मुख्य सलाहकार नासिर असलम वानी और डिप्टी सीएम को हटाने की अड़ी मांग
कैबिनेट विस्तार में उपेक्षा से भड़का NC और निर्दलीय विधायकों का गुस्सा
पंजाब दस्तक’ एक्सक्लूसिव ग्राउंड रिपोर्ट: श्रीनगर से बशीर अहमद
जम्मू-कश्मीर की सियासत से इस वक्त की सबसे बड़ी और सनसनीखेज ख़बर सामने आ रही है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली नई-नवेली सरकार पर बगावत के काले बादल मंडराने लगे हैं। ‘पंजाब दस्तक’ को मिले पुख्ता सूत्रों के मुताबिक, नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) और सरकार को समर्थन दे रहे निर्दलीय (Independent) विधायकों को मिलाकर 15 से ज़्यादा विधायकों ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की कार्यशैली के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। श्रीनगर के राजनीतिक गलियारों में इस बगावत के बाद ज़बरदस्त हड़कंप मचा हुआ है।
कैबिनेट विस्तार के बाद भड़की असंतोष की आग
सूत्रों के अनुसार, विधायकों में पनपे इस भारी गुस्से की मुख्य वजह हाल ही में हुआ कैबिनेट विस्तार और पुनर्गठन है। चुनाव जीतकर आए कई वरिष्ठ और नए विधायकों का आरोप है कि मंत्रिमंडल में जगह देते वक्त निष्ठावान और जनप्रिय नेताओं को पूरी तरह से नज़रअंदाज़ कर दिया गया। निर्दलीय विधायकों का भी कहना है कि सरकार को समर्थन देने के बावजूद उन्हें केवल इस्तेमाल किया गया, जबकि सत्ता की बागडोर कुछ खास चेहरों तक सीमित कर दी गई है।
बगावती गुट की मुख्य मांगें:
मुख्य सलाहकार नासिर असलम वानी की तुरंत छुट्टी: असंतुष्ट विधायकों का सीधा आरोप है कि मुख्यमंत्री के मुख्य सलाहकार नासिर असलम वानी सरकार पर पूरी तरह हावी हैं। चुने हुए विधायकों की अनदेखी कर सलाहकार के इशारों पर फैसले लिए जा रहे हैं, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
डिप्टी सीएम और मंत्रियों को हटाया जाए: बगावती तेवर दिखा रहे विधायकों ने मांग रखी है कि उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी और कुछ अन्य मंत्रियों को तुरंत पद से हटाया जाए और मंत्रिमंडल का नए सिरे से विस्तार किया जाए।
सांसद आगा रूहुल्लाह का बड़ा झटका: केवल विधायक ही नहीं, बल्कि श्रीनगर से NC के सांसद आगा सैयद रूहुल्लाह महदी ने भी पार्टी नेतृत्व के रवैये से सख्त नाराज़ होकर अपनी लोकसभा सीट और पार्टी छोड़ने का ऐलान कर दिया है, जिससे अंदरूनी कलह और गहरी हो गई है।
”हम बागी नहीं, लेकिन तानाशाही मंज़ूर नहीं”
श्रीनगर में असंतुष्ट विधायकों की बंद कमरों के भीतर गुप्त बैठकों का दौर शुरू हो चुका है। असंतुष्ट गुट के एक वरिष्ठ विधायक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “हम सरकार गिराना नहीं चाहते और न ही हम बागी हैं, लेकिन पार्टी और सरकार के भीतर विधायकों का सम्मान और आंतरिक लोकतंत्र बहाल होना चाहिए। अगर हमारी मांगें नहीं मानी गईं तो हम सख्त कदम उठाने पर मजबूर होंगे।”
’पंजाब दस्तक’ का राजनीतिक विश्लेषण
यदि मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने समय रहते इन 15 से ज़्यादा बागी विधायकों की नाराज़गी को दूर नहीं किया, तो निर्दलीय विधायकों के छिटकने से सरकार अल्पमत में आ सकती है। श्रीनगर से जम्मू तक इस खबर के बाद बैठकों और रणनीति का दौर तेज़ हो गया है।
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