शिमला, सुरेंद्र राणा: हिमाचल प्रदेश में लगातार बदलते मौसम और ठंड के चलते बागवानी एवं कृषि क्षेत्र को भारी नुकसान हुआ है। राजस्व मंत्री जगत नेगी ने कहा है कि अभी नुकसान का विस्तृत आंकलन किया जा रहा है और रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।
उन्होंने कहा कि कहा कि मई माह में भी शिमला सहित कई क्षेत्रों में ठंड का असर बना हुआ है, जिसका प्रतिकूल प्रभाव फलों की फसल पर पड़ रहा है। कई स्थानों पर ओलावृष्टि और खराब मौसम के कारण फ्लावरिंग प्रभावित हुई है, जिससे बागवानों को नुकसान झेलना पड़ा है।
जगत नेगी ने कहा कि सरकार की तरफ जो राहत राशि की व्यवस्था तो की जाती है, वह सहायता बहुत कम है। केंद्र सरकार से बार-बार आग्रह किया गया है कि वेदर बेस्ड फसल बीमा योजना से अधिक से अधिक बागवानों को जोड़ा जाए। हिमाचल में करीब साढ़े तीन लाख बागवान हैं, लेकिन इनमें से 75 हजार से भी कम लोगों ने फसल बीमा का लाभ लिया है। जिन किसानों और बागवानों ने बीमा करवाया, उन्हें नुकसान की स्थिति में अच्छा लाभ मिला है।
उन्होंने यह भी कहा कि वर्ष 2023 और 2025 में प्राकृतिक आपदाओं के दौरान प्रदेश सरकार ने आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद आपदा प्रभावित लोगों और बागवानों को केंद्र से मिलने वाली राहत से कई गुना अधिक सहायता राशि दी। हालांकि, हर बार इस स्तर पर राहत देना संभव नहीं होगा।
वहीं नगर निगम, पंचायतों और जिला परिषदो के चुनावों को लेकर उन्होंने कहा कि अभी तो प्रचार तेज़ शुरू होना है। कांग्रेस की स्थिति मजबूत है। उन्होंने कहा कि सरकार और पंचायत राज संस्थानों के अधिकार क्षेत्र अलग हैं। संविधान में सभी संस्थाओं की जिम्मेदारियां तय हैं।
पंचायत, समिति और जिला परिषद अपने-अपने दायरे में कार्य करती हैं, जबकि प्रदेश सरकार की जिम्मेदारियां अलग हैं। ऐसे में कई बार स्थानीय निकाय ऐसे वादे कर देते हैं जिन्हें उनके अधिकार क्षेत्र और बजट के कारण पूरा करना संभव नहीं होता। चुनावों में विकास ही मुख्य मुद्दा है और सभी संस्थाओं को अपने अधिकार एवं उपलब्ध बजट के अनुसार कार्य करना चाहिए।
