जीएसटी पंजीकृत ठेकेदार ही करेंंगे पंचायतों में काम

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शिमला, सुरेंद्र राणा; अब स्थानीय निकाय में वो ही ठेकेदार काम कर पाएंगे, जिनका जीएसटी में पंजीकरण होगा। जो ठेकेदार जीएसटी के तहत पंजीकृत होगा, अब वही ठेकेदार स्थानीय निकायों में काम कर पाएगा। ठेकेदार पंजीकृत नहीं है, तो टीडीएस नहीं कटेगा और ऐसे में स्थानीय निकाय डिफाल्टर की श्रेणी में आ सकता है। यह बात आबकारी कराधान विभाग की राज्य सहायक आयुक्त पूनम ठाकुर ने पंचायती राज विभाग के प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान कही है। उन्होंने बताया कि स्थानीय निकाय में 2.50 लाख रुपए से अधिक की खरीद और भुगतान पर अब टीडीएस काटना होगा और टीडीएस का भुगतान अगले महीने की दस तारीख से पहले करना पड़ेगा।

भुगतान में देरी होने पर स्थानीय निकाय प्रतिनिधियों को जुर्माना चुकाना होगा। स्थानीय निकाय एक राज्य के भीतर ही खरीद करते हैं, तो उन्हें एक प्रतिशत जीएसटी और एक प्रतिशत आईजीएसटी चुकाना होगा। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया को अपनाने से राज्य सरकार के राजस्व में बढ़ोतरी होने के साथ ही काम की गुणवत्ता में भी सुधार होगा।

पूनम ठाकुर ने बताया कि इस मौके पर स्थानीय निकायों के प्रतिनिधियों को जीएसटी के तहत विभिन्न अनुपालनों के बारे में अवगत कराया गया। पूनम ठाकुर ने बताया कि जीएसटी के प्रावधानों को लेकर समूचे प्रदेश में जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। इस क्रम में बीते दिनों उन्होंने प्रदेश स्तरीय कार्यशाला को मंडी में भी संबोधित किया था।

स्टेट ट्रेनिंग सेंटर ढांगसी धार मंडी में दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान जीएसटी और टीडीएस के भुगतान की जानकारी दी गई।

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