अगर सरकार ने सुना होता, तो विमल नेगी आज जिंदा होते” : बिक्रम ठाकुर

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शिमला : भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता, विधायक और पूर्व उद्योग मंत्री बिक्रम सिंह ठाकुर ने कहा है कि यदि कांग्रेस सरकार ने समय रहते चेतावनी पर ध्यान दिया होता और निष्पक्ष कार्रवाई की होती, तो ईमानदार और कर्मठ अधिकारी विमल नेगी की जान नहीं जाती। उन्होंने कहा कि 23 सितंबर, 2024 को इस मुद्दे को उन्होंने प्रेस कांफ्रेंस में उठाया था, लेकिन सरकार ने आंखें मूंदे रखीं और अफसरशाही की कठपुतली बनी रही।

बिक्रम ठाकुर ने कहा कि आज जब पूरा प्रदेश इस घटना से स्तब्ध है, तब भी सरकार सीबीआई जांच से भाग रही है। यह साफ इशारा करता है कि या तो सरकार कुछ छिपा रही है या दोषियों को राजनीतिक संरक्षण दे रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या यह सरकार न्याय देने में सक्षम है या केवल दिखावटी संवेदनशीलता का दिखावा कर रही है?

जिन अफसरों पर आरोप हैं, वे अब भी आज़ाद घूम रहे हैं
वह अफसर जिन पर उत्पीड़न के आरोप हैं – तत्कालीन एमडी हरिकेश मीणा और निदेशक (विद्युत) देश राज – आज तक गिरफ्तार नहीं हुए हैं। हाईकोर्ट ने 26 मार्च को उनकी जमानत खारिज की, फिर भी कोई गिरफ्तारी नहीं हुई। सुप्रीम कोर्ट से देश राज को 4 अप्रैल को अग्रिम जमानत मिल गई, लेकिन सरकार ने इसका विरोध भी नहीं किया। यह सब सरकार की मिलीभगत का प्रमाण है।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट क्यों छिपाई जा रही है?
विमल नेगी 10 मार्च को लापता हुए और उनका शव 18 मार्च को गोविंदसागर झील में मिला। लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट अब तक सार्वजनिक नहीं की गई है। क्या सरकार बताएगी कि मौत के कारण क्या थे? शरीर पर कोई संघर्ष या दबाव के निशान थे क्या?

CBI जांच से क्यों भाग रही है सरकार?
नेगी के परिवार और सहकर्मियों के साथ-साथ प्रदेश की जनता ने सीबीआई जांच की मांग की है, जिसे सरकार ने राजनीतिक स्टंट बताकर खारिज कर दिया। क्या सरकार इतने गंभीर मुद्दे पर भी संवेदनशील नहीं हो सकती?


क्या सरकार ने नेगी के ईमेल, कॉल रिकॉर्ड, व अन्य डिजिटल माध्यमों की जांच की? क्या कोई धमकी या मानसिक दबाव का संकेत मिला? सरकार ने इन सवालों पर अब तक कोई जवाब नहीं दिया है।

पूर्व मंत्री ने आरोप लगाया कि पेखुवाला प्रोजेक्ट में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ है, जिसमें अधिकारी और राजनीतिक लोग दोनों शामिल हैं। उन्होंने कहा कि टेंडर शर्तें बार-बार बदलकर एक विशेष कंपनी को लाभ पहुंचाया गया। गुजरात में समान प्रोजेक्ट की तुलना में हिमाचल प्रोजेक्ट की लागत 100 करोड़ रुपये अधिक है।

बिक्रम ठाकुर ने मुख्यमंत्री के CBI जांच को लेकर दिए बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके बयानों से लगता है कि वह मानसिक संतुलन खो बैठे हैं। CBI जांच केंद्र सरकार की सिफारिश पर होती है, और अगर सरकार सच में पारदर्शिता चाहती है, तो उसे इसकी सिफारिश करनी चाहिए।

यह सिर्फ आत्महत्या नहीं, सिस्टम की हत्या है
उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक अधिकारी की आत्महत्या नहीं, बल्कि सिस्टम की हत्या है। सरकार ने कार्यस्थल उत्पीड़न पर कोई स्पष्ट नीति नहीं बनाई, जिससे अफसरशाही को मनमानी की छूट मिल गई है। भाजपा इस मामले को अंजाम तक पहुंचाएगी, और जब तक विमल नेगी को न्याय नहीं मिलता, यह संघर्ष जारी रहेगा.

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