पंजाब दस्तक
करसोग (चुराग), वरिष्ठ पत्रकार उमांश (पंजाब दस्तक):
कहते हैं राजनीति में न कोई स्थाई सगा होता है और न कोई पराया, यहाँ बस ‘कुर्सी’ और ‘क्रोनोलॉजी’ का खेल होता है। ऐसा ही एक बड़ा सियासी भूचाल मंडी जिले के करसोग विधानसभा क्षेत्र में देखने को मिला है, जिसने पूरे सूबे की सियासत में हलचल मचा दी है। चुराग पंचायत समिति के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के चुनाव में भारतीय जाना पार्टी ने आखिरी लम्हों में ऐसी बिसात बिछाई कि सत्ताधारी कांग्रेस हाथ मलती रह गई। भाजपा ने न सिर्फ रणनीति की बाजी जीती, बल्कि समिति के दुर्ग पर अपना पूर्ण कब्जा जमाकर दिखा दिया कि चुनावी चक्रव्यूह रचना किसे कहते हैं।
ऐन मौके पर ‘पलटीमार’ राजनीति: जहाँ देखी कुर्सी, वहीं थाम लिया दामन
इस पूरे चुनाव में सबसे ज्यादा चौंकाने वाला और सियासी गलियारों में सनसनी पैदा करने वाला नाम रहा बीना कपूर का। जो बीना कपूर चुनाव से महज कुछ घंटे पहले तक कांग्रेस की सबसे ‘कट्टर’ समर्थक मानी जा रही थीं और जिन पर कांग्रेस आलाकमान आंख मूंदकर भरोसा कर रहा था, उन्होंने ऐन वक्त पर ऐसा पाला बदला कि हर कोई देखता रह गया।
राजनीति का खेल देखिए—दोपहर होते-होते बीना कपूर ने कांग्रेस का ‘हाथ’ झटक कर भगवा चोला ओढ़ लिया। भाजपा ने भी इस मौके को लपकने में एक सेकंड की देरी नहीं की; उन्हें तुरंत पार्टी में शामिल कर सीधे अध्यक्ष पद का उम्मीदवार बना दिया। नतीजा यह हुआ कि वह उसी दिन पंचायत समिति की अध्यक्ष निर्वाचित घोषित कर दी गईं। वहीं, दूसरी ओर उपाध्यक्ष पद पर भी भाजपा समर्थित उम्मीदवार रोशनी देवी ने शानदार जीत दर्ज कर कांग्रेस की बची-खुची उम्मीदों पर पानी फेर दिया।
लोकतंत्र और सत्ता का संतुलन
राजनीति के इस अप्रत्याशित रंग और सत्ता की लोकतांत्रिक व्यवस्था को लेकर नीतिशास्त्र में एक बेहद सटीक श्लोक कहा गया है:
न राज्यं न च राजासीन्न च दण्डो न दाण्डिकः।
धर्मेणैव प्रजा सर्वा रक्षन्ति स्म परस्परम्॥
(अर्थात: प्राचीन आदर्श व्यवस्था में न कोई राज्य था, न राजा, न दण्ड था और न कोई दण्ड देने वाला। सभी लोग धर्म और जनहित के पथ पर चलते हुए एक-दूसरे की रक्षा करते थे। मगर आज की लोकतांत्रिक संस्थाओं में व्यवस्था और जनसेवा को सुचारू रूप से चलाने के लिए नेतृत्व का यह संघर्ष अनिवार्य बन चुका है।)
विधायक का कुशल प्रबंधन या कांग्रेस का आत्मसमर्पण?
चुराग पंचायत समिति का यह चुनाव अब पूरे मंडी क्षेत्र के राजनीतिक गलियारों में ‘हॉट टॉपिक’ बन चुका है। ऐन वक्त पर बीना कपूर को पार्टी में लाकर तुरंत अध्यक्ष की कुर्सी सौंपने को भाजपा का एक बड़ा मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का साफ कहना है कि इस ऐतिहासिक उलटफेर के पीछे स्थानीय विधायक की सक्रिय भूमिका, कुशल प्रबंधन और संगठन की मजबूत चुनावी घेराबंदी रही है। भाजपा ने आखिरी पलों में सदस्यों के बीच ऐसा बेहतरीन तालमेल सेट किया कि देखते ही देखते पूरा माहौल अपने पक्ष में कर लिया।
कांग्रेस के अभेद्य किले में सेंध, आगामी विधानसभा चुनाव पर पड़ेगा सीधा असर
दूसरी तरफ, सूबे की सत्ता पर काबिज कांग्रेस पार्टी के लिए यह चुनाव परिणाम किसी तगड़े और करारे झटके से कम नहीं है। जिस नेत्री को कांग्रेस अपना सबसे मजबूत और वफादार सिपाही मान रही थी, उसी ने ऐन वक्त पर सियासी वफादारी बदल ली। इस घटनाक्रम ने कांग्रेस के स्थानीय संगठन की कमजोरी और उनकी चुनावी रणनीति की नाकामी पर गंभीर सवालिया निशान लगा दिए हैं।
राजनीतिक जानकारों की मानें तो इस बड़े सियासी उलटफेर का सीधा असर आने वाले विधानसभा चुनावों (MLA Elections) पर पड़ेगा, जहाँ भाजपा ने इस जीत के जरिए अपनी जमीन को और ज्यादा मजबूत कर लिया है।
”राजनीति से ऊपर उठकर होगा काम”
अध्यक्ष पद का ताज पहनने के बाद नवनिर्वाचित अध्यक्ष बीना कपूर ने तीखे तेवरों के बीच अपनी प्राथमिकताएं साफ कीं। उन्होंने कहा:
”चुनाव की राजनीति अब खत्म हो चुकी है। मैं दलगत राजनीति से ऊपर उठकर पूरे चुराग क्षेत्र के समान विकास के लिए काम करूंगी। सभी सम्मानित सदस्यों को एक साथ लेकर पंचायत समिति को विकास की नई बुलंदियों पर ले जाना ही मेरा एकमात्र संकल्प है।”
वहीं, नवनिर्वाचित उपाध्यक्ष रोशनी देवी ने भी क्षेत्र की जनता को आश्वस्त किया कि जनहित से जुड़े मुद्दे और रुके हुए सार्वजनिक कार्य उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता रहेंगे।
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