कुनिहार में इंद्रपाल शर्मा का तीखा प्रहार—‘चौथा हिस्सा भी नहीं मिला, फिर भी आभार; 95% पेंशनर सुरेश ठाकुर के साथ, स्वयंभू नेताओं का नाम तक नहीं सुनना चाहते पेंशनर’
मांग पत्र पर तय समयसीमा के बाद दिवाली-भैयादूज पर बड़े आंदोलन की तैयारी; कांगड़ा, किन्नौर और कुनिहार तक डोर-टू-डोर जन-जागरण अभियान तेज
विशेष रिपोर्ट (सुरेंद्र राणा, ब्यूरो चीफ, पंजाब दस्तक):
हिमाचल प्रदेश के पेंशनरों ने अपने लंबित वित्तीय देयों, एरियर और वाजिब हकों की बहाली के लिए अब जमीनी स्तर पर मोर्चा पूरी तरह खोल दिया है। पेंशनर वेलफेयर एसोसिएशन और हिमाचल प्रदेश पेंशनर संयुक्त संघर्ष समिति के आह्वान पर यह आंदोलन बड़े मंचों से निकलकर सीधे गांव-गांव, चौपाल और घर-घर पहुंच चुका है। 18 सितंबर को बिलासपुर में 18 संगठनों की संयुक्त कार्यकारिणी बैठक में बनी रणनीति के तहत प्रदेशभर में गठित टोलियां डोर-टू-डोर जन-जागरण अभियान चला रही हैं।
कुनिहार में इंद्रपाल शर्मा का प्रहार: ‘राहत ऊंट के मुंह में जीरा, फिर भी सरकार का आभार’
सोलन जिले के कुनिहार में पेंशनरों की नुक्कड़ बैठक को संबोधित करते हुए संयुक्त संघर्ष समिति के वरिष्ठ नेता इंद्रपाल शर्मा ने कहा कि सरकार ने जो बकाया भुगतान के आदेश जारी किए हैं, उसके लिए संघर्ष समिति प्रदेश सरकार और माननीय मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करती है। हालांकि, यह राहत ‘ऊंट के मुंह में जीरा’ के समान है, क्योंकि अभी तक पेंशनरों की मांगों का चौथा हिस्सा भी पूरा नहीं हुआ है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यह आदेश संघर्ष समिति के पिछले डेढ़ वर्ष के निरंतर आंदोलन की ‘तीसरी बड़ी उपलब्धि’ है। डेढ़ साल तक 90-90 वर्ष के बुजुर्ग पेंशनरों ने सड़कों पर उतरकर लाठियां-धूप झेली और भारी धरने दिए, उसी पेंशनर दबाव के आगे सरकार को झुकना पड़ा है।
मुख्यमंत्री से सीधी अपील: ‘चाटुकारों से दूर रहें, सरकार अपनी छवि खराब न करे’
इंद्रपाल शर्मा ने माननीय मुख्यमंत्री से पुरजोर अपील करते हुए कहा कि वे तथाकथित जॉइंट फ्रंट के चाटुकारों और स्वयंभू नेताओं से पूरी तरह दूरी बनाकर रखें और ऐसे नेताओं को बढ़ावा देकर सरकार अपनी छवि कतई खराब न करे। उन्होंने कहा कि प्रदेश के 95 प्रतिशत से अधिक पेंशनर आज सुरेश ठाकुर और संघर्ष समिति की कार्यकारिणी के साथ चट्टान की तरह खड़े हैं। प्रदेशभर के पेंशनर इन तथाकथित स्वयंभू नेताओं की बयानबाजी से इस कदर नाराज हैं कि पेंशनर इनका नाम तक सुनना पसंद नहीं करते।
विपक्ष को ज्ञापन देने के झूठे आरोपों पर उन्होंने साफ किया कि संघर्ष समिति ने किसी को ज्ञापन नहीं दिया। 31 अगस्त को विपक्षी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने खुद संपर्क कर पेंशनरों की वास्तविक स्थिति और देनदारियों के आंकड़े मांगे थे, ताकि वे अपनी बैठकों में इस पर चर्चा कर सकें। समिति ने केवल सही जानकारी दी थी, जिसे बेवजह तूल दिया गया।
डोर-टू-डोर अभियान: मांग पत्र की समयसीमा और दिवाली-भैयादूज के बाद बिगुल फूंकने की तैयारी
नेताओं ने बताया कि गांव-गांव पहुंच रहीं टोलियां पेंशनरों को अवगत करा रही हैं कि संगठन द्वारा अपनी तमाम प्रमुख मांगों को लेकर विस्तृत मांग पत्र सरकार को पहले ही सौंपा जा चुका है और इसके समाधान के लिए सरकार को निश्चित समय भी दिया गया है। यदि तय समयसीमा के भीतर सरकार ने तमाम मांगों पर ठोस व सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो दिवाली और भैयादूज के बाद पूरे प्रदेश में बड़े आंदोलन का बिगुल फूंक दिया जाएगा। इस आगामी रणनीति और आंदोलन की पूरी रूपरेखा घर-घर जाकर पेंशनरों के साथ साझा की जा रही है, ताकि प्रदेश के 1 लाख 90 हजार पेंशनरों तक चाटुकारों की हकीकत और संघर्ष का सच पहुंच सके।
कांगड़ा, किन्नौर और कुनिहार: तीनों मोर्चों पर एकजुटता की हुंकार
नगरोटा सूरियां (कांगड़ा): शगुन पैलेस में ब्लॉक प्रधान गुरुदेव भारती की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में संयुक्त संघर्ष समिति के प्रदेशाध्यक्ष सुरेश ठाकुर मुख्य अतिथि रहे। बैठक में वर्ग एक व दो को 15% और वर्ग तीन को 30% वित्तीय लाभ की अधिसूचनाओं पर चर्चा हुई। सुरेश ठाकुर, अरविंदर सिंह राणा, सेठ राम और एस.एस. गुलेरिया ने लंबित वित्तीय लाभों को लेकर गहरी चिंता जताई। यहां शोभा सिंह सैनी, सतनाम सिद्धू, एस.एस. जग्गी व वासुदेव शर्मा को मुख्य सलाहकार, अशोक दीवान को उप-प्रधान और जीवन सिंह गुलेरिया को संगठन मंत्री नियुक्त किया गया।
जनजातीय जिला किन्नौर: समिति के प्रदेश अतिरिक्त महासचिव भूपराम वर्मा के नेतृत्व में टीम ने रामपुर होते हुए किन्नौर में डेरा डाला। बुद्धि सिंह चौहान, अमोलक राम और केशव नेगी के साथ मिलकर गांवों में छोटी-छोटी बैठकें की जा रही हैं। मीडिया प्रभारी सैन राम नेगी और शिमला संयोजक मोहन ठाकुर के साथ मिलकर दूरदराज के पेंशनरों को उनके हकों और बकाया देनदारियों के प्रति लामबंद किया जा रहा है।
कुनिहार (सोलन): इंद्रपाल शर्मा के नेतृत्व में नुक्कड़ बैठकों के जरिए पेंशनरों को एकजुट करते हुए चाटुकार नेताओं के बहकावे से दूर रहने और एकजुट होकर पूरे एरियर व देयों की प्राप्ति तक संघर्ष जारी रखने का संकल्प दोहराया गया।
समिति का साफ संदेश है कि जब तक 1 लाख 90 हजार पेंशनरों के पूरे वित्तीय देय और एरियर का एक-एक पैसा नहीं मिल जाता, तब तक यह जन-जागरण और हक की लड़ाई हर गांव और चौपाल पर जारी रहेगी।
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