हिमाचल पेंशनर संगठनों की बिलासपुर महाबैठक को लेकर तैयारी

पेंशनरों के नाम पर सियासत चमकाने वाले स्वयंभू नेता आत्माराम की खुली पोल, रिज पर भड़के बुजुर्ग बोले— शीशे के सामने खड़े होकर पूछें सच, अब हम सबने परमात्मा के घर जाना है

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​शिमला (सुरेंद्र राणा, ब्यूरो चीफ, पंजाब दस्तक):
हिमाचल प्रदेश में पेंशनरों के हक, हितों और लंबे संघर्ष की आड़ में अपनी निजी राजनीतिक रोटियां सेकने वाले तथाकथित नेताओं की हकीकत अब पूरी तरह बेनकाब हो चुकी है। हिमाचल प्रदेश पेंशनर संयुक्त संघर्ष समिति ने तथाकथित जॉइंट फ्रंट के स्वयंभू नेता आत्माराम के दावों की धज्जियां उड़ाते हुए कुछ समाचार पत्रों में छपी भ्रामक व मनगढ़ंत खबरों का पुरजोर खंडन किया है।


​संघर्ष समिति के प्रदेश अध्यक्ष सुरेश ठाकुर और महासचिव भूपराम वर्मा ने संयुक्त रूप से कड़ा बयान जारी कर आत्माराम पर सीधा तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि 72 से 75 साल की इस उम्र में जब हम सबने उस बड़े दरबार यानी परमात्मा के घर जाकर अपने कर्मों का हिसाब देना है, तब भी यह व्यक्ति सफेद झूठ बोलने और अखबारों में वाहवाही लूटने से बाज नहीं आ रहा। समिति नेताओं ने दो टूक नसीहत देते हुए कहा कि हम सब उस उम्र के पड़ाव पर हैं जहां अब ऐसी ओछी बातें और झूठ बोलना किसी को भी शोभा नहीं देता। जो इंसान अपने आप में ही नेता बना फिरता है, उसको तो ऐसी बातें बोलते हुए शर्म आनी चाहिए। वह कभी रात के अंधेरे में शीशे के सामने खड़ा होकर अपनी अंतरात्मा से पूछे कि क्या वह सच बोल रहा है? खुद से पूछे कि क्या वास्तव में प्रदेश का एक भी सच्चा पेंशनर उसके साथ खड़ा है या नहीं?


​स्कैंडल पॉइंट पर वरिष्ठ पेंशनरों का फूटा आक्रोश, दी खरी-खरी नसीहत
पंजाब दस्तक की टीम ने जब राजधानी के ऐतिहासिक रिज मैदान और स्कैंडल पॉइंट पर बैठे वरिष्ठ पेंशनरों की नब्ज टटोली, तो पेंशनरों का गुस्सा सातवें आसमान पर था। वहां प्रदेश सचिवालय, उच्च शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग से सेवानिवृत्त हुए कई बुजुर्ग मौजूद थे। मुख्यमंत्री से मिलने और मांगे उठाने के तथाकथित ड्रामे का जिक्र होते ही बुजुर्गों ने तीखे लहजे में कहा— “आत्माराम जी, कभी अकेले में शीशे के सामने खड़े होकर खुद से पूछें कि आपके पीछे कितने पेंशनर हैं? हम सब उस उम्र में पहुंच चुके हैं जहां अब हम सबने परमात्मा के घर जाना है, इस उम्र में ये पैंतरेबाजियां शोभा नहीं देतीं। झूठ बोलने और पेंशनरों की पीठ में छुरा घोंपने पर कम से कम अब तो शर्म आनी चाहिए।”


​बुजुर्ग पेंशनरों ने खरी-खरी सुनाते हुए कहा कि इस तथाकथित नेता की फितरत बन चुकी है कि जहां मुख्यमंत्री का दौरा हो, वहां जबरन आगे घुसकर फोटो खिंचवा ली जाए। सरकार भी चाहती है कि पेंशनर वर्ग में दो-फाड़ दिखे ताकि वास्तविक मांगों को ठंडे बस्ते में डाला जा सके, और आत्माराम इसी साजिश का मोहरा बने हुए हैं। पेंशनरों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि इस व्यक्ति का नाम लेने में भी संकोच होता है, क्योंकि ‘आत्मा’ तो परमात्मा का रूप है लेकिन इनके कर्म पेंशनरों के अधिकारों का सौदा करने वाले हैं।


