हिमाचल के मछुआरों को मुख्यमंत्री मछुआरा सम्मान निधि योजना के तहत 3500 रुपये की मदद

​जब जलाशयों में थमते हैं जाल, तो नहीं थमेगी चूल्हे की आंच: सुखू सरकार का मछुआरा परिवारों को बड़ा सहारा

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पंजाब दस्तक
धर्मशाला
​वरिष्ठ पत्रकार: भेषज

​हिमाचल प्रदेश के जलाशयों में जब मछली पकड़ने पर प्रतिबंध (क्लोज सीजन) लगता है, तो सिर्फ जाल ही नहीं रुकते—इससे हजारों मछुआरा परिवारों की आजीविका भी ठप हो जाती है। कई हफ्तों तक आय का कोई साधन न होने के कारण इन परिवारों के सामने जीवन-यापन की गंभीर चुनौती खड़ी हो जाती है।


​मछुआरों के इसी मुश्किल दौर में अब मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुखू के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने बड़ा आर्थिक सहारा देने की पहल की है।
​₹3,500 की वित्तीय सहायता सीधे बैंक खाते में
​राज्य सरकार ने ‘मुख्यमंत्री मछुआरा सम्मान निधि योजना’ शुरू करने का निर्णय लिया है। इस योजना के तहत क्लोज सीजन की अवधि के दौरान पात्र मछुआरों को हर वर्ष ₹3,500 की वित्तीय मदद सीधे डीबीटी (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से उनके बैंक खातों में ट्रांसफर की जाएगी।
​यह योजना उन सक्रिय मछुआरों पर लागू होगी जो पंजीकृत मत्स्य सहकारी समितियों से जुड़े हैं और जिनके पास वैध मत्स्य आखेट लाइसेंस उपलब्ध है।


​योजना का मुख्य उद्देश्य
​आर्थिक राहत: प्रतिबंध के समय में परिवारों को वित्तीय संबल प्रदान करना।
​सतत प्रबंधन: जलीय संसाधनों के बेहतर रखरखाव और मत्स्य क्षेत्र को मजबूती देना।
​मछुआरों को सम्मान: मत्स्य उद्योग में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले वास्तविक मछुआरों का सहयोग करना।
​”यह योजना जल-कल्याण शासन व्यवस्था को सुदृढ़ करने और विकास का लाभ राज्य के दूर-दराज तथा कमजोर वर्गों तक पहुंचाने की दिशा में एक और ऐतिहासिक कदम है।”

सुखविंदर सिंह सुखू, मुख्यमंत्री (हिमाचल प्रदेश)
​इस तरह करना होगा आवेदन: प्रक्रिया और आवश्यक दस्तावेज
​मत्स्य पालकों व मछुआरों को राहत पाने के लिए निर्धारित प्रपत्र पर अपनी मत्स्य सहकारी समिति के माध्यम से आवेदन करना होगा।
​आवश्यक दस्तावेज:
​वैध मत्स्य आखेट लाइसेंस
​आधार कार्ड
​परिवार रजिस्टर की प्रति
​वैध NFDP पंजीकरण संख्या
​सहकारी समिति की सदस्यता का प्रमाण पत्र


​सत्यापन एवं स्वीकृति प्रक्रिया:
​प्राप्त आवेदनों की जांच संबंधित मत्स्य सहकारी समिति और मत्स्य विभाग के अधिकारियों द्वारा की जाएगी।
​सत्यापन के पश्चात जिला स्तर पर मत्स्य निदेशक या सहायक निदेशक द्वारा अंतिम अनुमोदन दिया जाएगा।
​स्वीकृति के बाद पूरी राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में हस्तांतरित होगी।
​इस पहल से उन हजारों परिवारों को सीधा संबल मिलेगा जिनकी रोजी-रोटी पूरी तरह से जलाशयों पर निर्भर है।

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