’कोई आंदोलन नहीं, दलीय राजनीति से परे सम्मानजनक संवाद’—18 कमेटियों और बुजुर्ग पेंशनरों की आत्माराम जी से सहृदय प्रार्थना: ‘बार-बार मीडिया में न जाएँ, सुबह उठकर स्वयं से पूछें अपना जनाधार; 2 साल सुरेश ठाकुर को मौका दें, एकजुटता से ही झुकेंगी सरकारें’
पंजाब दस्तक डेस्क
हिमाचल प्रदेश में पेंशनरों के हकों को लेकर स्थिति पूरी तरह से स्पष्ट, सुचारू और अनुशासित है। प्रदेश का पेंशनर समाज किसी टकराव या आंदोलन की राह पर नहीं है, बल्कि चरणबद्ध और सम्मानजनक तरीके से सरकार के समक्ष अपनी बातें रख रहा है। हाल ही में माननीय मुख्यमंत्री जी द्वारा मेडिकल बिलों के भुगतान को लेकर दी गई बड़ी राहत और एचआरटीसी (HRTC) पेंशनरों के लिए 9 तारीख से पहले-पहले पेंशन भुगतान की विशेष व्यवस्था करने व समय पर पेंशन मिलने की गारंटी पर पूरे प्रदेश के पेंशनरों और सुरेश ठाकुर के नेतृत्व वाली ‘जॉइंट एक्शन कमेटी’ ने मुख्यमंत्री जी का खुले दिल से धन्यवाद व्यक्त किया है।
आज स्थिति यह है कि चंबा, लाहौल-स्पीति, ऊना, कुल्लू, हमीरपुर, बिलासपुर, मंडी, सोलन, सिरमौर से लेकर शिमला तक—HRTC, फॉरेस्ट कॉर्पोरेशन, अर्बन लोकल बॉडीज़ समेत सभी 18 कमेटियाँ और हर विभाग का पेंशनर सुरेश ठाकुर के साथ पूरी मजबूती से खड़ा है।
महासचिव भूपराम जी और कार्यकारिणी ने स्पष्ट कर दिया है कि संगठन किसी भी राजनीतिक दल से नहीं बंधा है। पेंशनरों के लिए कांग्रेस और भाजपा दोनों एक समान हैं। जहाँ सरकार राहत देती है, वहाँ खुले दिल से मुख्यमंत्री जी का आभार जताया जाता है और जहाँ हक की बात होती है, वहाँ मर्यादा में रहकर अपनी माँग रखी जाती है।
ब्लॉक-ब्लॉक में हुजूम, 8 तारीख को नूरपुर में महासम्मेलन: कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं पेंशनर
सुरेश ठाकुर और उनकी पूरी कार्यकारिणी कमेटी हर जिले और ब्लॉक लेवल पर जा रही है। चाहे शिमला का मशोबरा, ठियोग हो या ऊना और चंबा का कोई भी ब्लॉक—हर जगह गेट मीटिंग्स, प्रेस कॉन्फ्रेंस और सम्मेलनों के जरिए पेंशनरों से सीधा संवाद स्थापित कर उनकी मांगों को इकट्ठा किया जा रहा है।
ऊना में विशाल जुटान: हाल ही में ऊना में आयोजित बैठक में लगभग ढाई-तीन सौ पेंशनरों ने भाग लिया, जहाँ पूरी जॉइंट एक्शन कमेटी मौजूद रही।
नूरपुर महासम्मेलन और 31 जुलाई की समय-सीमा: अब 8 तारीख को नूरपुर में बड़ा महासम्मेलन होने जा रहा है। पेंशनरों की एकजुटता के साथ यह मांग प्रमुखता से उठाई जा रही है कि 31 जुलाई से पहले-पहले डीए (DA) की बकाया किश्तें और 2016 से 2022 का नया वेतनमान एरियर जारी किया जाए।
अटूट विश्वास: महासचिव भूपराम जी, पूरी कार्यकारिणी और प्रदेश की सभी कॉर्पोरेशन के पेंशनर सुरेश ठाकुर के नेतृत्व पर पूरा विश्वास जता रहे हैं और कंधे से कंधा मिलाकर उनके साथ खड़े हैं।
अब मुख्य लक्ष्य: 2016 से 2022 का बकाया एरियर और डीए की किश्तें
मेडिकल बिलों और एचआरटीसी पेंशनरों को समयबद्ध पेंशन की राहत मिलने के बाद अब प्रदेश के लाखों बुजुर्ग पेंशनरों की निगाहें दो प्रमुख मांगों पर टिकी हैं:
