शिमला, सुरेन्द्र राणा: सयुंक्त राष्ट्र की सतत विकास लक्ष्यों अनुसार सभी देशो ने वर्ष 2030 तक टीबी उन्मूलन का लक्ष्य निर्धारित किया है। भारत सरकार ने वर्ष 2025 तक टीवी, उन्मूलन का लक्ष्य निर्धारित किया है और वही लक्ष्य प्रदेश सरकार द्वारा 2024 तक सुनिश्चित करने का निर्णय लिया गया है।
टीबी उन्मूलन से तात्पर्य है की वर्ष 2015 की तुलना में टीबी Incidence में 80 % की घटौती। टीबी सम्बन्धी जागरुकता बढ़ाने के उदेश्य से हर वर्ष 24 मार्च को विश्व टीबी दिवस मनाया जाता है ।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी, जिला शिमला डॉक्टर सुरेखा चोपड़ा ने यह जानकारी देते हुए बताया कि जिला शिमला में 826 टीबी मरीज़ इस वक्त उपचाराधीन है। इन सभी टीबी मरीजों को सरकार द्वारा निशुल्क दवा के साथ निक्षय पोषण योजना के अंतर्गत 500 रुपये की राशी प्रतिमाह दी जा रही है साथ ही DRTB (Drug Resistant TB) मरीजों को प्रदेश सरकार द्वारा 1500 रूपये राशी प्रतिमाह दी जा रही है।
इस के अतिरिक्त हर टीबी के मरीज़ को मुफ्त उपचार, मुफ्त, CT/ MRI और travel reimbursement (यात्रा प्रतिपूर्ति ) की सुविधा भी दी जा रही है। किसी भी व्यक्ति को यदि खांसी, बुखार, वजन घटना इत्यादि के लक्षण हों तो वह निकटतम स्वास्थ्य केंद्र में जा कर परामर्श ले और अपना बलगम जाँच के लिए दे ।
आशा कार्यकर्ता द्वारा बलगम सैंपल घर द्वार से उठाने का प्रावधान है। टीबी के लिए उच्च जोखिम वाले समूह के व्यक्तियों को खास ध्यान रखने की आवश्यकता है, विशेष कर sugar के मरीज़, HIV/AIDS से। ग्रस्त मरीज डायलिसिस तथा क्रोनिक किडनी कैंसर रोगी COVID से ठीक हुए मरीज़ वह मरीज जो Steroid Therapy पर है इत्यादि। ऐसे मरीजों की टीबी जाँच के लिए बलगम सैंपल सीधे NAAT / Molecular Diagnostic Centers भेजा जाता है । प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत कोई भी व्यक्ति निक्षय मित्र बनकर टीबी के मरीज को गोद ले कर उनके पोषण और देखभाल की जिम्मेदारी लेकर अपनी सहभागिता सुनिश्चित कर सकता है।
