पंजाब दस्तक विशेष रिपोर्ट: सुरेंद्र राणा, ब्यूरो चीफ
शिमला/चंडीगढ़: प्रदेश में सत्ता संभालने से पहले कांग्रेस पार्टी और उसके शीर्ष नेतृत्व ने प्रदेश की जनता से लोक-लुभावन वादे किए थे। चुनावी रैलियों और मंचों से मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री और कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने पूरे दमखम से ऐलान किया था कि सरकार बनते ही हर वर्ष 1 लाख पक्की नौकरियां दी जाएंगी और 5 सालों में 5 लाख युवाओं को पक्का रोजगार मिलेगा। मगर आज जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट नजर आ रही है। सरकार ने ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) तो लागू कर दी, लेकिन नियमित सरकारी नौकरियों को जैसे पूरी तरह गायब ही कर दिया गया है।
सचिवालय से लेकर फील्ड के दफ्तरों, विश्वविद्यालयों और बोर्ड-निगमों तक हजारों कुर्सियां खाली पड़ी हैं और प्रदेश का पढ़ा-लिखा बेरोजगार युवा सवाल पूछ रहा है कि चुनावी रैलियों में किए गए वे पक्के रोजगार के वादे आखिर कहां गुम हो गए?
सरकारी विभागों में रिक्त पदों की स्थिति बेहद चिंताजनक है। जिस राज्य सचिवालय से पूरी सरकार चलती है, उसी सचिवालय प्रशासन में 1,863 स्वीकृत पदों में से 1,158 पद ही भरे हैं जबकि 705 पद खाली पड़े हैं। इसके अलावा विभिन्न विभागों, बोर्डों और विश्वविद्यालयों में रिक्तियों का आंकड़ा चीख-चीख कर व्यवस्था की बदहाली बयान कर रहा है:
शिक्षा विभाग: लगभग 30,000 पद रिक्त पड़े हैं, जिससे स्कूलों और कॉलेजों में शैक्षणिक ढांचा पूरी तरह चरमरा गया है।
लोक निर्माण विभाग (PWD): 20,000 से अधिक पद खाली हैं, जिससे सड़कों और बुनियादी ढांचे का काम ठप पड़ा है।
राजस्व (रेवेन्यू) विभाग: कुल 10,737 स्वीकृत पदों में से 7,325 भरे हैं और 3,412 पद खाली चल रहे हैं।
तकनीकी शिक्षा विभाग: 5,125 स्वीकृत पदों में से 2,619 भरे हैं और 2,506 पद रिक्त हैं।
वन विभाग: 7,985 स्वीकृत पदों में से 5,668 भरे हैं, जबकि 2,217 पद खाली पड़े हैं।
ग्रामीण विकास विभाग: 2,895 स्वीकृत पदों में से मात्र 1,151 पद भरे हैं और 1,744 पद खाली हैं।
पंचायती राज (जिला परिषद काडर): 9,821 स्वीकृत पदों में से 8,352 भरे हैं, जबकि 1,469 पद रिक्त हैं।
उद्यान (हॉर्टिकल्चर) विभाग: 2,442 स्वीकृत पदों में से 1,244 भरे हैं और 1,198 पद खाली पड़े हैं।
सचिवालय प्रशासन: नाक के नीचे 1,863 स्वीकृत पदों में से 705 पद खाली हैं।
विश्वविद्यालय, परिवहन, बोर्ड व निगम: प्रदेश के विश्वविद्यालयों, परिवहन विभाग (HRTC) और विभिन्न बोर्डों-निगमों में भी हजारों पद खाली पड़े हैं।
अन्य विभाग: जल शक्ति (IPH), स्वास्थ्य, पुलिस और कृषि जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण विभागों में भी भारी संख्या में पद खाली पड़े हैं, जिससे जनसेवाएं प्रभावित हो रही हैं।
प्रदेश में बेरोजगारी का आलम यह है कि नियमित पक्की भर्तियां निकालने के बजाय विभागों में नए-नए नामों का सहारा लेकर युवाओं को छला जा रहा है। वन विभाग हो या स्वास्थ्य विभाग, अलग-अलग फैंसी नाम देकर अस्थाई पदों पर महज 10 से 15 हजार रुपये के मानदेय पर युवाओं को धकेला जा रहा है। सवाल यह उठ रहा है कि जिस पद पर पहले कर्मचारी 50 से 60 हजार रुपये का नियमित वेतन पाता था, क्या आने वाले समय में प्लान और नॉन-प्लान बजट के फेर में उन पक्के पदों को धीरे-धीरे खत्म कर केवल 10-15 हजार की सस्ती मजदूरी में बदल दिया जाएगा? चाहे कांग्रेस की सरकार हो या भाजपा की, क्या नीतियां सिर्फ पदों को खत्म करने के लिए ही बनेंगी?
