ब्यूरो चीफ पंजाब दस्तक, सुरेंद्र राणा
शिमला / नई दिल्ली
हिमाचल की सत्ता के गलियारों में छिड़ा घमासान अब दिल्ली के सियासी अखाड़े में तब्दील हो चुका है। सुक्खू सरकार में कैबिनेट विस्तार और मलाईदार विभागों के बंटवारे को लेकर मची खींचतान चरम पर पहुंच गई है। राजधानी दिल्ली में दो दिनों तक चले ताबड़तोड़ मंथन के बाद मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू तो शिमला लौट आए, लेकिन अपनी सियासी जमीन और कुर्सी बचाने की जुगत में पांच कैबिनेट मंत्री अब भी दिल्ली दरबार में डेरा डाले हुए हैं।
परफॉर्मेंस की कसौटी: राहुल गांधी की दो-टूक हिदायत
पार्टी के शीर्ष रणनीतिकारों ने साफ कर दिया है कि सत्ता की मलाई बांटने से पहले काम का हिसाब देना होगा। राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री को 30 सितंबर तक सभी मंत्रियों का निष्पक्ष और जमीनी रिपोर्ट कार्ड पेश करने का फरमान जारी किया है। क्षेत्रीय संतुलन, जातीय समीकरण और जनता के बीच मंत्रियों की साख—इन तीनों पैमानों पर जो खरा उतरेगा, वही टिकेगा। आलाकमान किसी भी गुटीय दबाव में आकर जल्दबाजी में कोई फैसला लेने के मूड में कतई नहीं है।
अंदरूनी कलह पर सुधीर शर्मा का वार: सलामी एमएलए की, मंत्री हाशिए पर!
दिल्ली में जुटी ‘आधी सरकार’ की इस बेचैनी पर धर्मशाला से भाजपा विधायक सुधीर शर्मा ने गहरा सियासी तंज कसा है। उन्होंने सोशल मीडिया पर कांग्रेस के इस घमासान को दिल्ली में चल रहा ‘सुंदरकांड’ करार दिया।
सियासी पंडित इस तंज के पीछे छिपे गहरे दर्द और हकीकत को बखूबी समझ रहे हैं। प्रदेश में सत्ता का संतुलन इस कदर गड़बड़ाया रहा कि स्वतंत्रता दिवस जैसे बड़े राष्ट्रीय पर्व पर जिन मंत्रियों को सलामी लेनी चाहिए थी, उन्हें दरकिनार कर दिया गया और चहेते विधायकों से 15 अगस्त की आधिकारिक सलामी दिलवा दी गई। जो मंत्री अपने ही सूबे में हाशिए पर धकेल दिए गए थे, आज वही अपनी ताकत और रुतबे को बचाने के लिए दिल्ली में लॉबिंग करने को मजबूर हैं।
30 सितंबर की मियाद ने वजीरों से लेकर दावेदार विधायकों तक की नींद उड़ा रखी है। देखना यह दिलचस्प होगा कि इस सियासी अग्निपरीक्षा में किसकी कुर्सी बचती है और किसका पत्ता साफ होता है।
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