ग्रामीणों ने प्रदेश सरकार से इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।पामारोजा घास भी जलकर राख, लाखों हुए थे खर्चलोगों का कहना है कि वन विभाग ने भींगू जंगल में जिस जगह मॉक ड्रिल की, वहां पर चार साल पहले जाइका परियोजना के तहत पामारोजा घास लगाई थी। इसकी देखरेख के लिए एक विशेष समिति का गठन किया गया था। पिछले चार साल में इस पर करीब 25 लाख रुपये का खर्च किया जा चुका है। इससे सेंट बनाया जाता है। इस घास से लाखों की आमदनी होनी थी।