2016 से 2022 तक के नए वेतनमान का भारी एरियर: जीवन के 65 से 75 वर्ष और उससे अधिक उम्र के पड़ाव पर खड़े बुजुर्ग पेंशनरों के लिए यह बकाया एरियर उनका जायज हक है, जिसे पाना उनका मुख्य ध्येय है।
लंबित डीए (DA) की किश्तें: समय पर महंगाई भत्ते की बकाया किश्तों का भुगतान पेंशनरों को आर्थिक संबल देगा।
सुरेश ठाकुर जी के नेतृत्व में जॉइंट एक्शन कमेटी इसी सकारात्मक माहौल में सरकार के साथ निरंतर संवाद बनाकर इन बकायों के समाधान के लिए प्रयासरत है।
आत्माराम जी से वयोवृद्ध पेंशनरों की अपील: ‘बार-बार मीडिया में न जाएँ, सुबह उठकर स्वयं से पूछें अपना जनाधार’
प्रदेश के 75 पार कर चुके बुजुर्ग पेंशनरों ने आत्माराम जी से किसी प्रकार के विरोध के बिना, एक परिवार के वरिष्ठ सदस्य के नाते बहुत ही भावुक और सीधी प्रार्थना की है:
वयोवृद्ध पेंशनरों का आत्माराम जी को खुला संदेश:
“आत्माराम जी, आप भी हमारे पेंशनर भाई हैं और हमारे परिवार का हिस्सा हैं। जब आप प्रधान थे, तब आपने पेंशनरों के लिए बहुत बेहतरीन काम करवाए हैं—इस बात में कोई शक नहीं है और पूरा पेंशनर समाज आपके योगदान को मानता है।
लेकिन आज स्थिति बदल चुकी है। आत्माराम जी को हमारी सलाह है कि वे बार-बार मीडिया के सामने न जाएँ। क्योंकि जब कभी-कभी अलग से मीडिया में खबरें आती हैं, तो लोगों में भ्रम फैलता है कि दो गुट हैं और इससे सरकार भी खुश होती है। आत्माराम जी सुबह उठकर शांति से स्वयं अपनी अंतरात्मा से पूछें कि पूरे प्रदेश में वास्तव में उनके साथ कितने पेंशनर खड़े हैं? आपको सब पता है। जब पूरा हिमाचल सुरेश ठाकुर जी के साथ एक लय में चल रहा है, तो मीडिया में जाकर बयानबाज़ी करने से किसका भला हो रहा है?”
’2 साल खुले मन से काम करने दें, बाद में सवाल-जवाब का रास्ता खुला है’
प्रदेश के बुजुर्ग पेंशनरों ने आत्माराम जी के सामने एक बेहद सुलझा और सम्मानजनक रास्ता रखा है:
खुले मन से दें मौका: आत्माराम जी बड़े मन से सुरेश ठाकुर जी और जॉइंट एक्शन कमेटी को 2 साल का पूरा मौका दें ताकि वे सरकार से सकारात्मक संवाद करके 2016-22 के बकाया एरियर और डीए की किश्तों का काम पूरा करवा सकें।
पेंशनरों का संकल्प: सभी पेंशनरों का स्पष्ट कहना है कि यदि 2 सालों में हमारी मांगे पूरी नहीं होती हैं या काम नहीं होता है, तो हम सब मिलकर सवाल-जवाब करेंगे। उस समय आत्माराम जी भी आगे आने के लिए स्वतंत्र हैं।
एकजुटता ही सबसे बड़ा बल: हम सभी जीवन के उस पड़ाव पर हैं जहाँ आपस में लड़ने की उम्र नहीं रही, बल्कि जीवन को शांति से जीने और अपने हक पाने की उम्र है। जब पेंशनर परिवार एक होकर बिगुल बजाएगा, तभी सरकारें झुकती हैं।
पंजाब दस्तक का निष्कर्ष
हिमाचल प्रदेश का पेंशनर अनुशासित रहकर, सरकार का सम्मान करते हुए केवल अपने जायज हक की पैरवी कर रहा है। ब्लॉक-ब्लॉक में हो रहे संवाद और सम्मेलनों से साफ है कि पेंशनर समाज सुरेश ठाकुर के साथ एकजुट है। ऐसे में आत्माराम जी को भी अपने पुराने योगदान की गरिमा रखते हुए बार-बार मीडिया में जाने के बजाय वयोवृद्ध बुजुर्गों की प्रार्थना स्वीकार करनी चाहिए और इस पेंशनर एकता को बल देना चाहिए।