​सेंट्रल पेंशनर्स और रिश्तेदारों की 10-12 लोगों की टोली, जमीन पर हिमाचल का कोई पेंशनर साथ नहीं
बुजुर्ग पेंशनरों ने पोल खोलते हुए बताया कि आत्माराम के साथ जो 10-12 लोग दिखते हैं, वे असल में हिमाचल प्रदेश के पेंशनर हैं ही नहीं। उनमें से ज्यादातर केंद्र सरकार (सेंट्रल एम्प्लॉइज) के रिटायर्ड पेंशनर हैं, या फिर उनके अपने कोई रिश्तेदार और बेहद करीबी हैं। सचिवालय से भी बमुश्किल दो-तीन लोग ही इनके साथ जुड़ते हैं। ये 4-5 लोग सिर्फ इनकी ‘वाह-वाह’ करते रहते हैं और हकीकत में इन्हें ही मूर्ख बना रहे हैं।
​बुजुर्गों ने खरी नसीहत देते हुए कहा कि इस स्वयंभू नेता को कम से कम एक-दो साल शांति से बैठना चाहिए और संयुक्त संघर्ष समिति को काम करने का मौका देना चाहिए। अगर वे काम न कर पाएं, तब सवाल उठाने का हक बनता है, लेकिन इस तरह बीच में टांग अड़ाकर पेंशनरों के आंदोलन को कमजोर करना किसी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। चौड़ा मैदान से लेकर धर्मशाला विधानसभा तक आयोजित विशाल रैलियों में मुख्यमंत्री, पूरे मंत्रिमंडल और शासन-प्रशासन ने साफ देख लिया था कि असली जनसैलाब और पेंशनरों की असली ताकत किसके साथ है।


​शुद्धिपत्र Fin (Pen) A(3)-1/2021-Part-II पर गुमराह करने की साजिश
तथाकथित नेता ने अखबारों में यह झूठा और भ्रामक प्रचार करवाया कि उन्होंने 18 अगस्त 2026 को जारी शुद्धिपत्र संख्या Fin (Pen) A(3)-1/2021-Part-II का मुद्दा मुख्यमंत्री के समक्ष उठाया, जिसके तहत तृतीय श्रेणी के पेंशनरों को 35 प्रतिशत लाभ के लिए तय की गई 40,000 रुपये की बेसिक पेंशन की सीमा को हटाने की मांग रखी गई और यह दावा ठोक दिया कि सरकार ने इसे तुरंत निस्तारित कर दिया।
​संघर्ष समिति और वरिष्ठ पेंशनरों ने स्पष्ट किया कि इन स्वयंभू नेताओं को न तो वित्त विभाग के नियमों की समझ है और न ही अधिसूचनाओं की तकनीकी बारीकियों का ज्ञान। केवल अखबारों में झूठी सुर्खियां बटोरकर पेंशनरों की आंखों में धूल झोंकने का यह तमाशा अब चलने वाला नहीं है।


​18 सितंबर 2026 को बिलासपुर में पेंशनर के 18 बड़े संगठनों की महाबैठक, सरकार के खिलाफ आर-पार की रणनीति होगी तय
महासचिव भूपराम वर्मा ने आगे बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि संयुक्त संघर्ष समिति आगामी 18 सितंबर 2026 को बिलासपुर में प्रदेश भर के पेंशनरों के 18 बड़े संगठनों की एक विशेष और निर्णायक बैठक करने जा रही है। इस ऐतिहासिक महाबैठक में पेंशनरों की लंबित मांगों को लेकर सुक्खू सरकार के खिलाफ आर-पार का मोर्चा खोलने के लिए ठोस रणनीति तैयार की जाएगी। वर्मा ने दो टूक शब्दों में कहा कि असली संघर्ष बिलासपुर में 18 संगठनों की एकजुटता से दिखेगा, न कि सेंट्रल पेंशनरों और रिश्तेदारों को साथ लेकर सीएम के आगे फोटो खिंचवाने वाले स्वयंभू नेताओं के खोखले बयानों से।
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