पंजाब दस्तक, सुरेंद्र राणा: प्लॉट खरीद घोटाले में पूर्व वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल कमर पर पट्टा बांधकर वकील के साथ हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद मंगलवार को पहली बार विजिलेंस की जांच में शामिल हुए। उनसे साढ़े तीन घंटे से ज्यादा समय तक पूछताछ चली, इसमें 50 से अधिक सवाल पूछे गए। विजिलेंस अधिकारियों ने पहले मनप्रीत बादल की उक्त मामले में गिरफ्तारी डाली फिर जांच में शामिल किया। विजिलेंस ने बादल से कुछ दस्तावेज मांगे, लेकिन वह साथ लेकर नहीं आए थे। अगली पेशी पर उक्त दस्तावेज जमा करवाने के लिए कहा गया है।
पता चला है कि वह अपने वकील के साथ सुबह साढ़े दस बजे के करीब विजिलेंस दफ्तर पहुंचे थे, इसके बाद उनसे पूछताछ का सिलसिला चला। वह करीब दो बजे तक विजिलेंस के सवालों का सामना करते रहे। विजिलेंस ब्यूरो बठिंडा ने बीती 24 सितंबर को मनप्रीत बादल समेत आधा दर्जन लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया था। इसमें आरोप लगाया गया था कि वित्तमंत्री रहते हुए मनप्रीत बादल ने साल 2021 में मॉडल टाउन फेज-वन में 1560 गज के दो प्लॉट खरीदे थे। विजिलेंस जांच के मुताबिक, इन प्लाटों को खरीदते वक्त पूर्व वित्तमंत्री ने पंजाब सरकार के खजाने पर 65 लाख रुपये की चपत लगाई थी।
इस मामले में मनप्रीत के तीन सहयोगी होटल व्यवसायी राजीव कुमार, कारोबारी विकास अरोड़ा और शराब ठेकेदार के कर्मचारी अमनदीप को विजिलेंस ने गिरफ्तार किया था, जो फिलहाल जेल में हैं। वहीं, बीडीए के तत्कालीन अधिकारी बिक्रमजीत सिंह शेरगिल, सुपरिटेंडेंट पंकज कालिया फरार हैं और उनकी अग्रिम जमानत याचिका बठिंडा अदालत से रद्द हो चुकी है।
हालांकि, कई दिन तक मनप्रीत बादल भूमिगत बने रहे। इस दौरान विजिलेंस ने उनका एलओसी जारी करवाया था। इसके बाद जब वह पकड़ में नहीं आ रहे थे तो अरेस्ट वारंट जारी करवाए थे। इसके बाद मनप्रीत सिंह बादल ने पंजाब एंड हरियाणा कोर्ट की शरण ली थी। 16 अक्तूबर को उन्हें पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट से राहत मिली थी। अदालत ने उन्हें जमानत देते हुए विजिलेंस की जांच ज्वाइन करने को कहा था। 18 अक्तूबर को विजिलेंस ने उन्हें समन भेजकर 23 को पूछताछ के लिए तलब किया था, लेकिन उन्हें अपना मेडिकल भेज दिया था। साथ कहा था कि उनकी तबीयत ठीक नहीं है। इसके बाद अदालत ने उन्हें दोबारा तलब किया था।
मनप्रीत बादल ने कहा कि विजिलेंस ने उन्हें बुलाया इसका वह स्वागत करते हैं। किसी पर केस दर्ज कर लिया तो वह गुनाहगार नहीं हो जाता। आरोप साबित करने के लिए कानूनी प्रक्रिया है। विजिलेंस सरकार की एजेंसी है, इसमें वह जांच पर विश्वास नहीं कर सकते हैं। पंजाब सरकार की हिदायत के अनुसार विजिलेंस काम करती है। अगर निष्पक्ष जांच करवानी है तो केस सीबीआई को सौंपा जाए।
सीएम को नसीहत, जुर्म इतना करो जितना खुद बर्दाश्त कर सको
मनप्रीत बादल ने सीएम भगवंत मान को नसीहत देते हुए कहा कि जुर्म इतना करो जितना खुद बर्दाश्त कर सको। सियासत में हर किसी का समय एक जैसा नहीं होता है। विजिलेंस उन्हें 100 बार बुलाए वह जांच में शामिल होने के लिए आएंगे। उन्हें भारत के कानून व हाईकोर्ट पर पूरा विश्वास है। वह कानून के दायरे में रहकर हर प्रक्रिया का पालन करेंगे।
