पंजाब दस्तक
ब्यूरो चीफ: सुरेंद्र राणा
शिमला, 4 जुलाई
शिमला। हिमाचल प्रदेश में आर्थिक चुनौतियां लगातार गंभीर होती जा रही हैं। राज्य की अनिवार्य वित्तीय जरूरतों और रोजमर्रा के प्रशासनिक खर्चों को पूरा करने के लिए सरकार एक बार फिर बाजार से ₹700 करोड़ का नया ऋण उठाने जा रही है। इस कर्ज को भारत सरकार (केंद्र सरकार) से बाकायदा मंजूरी मिल चुकी है।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के माध्यम से आगामी 7 जुलाई को इस भारी-भरकम ऋण की नीलामी की जाएगी, जिसके बाद 8 जुलाई को यह राशि राज्य सरकार के खजाने में ट्रांसफर हो जाएगी। यह कर्ज 13 वर्ष की लंबी अवधि के लिए लिया जा रहा है, जिसे सरकार को ब्याज सहित जुलाई 2039 तक चुकाना होगा।
आंकड़ों की जुबानी: हर महीने ₹2,200 करोड़ की दरकार, कर्ज का पहाड़ हुआ और ऊंचा
मासिक वित्तीय जरूरत: राज्य सरकार को हर महीने अपने कर्मचारियों के वेतन, पेंशन और अन्य बेहद जरूरी प्रशासनिक दायित्वों को पूरा करने के लिए लगभग ₹2,200 करोड़ की नगदी की आवश्यकता होती है।
₹1.08 लाख करोड़ के पार पहुंचा आंकड़ा: इस नए ₹700 करोड़ के लोन के जुड़ते ही देवभूमि हिमाचल प्रदेश पर कुल संचयी कर्ज का बोझ बढ़कर अब करीब ₹1.08 लाख करोड़ के खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है।
क्यों बढ़ रहा है दबाव?: राज्य के अपने आंतरिक राजस्व संसाधन बेहद सीमित हैं। इसके साथ ही केंद्र से मिलने वाले राजस्व घाटा अनुदान (RDG) में कटौती होने के कारण सरकार को पुरानी देनदारियां चुकाने के लिए भी बार-बार नए कर्ज का सहारा लेना पड़ रहा है।
दुग्ध उत्पादक समितियों को मार्केटिंग फीस से छूट
इसी बीच, राज्य सरकार ने दुग्ध उत्पादन से जुड़ी सहकारी समितियों के लिए भी एक प्रशासनिक निर्णय लिया है। कृषि सचिव सी. पालरासू द्वारा जारी आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार:
1 अप्रैल 2024 से लेकर 31 अक्टूबर 2025 तक की अवधि के लिए दुग्ध उत्पादक समितियों को मार्केटिंग फीस (विपणन शुल्क) से छूट प्रदान की गई है।
सरकार के इस फैसले से दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियों को कुछ राहत मिलेगी और प्रदेश के डेयरी क्षेत्र को जमीनी स्तर पर आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।
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