पंजाब दस्तक
ब्यूरो रिपोर्ट: भेषज
हिमाचल प्रदेश के नगर निगम मंडी चुनावों के नतीजों ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि मंडी की सियासी जमीन पर पूर्व मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर का जादू बरकरार है। कुल 14 वार्डों में से भाजपा ने 12 सीटों पर ऐतिहासिक जीत दर्ज की है, जबकि कांग्रेस केवल 1 सीट पर सिमट गई और 1 सीट निर्दलीय के खाते में गई। यह जीत भाजपा के मजबूत संगठन और जय राम ठाकुर की जन-जुड़ाव वाली राजनीति का परिणाम है।
अपनों के चक्रव्यूह में फंसी चंपा ठाकुर
मंडी में कांग्रेस जिला अध्यक्ष चंपा ठाकुर के नेतृत्व पर अब गंभीर सवाल उठ रहे हैं। चंपा ठाकुर पूरे चुनाव में अपनों के ही बनाए चक्रव्यूह में फंसी रहीं और गुटबाजी का शिकार हो गईं। उनकी स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वे अपने गृह वार्ड में अपने भाई प्रवीण कुमार की लाज तक नहीं बचा पाईं। नगर निगम की जो एकमात्र सीट ‘Nela Ward’ से कांग्रेस की Narmadava ने जीती है, उसका श्रेय पार्टी की रणनीति को नहीं, बल्कि उनके परिवार के निजी रसूक और दबदबे को जाता है। यदि यह पारिवारिक बैकग्राउंड न होता, तो कांग्रेस का हाल और भी बुरा होता और पार्टी शून्य पर सिमट जाती।
दिग्गजों की निष्क्रियता और विनय कुमार की विफलता
इस करारी हार ने कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व की पोल खोल दी है। कांग्रेस के मंच पर पूर्व सांसद प्रतिभा सिंह, लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह और पूर्व मंत्री कौल सिंह ठाकुर जैसे बड़े दिग्गज मौजूद थे, लेकिन इन सभी का प्रभाव मंडी की जनता पर शून्य रहा। प्रदेश अध्यक्ष विनय कुमार जी के नेतृत्व में पार्टी की नैया पूरी तरह दिशाहीन हो गई है। कौल सिंह ठाकुर की सरकार के विरुद्ध सार्वजनिक बयानबाजी—विशेषकर ट्रांसफरों के मुद्दे पर—ने पार्टी के कार्यकर्ताओं का मनोबल तोड़ने का काम किया है।
जय राम ठाकुर का ‘कर्म’ और जनता का विश्वास
मंडी में भाजपा की जीत के पीछे जय राम ठाकुर की साफ छवि और उनका जमीन से जुड़ाव मुख्य कारण है। वे घर-घर और गांव-गांव घूमते रहे, जबकि विरोधी उनका मजाक उड़ाते रहे, लेकिन जनता ने उनकी मेहनत और ‘सबका साथ, सबका विकास’ की नीतियों पर अपना आशीर्वाद दिया।
भाजपा की इस सफलता पर गीता का सार बिल्कुल सटीक बैठता है:
”यद्यदाचरति श्रेष्ठस्तत्तदेवेतरो जनः।
स यत्प्रमाणं कुरुते लोकस्तदनुवर्तते॥”
(अर्थ: श्रेष्ठ पुरुष जो आचरण करते हैं, सामान्य लोग भी उसी का अनुसरण करते हैं। जय राम ठाकुर के विकास और समर्पण को मंडी की जनता ने अपना प्रमाण माना है।)
निष्कर्ष
मंडी में कांग्रेस की यह हार भाजपा की ऐतिहासिक जीत और कांग्रेस की रणनीति की असफलता का परिणाम है। विनय कुमार जी को अब गंभीर चिंतन करना होगा कि क्या वे पार्टी को इस गुटबाजी से उबार पाएंगे? जनता अब दिग्गजों के आपसी झगड़ों और नाकामियों से ऊब चुकी है, उन्हें केवल ‘काम’ चाहिए।
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