पंजाब दस्तक
— सुरेंद्र राणा, ब्यूरो चीफ
शिमला।
शिमला के चक्कर बाइफरकेशन (पुराना बैरियर) के पास मुख्य सड़क पर आए भारी मलबे ने सिर्फ ट्रैफिक ही नहीं रोका है, बल्कि हमारी सामूहिक सोच पर भी एक बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है। ‘पंजाब दस्तक’ की इस विशेष पड़ताल में जो सच सामने आया है, उसे देखकर अब हर नागरिक को आत्ममंथन करना होगा। आखिर हम कब तक हर छोटी-बड़ी बात के लिए सिर्फ सरकार को कोसते रहेंगे? कब हम खुद अपनी जिम्मेदारी समझेंगे? “अपना देश, अपनी सड़क, अपने जंगल और अपना हिमाचल”—अगर हमारी सोच ऐसी नहीं होगी, तो हम खुद ही अपने इस खूबसूरत राज्य को तबाही की तरफ धकेल देंगे।
रसूखदारों की ‘मलबे वाली चोरी’: गर्मियों में जंगलों में छिपाया, बरसातों में सड़कों पर आया!
सच तो यह है कि शिमला और इसके आसपास जहां भी रसूखदार लोग अपने बड़े-बड़े मकान और आलीशान आशियाने बना रहे हैं, वहां से निकलने वाले मलबे को ठिकाने लगाने के लिए एक बेहद शर्मनाक और शॉर्टकट तरीका अपनाया जा रहा है:
रात के अंधेरे का फायदा: दिनभर कंस्ट्रक्शन का काम चलता है और रात होते ही लेबर बुलाकर मलबे को ट्रकों और पिकअप गाड़ियों में भरा जाता है। फिर रात के सन्नाटे का फायदा उठाकर इस मलबे को चुपके से हमारे खूबसूरत जंगलों में और मुख्य सड़कों के ठीक ऊपर वाले हिस्सों में फेंक दिया जाता है।
जमीन धंसने और प्रदूषण का खतरा: सूखी गर्मियों में तो यह चोरी छिपी रहती है, लेकिन जैसे ही अब तेज बारिशें शुरू हुई हैं, पहाड़ों और जंगलों में अवैध रूप से फेंका गया यही मलबा पानी के तेज बहाव के साथ बहकर सीधे मुख्य सड़कों पर आ रहा है। इससे न सिर्फ ट्रैफिक ठप हो रहा है, बल्कि हमारी पहाड़ी जमीनें धड़क रही हैं (धंस रही हैं), जंगल दूषित हो रहे हैं और पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंच रहा है।
पंजाब दस्तक के दर्शकों और आम लोगों की मांग: जहां मकान बन रहे हैं वहां इन सीधे सवालों से सुधरेगा सिस्टम
अब पानी सिर से ऊपर निकल चुका है। आम जनता को तो खुद जागरूक होना ही होगा, लेकिन जो लोग जानबूझकर इस जानलेवा खेल को अंजाम दे रहे हैं, उन पर नकेल कसने के लिए प्रशासन तुरंत एक स्पेशल team बनाकर फील्ड में उतारे, ऐसी पंजाब दस्तक के दर्शकों और आम लोगों की पुरजोर मांग है। लोगों का कहना है कि यह टीम सीधे उन जगहों पर जाए जहां मकान बन रहे हैं और मौके पर जाकर मकान बनाने वालों से सीधे ये कड़े सवाल पूछे:
”अभी जो आपका यह मकान बन रहा है, इसका जो भारी मलबा निकल रहा है, उसे आप कहां फेंकेंगे?”
”इस निर्माण कार्य से जो भी मिट्टी और पत्थर आगे निकलेंगे, उसे किस गाड़ी में भरकर और किस अधिकृत जगह पर ले जाया जाएगा?”
”क्या इस मलबे को उठाने के लिए आपने पहले ही जिम्मेदारी तय की है? यदि हां, तो उसका पूरा रूट प्लान क्या है?”
दर्शकों और प्रबुद्ध जनता का मानना है कि प्रशासन को हर एक उस साइट पर जाना चाहिए जहां मकान बन रहे हैं और वहां जाकर इस मलबे के ठिकाने और गाड़ियों का पूरा एडवांस हिसाब-किताब खुद तय करना होगा, ताकि काम के दौरान अवैध डंपिंग का रास्ता पूरी तरह बंद हो सके।
पिकअप और ट्रकों की सख्त निगरानी
इसके साथ ही, रात के समय जंगलों और संवेदनशील सड़कों के किनारे मलबा फेंकने वाली पिकअप गाड़ियों और ट्रकों पर तीखी नजर रखी जाए, सीक्रेट गश्त लगाई जाए और चोरी-छिपे डंपिंग करने वालों को रंगे हाथों पकड़कर गाड़ियां सीज की जाएं।
हमारा हिमाचल हमारी शान है। अगर हम खुद अपने जंगलों और सड़कों की हिफाजत नहीं करेंगे, तो हर बरसात में यह आफत आती रहेगी। चक्कर में लोक निर्माण विभाग रास्ता साफ करने में जुटा है, लेकिन अब इन मकान बनाने वालों की इस खतरनाक ‘मलबे वाली चोरी’ पर प्रशासन को पहले ही दिन से सख्त होना होगा।
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