महिला आरक्षण को लेकर भाजपा कर रही नौटंकी ओर ड्रामा, 46 साल में क्यो नही बनाई महिला भाजपा अध्यक्ष, हर्ष वर्धन

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शिमला, सुरेन्द्र राणा: महिला आरक्षण बिल के पास न होने से भाजपा सड़को पर उतर गई है और बीते दिन शिमला में भाजपा द्वारा आक्रोश रैली निकाली और कांग्रेस पर महिलाओ के साथ विश्वासघात करने के आरोप लगाए। वही उद्योग हर्ष वर्धन ने इसे भाजपा की नौटंकी ओर ड्रामा करार दिया है।
हर्ष वर्धन ने कहा कि महिला आरक्षण बिल को लेकर भाजपा नौटकी ओर ड्रामा कर रही है और यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि वह महिलाओं के सबसे बड़ी हितेषी है। यदि भाजपा इतनी ही महिला हितेषी होती तो 46 साल में भाजपा ने किसी महिला को पार्टी का अध्यक्ष क्यो नही बनाया।

उन्होने कहा कि महिला आरक्षण बिल 1997 में सबसे पहले कांग्रेस द्वारा ही लोकसभा में लाया गया था और उस समय भाजपा ने इसका विरोध किया। वही 2023 में जब यह बिल दोबारा से लाया गया तो सभी दलों ने इसे सर्व सम्मति से पास करवाया लेकिन इस बिल को 2024 के लोकसभा चुनाव में लागू नहीं किया गया और 2029 के चुनाव में लागू करने की बात कही गई। लेकिन अब पांच राज्यों के चुनावों को देखते हुए दोबारा से बिल को लाया गया और डीलिमिटेशन और सीटें बढ़ाने की बात की गई। भाजपा की मंशा इस बिल को पास करवाने की नहीं थी केवल राजनीतिक मकसद से इस बिल को लाया गया।
भाजपा को यह पता था कि इस बिल को पास करवाने के लिए दो तिहाई बहुमत की जरूरत है और बीजेपी के पास बहुमत नहीं था कांग्रेस 2023 में पास कार्रवाई बल को ही लागू करने की मांग कर ही थी। लेकिन जिस तरह से पांच राज्यों के चुनाव चल रहे हैं उसको देखते हुए भाजपा ने विशेष लोकसभा का सत्र बुलाया

उन्होंने कहा कि भाजपा चुनावी ड्रामा कर रही है और अब सड़कों पर उतरकर महिला ही हितैसी होने की बात कर रही है शिमला में भाजपा द्वारा जो प्रदर्शन किया गया पहली बार देखा गया कि महिलाओं को स्टेज पर बिठाया गया। इससे पहले कभी भी भाजपा ने महिलाओं को स्टेज पर जगह तक नहीं दी और अब सिम्प्थी लेने के लिए इस तरह की नौटंकी कर रहे हैं। उनकी मंशा महिलाओं को आरक्षण देने की नहीं बल्कि राजनीतिक ड्रामा करने की है।
उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश कांग्रेस की अध्यक्ष पद पर तीन-तीन महिलाएं रही है लेकिन 40 साल में भाजपा ने एक बार भी महिला को अपनी पार्टी का अध्यक्ष नहीं बनाया महिलाओं के इतने शुभचिंतक है तो अपनी पार्टी में उच्च पदों पर भाजपा क्यों नहीं बैठी है

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