उमांशी राणा, वरिष्ठ पत्रकार, हमीरपुर (पंजाब दस्तक ब्यूरो)
हमीरपुर के कद्दावर सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि विधायी कार्यशैली और संसदीय दक्षता में उनका कोई सानी नहीं है। अनुराग ठाकुर की अध्यक्षता वाली ‘कोयला, खान एवं इस्पात संबंधी संसदीय स्थायी समिति’ को वर्ष 2026 के प्रतिष्ठित ‘संसद रत्न पुरस्कार’ से नवाजा गया है। नई दिल्ली के डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित 16वें संसद रत्न समारोह में उत्कृष्ट रिपोर्ट प्रस्तुति और असाधारण विधायी निगरानी के लिए समिति को यह राष्ट्रीय गौरव मिला।
कामकाज की धमक: 64 बैठकें और 29 नीतिगत रिपोर्टों का रिकॉर्ड
अनुराग ठाकुर की कार्यशैली हमेशा से परिणाम देने वाली रही है। जून 2024 से अब तक समिति ने 64 गहन बैठकें आयोजित कर संसद के पटल पर 29 व्यापक रिपोर्टें पेश की हैं। देश की ऊर्जा सुरक्षा, खनिज नीति, औद्योगिक आत्मनिर्भरता और विकसित भारत के रोडमैप पर समिति की रिपोर्टों ने केंद्र सरकार की नीतियों को धार दी है। इसके अलावा ‘वन नेशन-वन इलेक्शन’ और 130वें संविधान संशोधन जैसी संवेदनशील और हाई-प्रोफाइल संयुक्त संसदीय समितियों (JPC) में भी अनुराग ठाकुर रीढ़ की हड्डी बनकर काम कर रहे हैं।
क्रिकेट के मैदान से संसद तक… हर पिच पर खरा उतरा यह सियासी सितारा
चाहे भारतीय क्रिकेट प्रशासन को वैश्विक पटल पर नए मुकाम पर पहुंचाना हो या संसद के भीतर जनहित की जोरदार वकालत, अनुराग ठाकुर ने हर क्षेत्र में अपना लोहा मनवाया है। 2011 में ‘सर्वश्रेष्ठ युवा सांसद’, 2014 में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम द्वारा ‘यंग ग्लोबल लीडर’, 2019 में व्यक्तिगत ‘संसद रत्न’ और ‘चैंपियन ऑफ चेंज’ के बाद अब स्थायी समिति को मिला यह सम्मान उनके गौरवशाली सफर की एक और बानगी है।
इस ऐतिहासिक उपलब्धि को अपनी टीम और संसदीय क्षेत्र की जनता को समर्पित करते हुए अनुराग ठाकुर ने कहा कि यह सम्मान हमीरपुर के बुजुर्गों, महिलाओं और युवाओं के अटूट आशीर्वाद व विश्वास का फल है।
धूमल की राजनीतिक विरासत और सियासी गलियारों में सुगबुगाहट: अगला पड़ाव क्या?
राजनीतिक विश्लेषक इस पुरस्कार को केवल संसदीय उपलब्धि के तौर पर नहीं, बल्कि आने वाले बड़े सियासी बदलाव के संकेत के रूप में देख रहे हैं। हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री प्रोफेसर प्रेम कुमार धूमल के जन-सरोकारों, बेदाग छवि और जमीनी विकास की मजबूत विरासत को अनुराग ठाकुर ने बेहद परिपक्वता के साथ आगे बढ़ाया है।
आज पूरे देश और प्रदेश के सियासी हलकों में यह सवाल गर्म है कि क्या अनुराग ठाकुर हिमाचल प्रदेश की सियासत में नए युग की शुरुआत करते हुए राज्य का नेतृत्व संभालेंगे, या फिर केंद्र की राजनीति में उन्हें कोई बहुत बड़ा राष्ट्रीय दायित्व मिलने जा रहा है? जिस तरह अनुराग ठाकुर केंद्र और संगठन की कसौटियों पर लगातार अव्वल साबित हो रहे हैं, उससे साफ है कि सियासी शतरंज पर उनका कद अब और भी ज्यादा विराट हो चुका है।
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