वेव सोसायटी मोहाली में आवारा कुत्तों से बढ़ते खतरे को लेकर निवासियों ने उठाई आवाज, सार्वजनिक स्थानों पर खिलाने पर रोक की मांग

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शिमला,सुरेंद्र राणा: वेव सोसाइटी मोहाली में आवारा कुत्तों से लगातार बढ़ते खतरे और उनकी बढ़ती संख्या को लेकर रविवार को एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई, जिसमें 80 से अधिक निवासी शामिल हुए। बैठक में यह चिंता जाहिर की गई कि सोसाइटी में बच्चों, बुजुर्गों और आम निवासियों की सुरक्षा अब खतरे में है।

कुत्तों के काटने की घटनाएं बढ़ रही हैं और रेबीज जैसी जानलेवा बीमारियों का खतरा मंडरा रहा है।बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि अब सोसाइटी में सार्वजनिक स्थानों पर कुत्तों को खाना खिलाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। यह तय किया गया कि प्रत्येक ब्लॉक में 5 से 10 लोगों की एक स्वयंसेवी निगरानी टीम गठित की जाएगी, जो इस बात पर नजर रखेगी कि कोई भी व्यक्ति पार्क, सड़क या मकानों के बाहर कुत्तों को भोजन न दे। यदि कोई व्यक्ति कुत्तों को खाना खिलाना चाहता है तो उसे यह कार्य अपने घर के भीतर ही करना होगा।साथ ही यह भी तय किया गया कि जो लोग नियमित रूप से कुत्तों को सार्वजनिक स्थानों पर खाना खिलाते हैं, उनकी पहचान की जाएगी और उनसे शालीनता के साथ अनुरोध किया जाएगा कि वे यह कार्य सार्वजनिक रूप से न करें।

बैठक में यह भी सहमति बनी कि यदि कोई आवारा कुत्ता आक्रामक व्यवहार करता है या लोगों के लिए खतरा बनता है, तो उसकी जानकारी तुरंत ब्लॉक ग्रुप में साझा की जाएगी, ताकि मामले को नगर निगम, जिला प्रशासन या एसडीएम तक पहुंचाकर उचित कार्रवाई करवाई जा सके। यदि इस दौरान कोई व्यक्ति प्रशासनिक कार्रवाई में बाधा डालता है, तो सोसाइटी के निवासी पूरी तरह से अधिकारियों के साथ खड़े रहेंगे।इसके अलावा यह भी तय हुआ कि यदि किसी को आवारा कुत्ता काटता है, तो उस क्षेत्र में कुत्तों को खिलाने वाले व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई जाएगी और उस पीड़ित परिवार को समाज का पूरा सहयोग दिया जाएगा।पालतू कुत्तों के मालिकों को लेकर भी सख्त रुख अपनाया गया। बैठक में कहा गया कि कोई भी पालतू कुत्ता पार्क या सड़क पर पेशाब या शौच करता है, तो उस पर निगरानी रखी जाएगी और जरूरत पड़ने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

सभी पालतू कुत्तों का टीकाकरण अनिवार्य किया गया है और उनके प्रमाणपत्र सार्वजनिक रूप से साझा किए जाएंगे, ताकि संक्रमण के जोखिम से बचाव किया जा सके।बैठक में यह प्रस्ताव भी सामने आया कि यदि प्रशासन अनुमति देता है तो समाज अपने स्तर पर फंड एकत्र कर एक डॉग शेल्टर (कुत्ताघर) बनाने के लिए तैयार है। इसके प्रबंधन की जिम्मेदारी भी स्वयंसेवी निवासी निभाएंगे।बैठक के समापन पर एस.एस. ढिल्लों ने कहा कि यह केवल असुविधा का मुद्दा नहीं है, बल्कि हमारे परिवारों की सुरक्षा का मामला है। उन्होंने सभी निवासियों से सतर्क रहने की अपील की और विशेष रूप से बुजुर्गों और बच्चों को टहलने के दौरान सुरक्षा के तौर पर एक लाठी साथ रखने की सलाह दी।

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