एक तरफ जहां हजारों पद खाली हैं, वहीं दूसरी ओर तथाकथित ‘व्यवस्था परिवर्तन’ की पोल सरकारी महकमों में बैठे रिटायर्ड कर्मचारियों की मनमानी खोल रही है। नेशनल हेल्थ मिशन (NHM), स्वास्थ्य विभाग और जल शक्ति (IPH) जैसे विभागों में सेवानिवृत्त कर्मचारी आज भी अपनी कुर्सियां छोड़ने को तैयार नहीं हैं। कई ऐसे कर्मचारी हैं जिन्हें रिटायर हुए 5 से 6 वर्ष बीत चुके हैं, फिर भी वे कुंडली मारकर बैठे हैं। इनमें से कई पूर्व सैनिक फौज की पेंशन भी ले रहे हैं, सचिवालय से सेवानिवृत्ति का लाभ भी ले चुके हैं और अब NHM व अन्य विभागों में मैनेजर या अन्य अहम पदों पर काबिज होकर 70 से 75 हजार रुपये तक का मोटा वेतन उठा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग में सुपरिंटेंडेंट ग्रेड-2 के पद से रिटायर हुए लोग भी अफसरों की चापलूसी के दम पर मलाईदार प्रोजेक्टों में जमे हुए हैं।
विडंबना देखिए कि जब विधायकों और सांसदों के वेतन-भत्ते या सुविधाएं बढ़ाने की बात आती है, तो सत्ता पक्ष और विपक्ष यानी कांग्रेस और भाजपा दोनों एक सुर में खड़े हो जाते हैं। माननीय विधायकों को पहचान के लिए गाड़ियों पर तुरंत झंडियां मुहैया करा दी जाती हैं ताकि उनकी गाड़ियां बिना रुकावट तेजी से निकल सकें। लेकिन जब गरीब जनता और बेरोजगार युवाओं के हक की बात आती है, तो बजट और नियमों का रोना रोया जाता है।
आज गांवों और कस्बों में एमए, पीजी डिप्लोमा और उच्च तकनीकी डिग्रियां लेकर नौजवान खाली हाथ घर बैठने को मजबूर हैं। कॉरपोरेट सेक्टर में पहले से मंदी है, सरकारी भर्तियां निकल नहीं रहीं, गरीब परिवारों के घरों में चूल्हा जलना दूभर हो गया है और बेरोजगारी के चलते युवाओं की शादियों की उम्र निकलती जा रही है। युवा अब पूछ रहे हैं कि वे अपनी फरियाद लेकर आखिर किसके पास जाएं? जो रिटायर्ड अधिकारी कुंडली मारकर दोहरा लाभ ले रहे हैं, उन्हें घर भेजकर युवाओं को नियमित रोजगार कब मिलेगा?
इस ज्वलंत मुद्दे पर आपकी क्या राय है? अपनी प्रतिक्रिया और विचार कमेंट बॉक्स में जरूर साझा करें। हमें आपके बहुमूल्य कमेंट्स का इंतजार रहेगा।
पंजाब दस्तक — सच की आवाज़, जनता के पास। निष्पक्ष और निर्भीक पत्रकारिता के लिए देखते रहें पंजाब दस्तक।

