हिमाचल के सरकारी स्कूलों में बच्चों को अंडा और मौसमी फल

​सरकारी स्कूलों में नौनिहालों के पोषण पर बड़ा फैसला: अब हफ्ते में दो दिन परोसा जाएगा अंडा और मौसमी फल, सुक्खू सरकार की मंजूरी

Spread the love

पंजाब दस्तक
​शिमला न्यूज़ रूम से वरिष्ठ पत्रकार काजल


शिमला। हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले प्राथमिक और उच्च प्राथमिक कक्षाओं के विद्यार्थियों के स्वास्थ्य और पोषण स्तर को सुधारने के लिए राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। प्रदेश सरकार ने ‘मुख्यमंत्री बाल पौष्टिक आहार योजना’ में संशोधन को औपचारिक मंजूरी दे दी है। इस फैसले के तहत अब नर्सरी से लेकर आठवीं कक्षा तक के छात्रों को मिड-डे मील के साथ सप्ताह में दो दिन अतिरिक्त पौष्टिक खुराक उपलब्ध कराई जाएगी।
​अब तक यह पौष्टिक आहार सप्ताह में केवल एक दिन दिया जाता था, जिसे अब बढ़ाकर प्रत्येक बुधवार और शुक्रवार कर दिया गया है।


​मेनू में जबरन कुछ नहीं, छात्र और अभिभावक चुनेंगे अपनी पसंद
सरकार के नए दिशा-निर्देशों के अनुसार भोजन में किसी एक वस्तु की अनिवार्यता नहीं थोपी जाएगी। विद्यार्थी और उनके अभिभावक अपनी पसंद के आधार पर चयन कर सकेंगे कि उन्हें उबला हुआ अंडा लेना है या फिर सेब व केला जैसे ताजे मौसमी फल। बाल स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि प्रारंभिक कक्षाओं में नियमित प्रोटीन और विटामिन मिलने से बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ेगी और कक्षा में उनकी एकाग्रता व उपस्थिति में भी सुधार होगा।


​स्थानीय महिला मंडलों और एसएमसी को खरीद का जिम्मा
योजना के क्रियान्वयन में पूरी पारदर्शिता बनाए रखने के लिए बिचौलियों की भूमिका समाप्त कर दी गई है। खाद्य सामग्री की खरीद का दायित्व स्कूल प्रबंधन समितियों (एसएमसी), महिला मंडलों और स्थानीय स्वयं सहायता समूहों को सौंपा गया है। फल और अंडे स्थानीय बाजारों से ही खरीदे जाएंगे, जिससे ताजी सामग्री की उपलब्धता के साथ-साथ ग्रामीण व्यापारियों को भी आर्थिक लाभ मिलेगा।


​सीधे ब्लॉक स्तर से जारी होगा बजट
छात्रों के दाखिले के आधार पर ब्लॉक प्रारंभिक शिक्षा अधिकारियों (बीईईओ) द्वारा प्रत्येक तिमाही में स्कूलों को सीधा बजट जारी किया जाएगा। स्कूलों को हर महीने और तिमाही पर खर्च का पूरा लेखा-जोखा विभाग को सौंपना होगा। साथ ही भोजन पकाने और वितरण के दौरान भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) के स्वच्छता नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।


​शिक्षा और पोषण व्यवस्था: टीचरपुरी और फांद्या क्षेत्र पर विशेष नज़र
शिमला। शिक्षा के बुनियादी ढांचे और पोषण स्तर को लेकर टीचरपुरी पंचायत और फांद्या जैसे ग्रामीण क्षेत्रों में भी विभागीय स्तर पर निगरानी तेज कर दी गई है। वर्ष 2003 से 2012 के बीच के शैक्षणिक और पोषण संबंधी अध्ययनों से यह बात स्पष्ट हुई है कि प्राथमिक स्तर पर बेहतर खान-पान और नियमित देखरेख से बच्चों के ड्रॉपआउट दर में कमी आती है। इसी को ध्यान में रखते हुए पंचायत प्रतिनिधियों और स्कूल प्रभारियों के बीच सीधा समन्वय स्थापित किया जा रहा है ताकि सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे बच्चों की थाली तक पहुंचे।


​सुखाश्रय योजना से संवरी तकदीर: 2 लाख की मदद से ऊना के करनदीप ने खोला सैलून, हर महीने 35 हजार की कमाई
ऊना। प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री सुखाश्रय योजना बेसहारा युवाओं के लिए स्वावलंबन का बड़ा जरिया साबित हो रही है। जिला ऊना के रहने वाले करनदीप ने इस योजना का लाभ उठाकर अपने पैरों पर खड़े होने की मिसाल पेश की है।
​योजना के तहत मिली दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता से करनदीप ने ‘रॉयल लुक सैलून’ की शुरुआत की। अपनी कड़ी मेहनत और हुनर के दम पर वे आज हर महीने 30 से 35 हजार रुपये की सम्मानजनक आय अर्जित कर रहे हैं। बिना किसी पारिवारिक सहारे के जीवन यापन कर रहे युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने में यह योजना बेहद कारगर सिद्ध हो रही है।


​(ऐसी ही निष्पक्ष, तथ्यपरक और जनसरोकार से जुड़ी खबरों के लिए ‘पंजाब दस्तक’ को फॉलो करें और शेयर करें।)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *