ब्यूरो चीफ सुरेंद्र राणा / पंजाब दस्तक
शिमला/चंडीगढ़:
हिमाचल प्रदेश के सवा लाख से अधिक पेंशनर्ज के हकों को लेकर लोक निर्माण विभाग (PWD) से सेवानिवृत्त इंजीनियर चेतन ब्रागटा ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्वयंभू पेंशनर नेताओं को पूरी तरह बेनकाब किया है। ‘पंजाब दस्तक’ से तीखी बातचीत में ब्रागटा ने कहा कि प्रदेश के ईमानदार और जुझारू मुख्यमंत्री को गुमराह करने की सोची-समझी साजिश रची जा रही है। महज 16 से 20 लोगों की अपनी निजी मंडली को ‘जनरल हाउस’ और 18 संगठनों का समर्थन बताने वाले तथाकथित नेता का जमीन पर रत्ती भर वजूद नहीं है।
सार्वजनिक चुनौती: साबित करे स्वयंभू नेता, आखिर किस शहरी या ग्रामीण ब्लॉक का प्रधान या कार्यकारिणी सदस्य है?
इंजीनियर चेतन ब्रागटा ने खुला चैलेंज देते हुए कहा:
न प्रधान, न मेंबर—शून्य है वजूद: अगर दम है तो यह तथाकथित नेता जनता और सरकार के सामने साबित करे कि वह आखिर किस ब्लॉक का प्रधान है? वह शहरी ब्लॉक का है या ग्रामीण का? कौन सी कार्यकारिणी का वह निर्वाचित पदाधिकारी या एग्जीक्यूटिव मेंबर है? हकीकत यह है कि वह कहीं का भी प्रधान नहीं है और किसी भी ब्लॉक की प्राथमिक सदस्यता तक उसके पास नहीं है।
विभागीय स्तर पर नकारा हुआ चेहरा: अपने ही विभाग में कानूनी स्तर पर मात खा चुका यह व्यक्ति अब फर्जी दावों, अखबारों की सुर्खियों और प्रेस कॉन्फ्रेंसों के सहारे खुद को नेता साबित करने की जुगत में लगा है। इसके साथ चलने वाले मुट्ठी भर चेहरे भी राज्य कैडर के नहीं बल्कि बाहरी हैं।
चौड़ा मैदान में 50 लोग जुटाने का खुला चैलेंज: यदि इस स्वयंभू नेता के पीछे जरा भी जनसमर्थन है, तो वह 21 तारीख की प्रस्तावित बैठक से पहले शिमला के चौड़ा मैदान में महज 50 लोग इकट्ठा करके दिखा दे। 65 से 70 वर्ष की आयु में इस तरह की चाटुकारिता और फरेब की राजनीति बंद होनी चाहिए—परमात्मा के न्याय और उसकी लाठी से डरना चाहिए।
सच्ची ताकत सुरेश ठाकुर की JAC के पास: CID से रिपोर्ट लें मुख्यमंत्री
ब्रागटा ने स्पष्ट किया कि प्रदेश के 1 लाख 40 हजार से अधिक पेंशनर्ज का सच्चा और अधिकृत प्रतिनिधित्व केवल जॉइंट एक्शन कमेटी (JAC) करती है, जिसके प्रदेशाध्यक्ष शाहपुर (कांगड़ा) के सुरेश ठाकुर और अतिरिक्त महासचिव भूपराम वर्मा हैं।
रैलियों में दिखा ऐतिहासिक जनसैलाब: धर्मशाला के तपोवन विधानसभा के पास जोरावर स्टेडियम हो, शिमला का चौड़ा मैदान हो या शाहपुर की विशाल रैली—इन सभी ऐतिहासिक मोर्चों पर हजारों पेंशनर्ज ने सुरेश ठाकुर की कार्यकारिणी पर मुहर लगाई है।
खुफिया तंत्र से जांच कराएं सीएम: मुख्यमंत्री अपने डीआईजी सीआईडी और विशेष गुप्तचर शाखा से स्वतंत्र रिपोर्ट मंगवाएं कि प्रदेश भर में जमीन पर किसका संगठन सक्रिय है और कौन सिर्फ कागजी दावे कर रहा है। साथ ही किसी भी बातचीत से पहले तथाकथित नेताओं से 18 संगठनों के पदाधिकारियों और समर्थन की प्रमाणित सूची तलब की जाए।
21 तारीख की वार्ता असली संगठन से हो, वरना बिगड़ सकती है बात
इंजीनियर ब्रागटा ने सचेत करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री महोदय पेंशनर्ज और कर्मचारियों के सच्चे हितैषी हैं और सभी पेंशनर सरकार के साथ मजबूती से खड़े हैं। लेकिन यदि 21 तारीख की अहम बैठक में चाटुकारों और स्वयंभू नेताओं को तरजीह दी गई, तो प्रदेश भर के कर्मचारियों और पेंशनर्ज में भारी रोष फैलेगा और वार्ता बेपटरी हो सकती है। सरकार को 2016 से 2022 की वेतन विसंगतियों, एरियर और लंबित वित्तीय लाभों के स्थायी समाधान के लिए केवल असली और अधिकृत संगठन ‘जॉइंट एक्शन कमेटी’ को ही वार्ता की मेज पर बुलाना चाहिए।

