चंडीगढ़ (पंजाब दस्तक ब्यूरो) | ब्यूरो चीफ: सुरेंद्र राणा (Surender Rana)
मानसा/चंडीगढ़:
नशा तस्करों के खिलाफ बुलंद आवाज़ उठाने वाले परमिंदर सिंह झोटा के सनसनीखेज कत्ल के बाद पूरे सूबे में जनाक्रोश फूट पड़ा है। पुलिस-प्रशासन की कथित ढिलाई और नशा माफिया की खुली गुंडागर्दी के विरोध में आज, 15 अक्टूबर को पंजाब बंद का बड़ा ऐलान किया गया है। पीड़ित परिवार, इंसाफ संघर्ष कमेटी, किसान जत्थेबंदियों के साथ-साथ प्रमुख विपक्षी दलों ने सड़क पर उतरने की पूरी तैयारी कर ली है।
⚠️ क्या सरकार ने छुट्टी घोषित की है? जानिए असल सच्चाई
आम जनता के बीच यह बड़ा सवाल है कि क्या सरकार की ओर से बंद का कोई आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी हुआ है?
स्पष्ट कर दें: यह बंद पंजाब सरकार द्वारा नहीं बुलाया गया है, बल्कि सरकार और पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली के खिलाफ जन-आंदोलन है। इसलिए सरकार की तरफ से कोई नोटिफिकेशन या अवकाश जारी नहीं किया जाएगा।
हालांकि, इस बंद को सियासी और सामाजिक स्तर पर भारी समर्थन मिला है। कांग्रेस पार्टी ने बाकायदा लिखित समर्थन पत्र जारी किया है, जबकि शिरोमणि अकाली दल, एसजीपीसी और प्रमुख किसान जत्थेबंदियों ने इस बंद को कामयाब बनाने के लिए कमर कस ली है।
⏰ सुबह 6 से शाम 5 बजे तक चक्का जाम: आम जनजीवन पर क्या पड़ेगा असर?
सड़कों पर पहिये थमेंगे: प्रदर्शनकारियों ने मुख्य हाईवे और संपर्क मार्गों पर चक्का जाम करने की घोषणा की है। सुबह 6:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक वाहनों की आवाजाही ठप रहने की संभावना है।
स्कूल, कॉलेज व बसें: जब सड़कों पर बसें और निजी वाहन नहीं चलेंगे, तो स्कूलों और कॉलेजों में पढ़ाई सीधे तौर पर प्रभावित होगी। संघर्ष कमेटी ने शिक्षण संस्थानों से भी बंद का समर्थन करने की अपील की है।
बाजार और व्यापारिक प्रतिष्ठान: व्यापारी भाइयों और दुकानदारों से हाथ जोड़कर अपील की गई है कि वे अपनी दुकानें पूरी तरह बंद रखकर इस इंसाफ की लड़ाई में साथ दें।
🛑 30 घंटे बाद एफआईआर क्यों? ये हैं इंसाफ मोर्चे की 3 बड़ी मांगें
परमिंदर के पिता और इंसाफ मोर्चे का सीधा आरोप है कि उनके बेटे ने नशा माफिया के खिलाफ मुहिम छेड़ी थी, जिसके चलते उसकी जान ली गई। परिजनों में सबसे बड़ा रोष इस बात का है कि वारदात के करीब 30 घंटे बाद जाकर पुलिस ने एफआईआर दर्ज की।
प्रदर्शनकारियों ने सरकार के सामने रखी हैं ये प्रमुख शर्तें:
मामले में लापरवाही बरतने वाले संबंधित SHO, DSP और SSP को तुरंत बर्खास्त किया जाए।
सूबे में लचर कानून-व्यवस्था की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए मुख्यमंत्री इस्तीफा दें।
नशा तस्करों और हत्यारों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई हो।
📢 दैनिक यात्रियों के लिए जरूरी सलाह:
संघर्ष कमेटी ने साफ किया है कि यह प्रदर्शन पूरी तरह शांतमयी (अहिंसक) रहेगा। यदि आप नौकरीपेशा हैं या किसी बेहद जरूरी काम से बाहर निकल रहे हैं, तो घर से निकलने से पहले स्थानीय रास्तों और अपने दफ्तर से स्थिति की पुष्टि जरूर कर लें, ताकि रास्ते में किसी परेशानी का सामना न करना पड़े।
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