शिमला, सुरेन्द्र राणा: आने वाले दिनों में ड्राइविंग टेस्ट देने के लिए युवाओं को एमवीआई के पास नहीं जाना होगा और न ही आरटीओ के चक्कर काटने होंगे। जिन ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटरों में युवा गाड़ी सीखेंगे, वही उनका लाइसेंस भी बनाकर देंगे। इसके लिए उनको अधिकृत किया जाएगा, जो टेस्ट लेने के बाद आरटीओ को दस्तावेज भेजेंगे। ऑनलाइन ही वहां से हस्ताक्षरित लाइसेंस गाड़ी सीखने वालों को मिल जाएगा। भविष्य में प्रदेश में ऐसे कई ड्र्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर खोले जाएंगे, जिनके पास केंद्रीय मंत्रालय की रजिस्ट्रेशन होगी और प्रदेश सरकार भी इनको मंजूरी प्रदान करेगी। अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस जो सेंटर होंगे, उनको केंद्रीय मंत्रालय से सबसिडी भी हासिल होगी। यह सबसिडी अधिकतम सात करोड़ रुपए तक की हो सकती है। इसमें चार वर्ग रहेंगे, जिसमें सबसे नीचे चौथे वर्ग में ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल आएंंगे। इनको भी पंजीकृत किया जाएगा और वे भी ड्राइविंग लाइसेंस देने के लिए अधिकृत होंगे। आने वाले समय में यह एक बड़ा प्रोजेक्ट प्रदेश में चलने वाला है, जिसको यहां पर लागू करने के लिए केंद्र सरकार ने राज्य सरकार को लिखा है। प्रदेश के परिवहन महकमे ने भी इसपर काम शुरू कर दिया है और जल्दी ही वह इसकी औपचारिकताओं को पूरा करके कंपनियों से आवेदन मांगेगा।
कंपनियां यहां पर ऐसे टेस्टिंग स्कूल खोल सकती हैं, जिसमें केंद्र सरकार की सबसिडी भी हासिल होगी। अभी ड्राइविंग लाइसेंस बनाने के लिए जिस तरह की माथापच्ची की जाती है, वो भविष्य में नहीं रहेगी और जहां पर युवा गाड़ी सीखेगा, वहीं पर लाइसेंस बनाने की भी व्यवस्था कर दी जाएगी। सडक़ परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने इसको लेकर नियमों में बड़ा बदलाव किया है।राज्य सरकार इसी साल से इन नियमों को लागू करने जा रही है। परिवहन निदेशालय ने इसके लिए प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके तहत सरकारी क्षेत्रीय परिवहन कार्यालयों (आरटीओ) के बजाय निजी ड्राइविंग स्कूलों में ड्राइविंग टेस्ट दे सकते हैं। हिमाचल में इसके लिए ड्राइविंग टेस्टिंग स्टेशन खोले जाएंगे। निजी क्षेत्र के सहयोग से ये केंद्र खोले जाएंगे। परिवहन विभाग ने इस योजना का प्रचार प्रसार करना शुरू कर दिया है, ताकि ज्यादा से ज्यादा सेंटर हिमाचल में खुल सकें। इन निजी स्कूलों को ड्राइविंग लाइसेंस के लिए आवश्यक परीक्षण लेने और प्रमाण पत्र प्रदान करने की अनुमति दी जाएगी। परिवहन निदेशक डीसी नेगी ने बताया कि केंद्र सरकार ने
यह नियम बनाया है।
ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर खोलने के लिए केंद्र सरकार अढ़ाई करोड़ से सात करोड़ तक का अनुदान भी देगी। हिमाचल में निजी क्षेत्र में जो ड्राइविंग स्कूल चल रहे हैं, वे भी इन केंद्रों को खोल सकते हैं। बशर्ते वे सारी सुविधाएं उनके पास होनी चाहिएं, जो इसमें निहित हैं। सेंटर का बाकायदा निरीक्षण किया जाएगा। सभी सुविधाएं होने के बाद ही वह इसे चला सकेगा।ये होंगे नियमनियमों के मुताबिक ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर के पास कम से कम एक एकड़ जमीन होनी चाहिए। यदि वे चार पहिया वाहनों के लिए प्रशिक्षण देते हैं, तो उन्हें दो एकड़ जमीन की आवश्यकता होगी। ड्राइविंग स्कूलों को उचित परीक्षण सुविधा होनी चाहिए। प्रशिक्षकों के पास हाई स्कूल डिप्लोमा कम से कम पांच साल का ड्राइविंग अनुभव व बायोमीट्रिक्स और आईटी सिस्टम का ज्ञान होना चाहिए। ड्राइविंग प्रशिक्षण व ड्राइविंग टेस्ट की वेरिफिकेशन के लिए नियम इतने सख्त हैं कि कोई इसमें फ्रॅाड नहीं कर सकेगा।
