ग्राउंड जीरो से विशेष रिपोर्ट: सुरेंद्र राणा (ब्यूरो चीफ, पंजाब दस्तक)
शिमला / चंडीगढ़
जब हुकूमतें कर्मचारियों और पेंशनरों के जायज हकों की अनदेखी करने लगें, तो एकता ही वह अचूक अस्त्र बनती है जिसके आगे बड़ी से बड़ी सत्ता को झुकना पड़ता है। पंजाब के कर्मचारियों और पेंशनरों ने हाल ही में एकजुटता का ऐसा प्रचंड प्रदर्शन किया कि सरकार को वार्ता की मेज पर आने के लिए मजबूर होना पड़ा। पंजाब का यह ऐतिहासिक संदेश अब पूरे उत्तर भारत में आंदोलन की नई इबारत लिख रहा है।
शास्त्रों का यह अमर श्लोक आज कर्मचारियों के इस संघर्ष पर पूरी तरह सटीक बैठता है:
”अल्पानामपि वस्तूनां संहतिः कार्यसाधिका।
तृणैर्गुणत्वमापन्नैर्बध्यन्ते मत्तदन्तिनः॥”
(अर्थात: छोटी-छोटी तिनकों जैसी इकाइयां भी जब एकजुट होकर रस्सी बन जाती हैं, तो वह मदमस्त हाथी को भी बांध लेती हैं। कलियुग में केवल संगठन और एकता में ही असली शक्ति है—’संघे शक्ति कलियुगे’।)
पंजाब में संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले कर्मचारियों और पेंशनरों की अटूट एकता और ऐतिहासिक पेन-डाउन स्ट्राइक ने शासन की चूलें हिला दी थीं। उसी जीत से प्रेरणा लेकर अब देवभूमि हिमाचल प्रदेश में भी लंबित देनदारियों को लेकर निर्णायक लड़ाई का बिगुल फूंक दिया गया है।
माल रोड के ऐतिहासिक इंडियन कॉफी हाउस में मंथन: चाय की चुस्कियों के बीच खिंची आंदोलन की रूपरेखा
शिमला के माल रोड स्थित प्रसिद्ध इंडियन कॉफी हाउस में कर्मचारी और पेंशनर नेताओं के बीच एक बेहद अहम और लंबी रणनीतिक चर्चा हुई। गर्म चाय की चुस्कियों के साथ चली इस मैराथन वार्ता में राज्य के लाखों कर्मचारियों और पेंशनरों के भविष्य तथा उनके रुके हुए वित्तीय लाभों को लेकर गंभीर विचार-विमर्श हुआ।

इस अनौपचारिक बैठक में हिमाचल प्रदेश कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के संयोजक श्री वीरेंद्र चौहान, सह-संयोजक श्री हीरालाल वर्मा और राज्य संयुक्त संघर्ष समिति के अतिरिक्त महासचिव श्री भूपराम वर्मा मौजूद रहे।
पंजाब दस्तक से बोले भूपराम वर्मा: ‘अलग-थलग रहने का दौर खत्म, अब बनेगा साझा मोर्चा’
’पंजाब दस्तक’ से खास बातचीत में हिमाचल प्रदेश संयुक्त संघर्ष समिति के अतिरिक्त महासचिव श्री भूपराम वर्मा ने दो-टूक शब्दों में कहा कि पंजाब के संघर्ष ने यह साबित कर दिया है कि अगर कर्मचारी और पेंशनर एक जाजम पर आ जाएं, तो कोई भी सरकार उनके हकों को दबा नहीं सकती।
भूपराम वर्मा ने खुलासा किया कि कॉफी हाउस की इस चर्चा में आगामी रणनीति की नींव रख दी गई है:
महाबैठक की तिथि जल्द: कॉफी हाउस में हुई इस लंबी वार्ता में सर्वसम्मति से तय हुआ कि कुछ ही दिनों के भीतर हिमाचल प्रदेश के सभी प्रमुख कर्मचारी संगठनों और पेंशनर एसोसिएशनों के शीर्ष पदाधिकारियों की एक वृहद संयुक्त बैठक बुलाई जाएगी।
एक साझा मंच, एक आवाज: प्रदेश के छोटे-बड़े सभी मुलाजिम और पेंशनर गुटों को एक मंच पर लाकर संयुक्त संघर्ष समिति का विस्तार किया जाएगा, ताकि सरकार से दो-दो हाथ किए जा सकें।
डीए, डीआर और एरियर पर आर-पार: छठे वेतन आयोग का बकाया एरियर, लंबित डीए (DA) और डीआर (DR) की किस्तों का एकमुश्त भुगतान करवाना इस संयुक्त मोर्चे का मुख्य एजेंडा होगा।
नेताओं ने साफ चेतावनी दी है कि यदि समय रहते कर्मचारियों और पेंशनरों की लंबित देनदारियों का निपटारा नहीं किया गया, तो हिमाचल में भी पंजाब की तर्ज पर ऐसा बड़ा आंदोलन खड़ा होगा जिसे संभालना सत्ता के लिए आसान नहीं रहेगा।
(नोट: शिमला के माल रोड स्थित इंडियन कॉफी हाउस में चाय पर चर्चा करते कर्मचारी व पेंशनर नेता—वीरेंद्र चौहान, हीरालाल वर्मा और भूपराम वर्मा।)
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