दवा की आड़ में सरेआम बिक रहा था जहर, शिकायतों के बावजूद प्रशासन की चुप्पी ने छीनी एक नौजवान की जान
गोली चलाने से पहले केमिस्ट ने किसे मिलाया था फोन? सियासी रसूख और खाकी की मिलीभगत पर उठे तीखे सवाल
लाशों पर सियासी गिद्ध-दृष्टि: पहले अकाली-कांग्रेस के राज में फला-फूला नशा, अब ‘आप’ के वादे भी साबित हुए खोखले
सुरेंद्र सिंह राणा
ब्यूरो चीफ, ‘पंजाब दस्तक’
मानसा: पंजाब के मानसा में दिन-दहाड़े नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा का कत्ल केवल दो गुटों की आपसी रंजिश नहीं, बल्कि पंजाब में बेखौफ घूम रहे नशा माफिया और नकारा साबित हो चुकी कानून-व्यवस्था का खुला प्रमाण है। भरी मार्केट में स्थित अश्विनी कुमार के मेडिकल स्टोर पर फेसबुक लाइव के दौरान तीन गोलियां दागकर झोटा की जान ले ली गई। इस सनसनीखेज वारदात ने पूरे पंजाब में सनसनी फैला दी है और सरकार के नशा-मुक्ति के दावों की हवा निकाल दी है।
प्रशासन की नाक तले मौत का कारोबार
मानसा का बच्चा-बच्चा जानता था कि आरोपी अश्विनी कुमार के मेडिकल स्टोर से प्रतिबंधित नशीली दवाओं का गोरखधंधा चलता है। जुलाई 2023 के विवाद में जब पहली बार इस दुकान पर नशीली दवाएं पकड़ी गई थीं, तब पुलिस ने तस्करों पर नकेल कसने की बजाय उल्टा झोटा पर ही मुकदमे दर्ज कर दिए थे। सवाल यह है कि स्वास्थ्य विभाग और पुलिस की सरपरस्ती के बिना कोई केमिस्ट खुलेआम नशे की दुकान चलाने और हाथ में लोडेड रिवाल्वर रखने की हिम्मत कैसे कर सकता था?
सिक्के का दूसरा पहलू: ललकार और सीधे टकराव का जोखिम
मामले की निष्पक्ष पड़ताल करें तो दूसरा पहलू यह भी है कि क्या बिना पुलिस सुरक्षा के एक हथियारबंद व्यक्ति की दुकान में घुसकर उसे उकसाना सही था? वायरल वीडियो में झोटा स्पष्ट रूप से कहते सुने जा सकते हैं:
”अगर हिम्मत है तो मार गोली, तू भी 20 साल के लिए अंदर जाएगा।”
कानूनी प्रक्रिया के तहत पुलिस और ड्रग विभाग को साथ लेकर रेड करवाने का रास्ता था। लेकिन जमीनी हकीकत यह भी है कि जब थानों में शिकायतें रद्दी बन जाती हैं, तो लाचार नौजवान खुद सड़कों पर उतर आते हैं। बहरहाल, सीधे टकराव और उकसावे ने एक परिवार का चिराग बुझा दिया।
गोली चलने से पहले की फोन कॉल: कौन है असली मास्टरमाइंड?
चश्मदीदों और वीडियो के अनुसार, गोली दागने से ठीक पहले केमिस्ट अश्विनी कुमार ने किसी को फोन मिलाया था। यह फोन कॉल इस पूरे मामले का सबसे अहम सुराग है—क्या फोन के उस पार किसी सफेदपोश या बड़े नशा सिंडिकेट का हाथ था, जिसने हत्या की हरी झंडी दी? हालांकि घटना के बाद आरोपी को राजस्थान के सालासर से गिरफ्तार कर लिया गया है, लेकिन कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) सार्वजनिक किए बिना असली साजिशकर्ता बेनकाब नहीं होंगे।
लाश पर सियासत और चुनावी पाखंड
घटना के तुरंत बाद सुखबीर सिंह बादल, सुनील जाखड़ और केवल सिंह ढिल्लों समेत विरोधी दलों के नेता मानसा की ओर दौड़ पड़े। लेकिन जनता पूछती है कि जब अकाली दल और कांग्रेस सत्ता में थे, तब पंजाब में नशा क्यों नहीं रुका? उन्हीं के दौर में नशे की जड़ें पंजाब में गहरी हुईं। दूसरी ओर, आम आदमी पार्टी ने सत्ता में आने से पहले चंद हफ्तों में नशा खत्म करने की कसमें खाई थीं। आज मोहाली से लेकर मानसा तक हर गली में सिंथेटिक और मेडिकल नशा बिक रहा है। अब फिर चुनाव सिर पर हैं, लेकिन हालात जस के तस बने हुए हैं।
देखते रहें ‘पंजाब दस्तक’—सच्ची, बेबाक और जमीनी पत्रकारिता।
