हिमाचल प्रदेश में नए जिलों के गठन और प्रशासनिक पुनर्गठन पर उठे सवाल

प्रशासनिक फेरबदल या खाली खजाने पर नया बोझ: नए जिलों की सुगबुगाहट पर उठे तीखे सवाल, क्या परवान चढ़ेगी पुरानी कवायद?

Spread the love

​मीनाक्षी, वरिष्ठ पत्रकार (‘पंजाब दस्तक’)


​शिमला: हिमाचल प्रदेश में नए प्रशासनिक जिलों के गठन और प्रशासनिक इकाइयों के पुनर्गठन की सुगबुगाहट तेज होने के बाद सियासी पारा चढ़ गया है। सरकार ने सेवानिवृत्त न्यायाधीश धर्मचंद चौधरी के नेतृत्व में चार सदस्यीय आयोग का गठन कर दिया है, जिसे छह महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट देने के निर्देश मिले हैं। इस आयोग का मुख्य ठिकाना राजधानी शिमला में रहेगा, जहां राजस्व विभाग और विभिन्न जिलों के उपायुक्त (DC) सभी जरूरी दस्तावेज व जनसंख्या के आंकड़े मुहैया कराएंगे। वहीं, जीएडी (GAD) प्रशासन विभाग की ओर से कार्यालय, मंत्रालय का स्टाफ, गाड़ियां और अन्य जरूरी संसाधन जुटाए जाएंगे।


​न्याय प्रणाली, प्रोटोकॉल और नौकरशाही का भारी-भरकम लवाजमा
​नए जिलों के गठन से केवल एक डीसी या एसपी का कार्यालय ही नहीं खुलता, बल्कि पूरे जिले का प्रशासनिक व न्यायिक ढांचा शून्य से खड़ा करना पड़ता है। इसमें जिला एवं सत्र न्यायाधीश (District & Sessions Judge) का पूरा न्यायपीठ, कोर्ट रूम, वकीलों के चैंबर और न्यायिक प्रोटोकॉल से जुड़ा भारी-भरकम लवाजमा शामिल होता है। इसके साथ ही:
​शीर्ष प्रशासनिक पद व प्रोटोकॉल: प्रत्येक नए जिले में उपायुक्त (DC), पुलिस अधीक्षक (SP), सहायक आयुक्त (AC), खजाना अधिकारी (Treasury Officer) और न्यायिक अधिकारियों के लिए नए पद, बंगला, प्रोटोकॉल स्टाफ और सरकारी वाहनों का बेड़ा तैयार करना पड़ता है।
​विभागीय मुख्यालय: स्वास्थ्य (CMO), शिक्षा (DDHE/DDEE), लोक निर्माण विभाग (XEN/SE) जैसे दर्जनों महकमों के जिला स्तरीय दफ्तर और उनके लिए अतिरिक्त प्रशासनिक अमला तैनात करना होता है।
​करोड़ों का शुरुआती व आवर्ती खर्च: नए जिला परिसरों के निर्माण, अधिकारियों के आवास, कार्यालयों के रखरखाव और गाड़ियाँ खरीदने में ही सैकड़ों करोड़ रुपये पानी की तरह बह जाते हैं।


​डिजिटल युग में भारी खर्च पर आम जनता का तीखा सवाल
​आज के इस दौर में जब तकरीबन सारा काम ऑनलाइन हो रहा है और राजस्व, राशन कार्ड, प्रमाण पत्र जैसी अधिकांश नागरिक सेवाएं डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं, तब आम लोगों का मानना है कि इतने भारी-भरकम खर्चे और नए दफ्तरों की क्या वास्तविक जरूरत है? जब घर बैठे या नजदीकी लोक मित्र केंद्रों से काम हो रहे हैं, तो खाली खजाने पर नया बोझ डालना समझ से परे है।


​नए जिलों के गठन से फायदे और सहूलियतें
​हालांकि, इस कदम के अपने कुछ बड़े प्रशासनिक और सामाजिक फायदे भी हैं:
​दूरी और समय की बचत: दूरदराज और दुर्गम इलाकों के लोगों को अपने छोटे-छोटे प्रशासनिक व न्यायिक कामों के लिए सौ-दो सौ किलोमीटर दूर जिला मुख्यालयों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।
​त्वरित विकास और निगरानी: छोटे जिलों में प्रशासनिक पकड़ मजबूत होती है, जिससे सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन तेज़ी से होता है और कानून-व्यवस्था बेहतर रहती है।


​’पंजाब दस्तक’ से बोले पूर्व मुख्य सचिव डॉ. श्रीकांत बाल्दी
​’पंजाब दस्तक’ से खास बातचीत करते हुए राज्य के पूर्व मुख्य सचिव डॉ. श्रीकांत बाल्दी ने कहा कि आम जनता की जरूरतों के अनुसार जिलों का गठन और प्रशासनिक पुनर्गठन एक अच्छा कदम है, जिससे दूरदराज के लोगों को सुविधा मिलेगी। हालांकि, उन्होंने सचेत किया कि नए जिले बनाने से प्रशासनिक खर्च में भारी बढ़ोतरी होगी। चूंकि हिमाचल की माली हालत और वित्तीय सेहत किसी से छिपी नहीं है, इसलिए सभी पहलुओं को देखना होगा। उन्होंने याद दिलाया कि इससे पहले भी कई बार ऐसी कवायद हुई थी, लेकिन वे सिरे नहीं चढ़ सकी थीं।


​धूमल दौर की कवायद और चुनावी टाइमिंग का पेच
​हिमाचल में नए जिलों का खाका कई बार बना, लेकिन हकीकत में तस्वीर नहीं बदली। प्रोफेसर प्रेम कुमार धूमल के कार्यकाल (2002 से ही) देहरा, नूरपुर, पालमपुर, सुंदरनगर, महासू, रामपुर और करसोग को जिला बनाने की मांग और चर्चाएं होती रही हैं, लेकिन बात कागजों से आगे नहीं बढ़ सकी थी।


​अब सबसे बड़ा सवाल चुनावी टाइमिंग को लेकर है। आयोग को रिपोर्ट सौंपने के लिए 6 महीने का समय दिया गया है। 6 महीने बाद रिपोर्ट आएगी और उसके महज 3-4 महीने बाद राज्य में चुनावी माहौल शुरू हो जाएगा। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या वित्तीय तंगी के बीच इतने कम समय में यह खाका ज़मीन पर उतरेगा या यह भी पिछले दौर की तरह महज एक चुनावी कागजी दांव बनकर रह जाएगा? परंतु सरकार तो सरकार है, देखना होगा कि यह पहल रंग लाती है या फिर फाइलों में ही सिमट कर रह जाती है।


​ऐसी ही तीखी और धारदार खबरों के लिए ‘पंजाब दस्तक’ चैनल को तुरंत सब्सक्राइब करें, फॉलो करें और शेयर करें।
​देखते रहिए ‘पंजाब दस्तक’ — सच की आवाज आपके साथ

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *