ब्यूरो चीफ: सुरेंद्र राणा, पंजाब दस्तक
नई दिल्ली / शिमला:
हिमाचल प्रदेश के सतत विकास, जनहित की योजनाओं और आर्थिक स्थायित्व को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने नई दिल्ली में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से एक अत्यंत सौहार्दपूर्ण एवं उच्चस्तरीय शिष्टाचार भेंट की। इस महत्वपूर्ण बैठक में मुख्यमंत्री के साथ प्रदेश के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों का उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी मौजूद रहा, जिसमें मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना, वित्त सचिव देवेश कुमार और मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार सहित वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों की पूरी टीम शामिल रही।
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री और प्रशासनिक टीम ने पहाड़ी राज्य की विशिष्ट भौगोलिक चुनौतियों और वित्तीय प्राथमिकताओं को बड़े ही सधे, तार्किक और गरिमापूर्ण ढंग से केंद्र सरकार के समक्ष प्रस्तुत किया।
राजस्व घाटा अनुदान और 8,000 करोड़ के वित्तीय अंतर पर विस्तृत चर्चा
मुख्यमंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों ने राज्य की वित्तीय स्थिति का यथार्थवादी खाका पेश करते हुए अवगत कराया कि राजस्व घाटा अनुदान (Revenue Deficit Grant) में आने वाले बदलावों के कारण राज्य के समक्ष लगभग 8,000 करोड़ रुपये का वार्षिक वित्तीय अंतर उत्पन्न हो रहा है। उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि राज्य के नियमित वित्तीय प्रवाह और लोक-कल्याणकारी कार्यों को निर्बाध रखने के लिए इस अंतर की भरपाई हेतु अतिरिक्त वित्तीय सहायता प्रदान करने पर विचार किया जाए।
उधार सीमा को 3% से बढ़ाकर 4% करने का विनम्र अनुरोध
प्रदेश में बुनियादी ढांचे के विस्तार और प्रगतिशील परियोजनाओं को गति देने के लिए मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार से राज्य की निवल उधार सीमा (Borrowing Limit) को सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) के 3 प्रतिशत से बढ़ाकर 4 प्रतिशत करने का आग्रह किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस एक प्रतिशत की अतिरिक्त वित्तीय सहूलियत से राज्य सरकार को शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और ग्रामीण विकास जैसे आधारभूत क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने में व्यापक मदद मिलेगी।
बाह्य सहायता प्राप्त परियोजनाओं का संवर्धन और प्रक्रियात्मक सरलीकरण
बैठक में राज्य में चल रही बाह्य सहायता प्राप्त परियोजनाओं (Externally Aided Projects) की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए इनके केंद्रीय आवंटन को बढ़ाने तथा उपलब्ध सहायता को दोगुना करने का अनुरोध किया गया। इसके अतिरिक्त, आपूर्ति और वेंडर भुगतानों को समयबद्ध और सुगम बनाए रखने के उद्देश्य से एससीआई के अंतर्गत प्रक्रियाओं को एसएनए ‘स्पर्श’ (SPARSH) मॉडल से आवश्यक छूट प्रदान करने का भी व्यावहारिक सुझाव दिया।
कठिन भौगोलिक परिस्थिति और आपदाओं की वास्तविक चुनौतियां
संवाद के दौरान यह बात प्रमुखता से रखी गई कि हिमाचल प्रदेश एक संवेदनशील और पहाड़ी राज्य है। कठिन स्थलाकृति, मौसम की अनिश्चितता और समय-समय पर आने वाली प्राकृतिक आपदाओं के कारण यहां विकास एवं पुनर्निर्माण कार्यों की लागत मैदानी क्षेत्रों की तुलना में स्वाभाविक रूप से काफी अधिक होती है। ऐसे में केंद्र और राज्य का परस्पर समन्वय ही प्रदेश के विकास की गति को निरंतर बनाए रख सकता है।
केंद्रीय वित्त मंत्री ने दिया सकारात्मक और सहानुभूतिपूर्वक विचार का आश्वासन
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और मुख्य सचिव सहित उच्चाधिकारियों द्वारा उठाए गए सभी बिंदुओं को अत्यंत गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ सुना। उन्होंने पहाड़ी राज्य की विशिष्ट आवश्यकताओं और विकास प्राथमिकताओं की सराहना करते हुए आश्वस्त किया कि केंद्र सरकार इन सभी मांगों और सुझावों पर सहानुभूतिपूर्वक व सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ विचार करेगी।
जनता की राय:
पहाड़ी राज्य की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और विकास आवश्यकताओं को देखते हुए क्या केंद्र सरकार द्वारा हिमाचल की उधार सीमा 3% से बढ़ाकर 4% की जानी चाहिए?
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