रिपोर्ट: मीनाक्षी, वरिष्ठ पत्रकार (पंजाब दस्तक)
हिमाचल प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट के बाद देश की शीर्ष अदालत (सुप्रीम कोर्ट) से कर्मचारी एक्ट खारिज होने के उपरांत मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली प्रदेश सरकार ने सभी विभागों के लिए कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
हाई कोर्ट के ताज मोहम्मद मामले और उससे जुड़े अन्य न्यायिक आदेशों के बाद कार्मिक विभाग की प्रधान सचिव सुधा देवी की ओर से यह आधिकारिक आदेश जारी किए गए हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि अदालती फैसलों से बनी परिस्थितियों और संबंधित मामलों में सभी आगामी निर्णय केवल प्रशासनिक विभाग के स्तर पर ही तय किए जाएंगे। फील्ड स्तर का कोई भी अधिकारी प्रशासनिक विभाग की पूर्व मंजूरी के बिना इन मामलों में कोई स्वतंत्र निर्णय नहीं ले सकेगा।
हाई कोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक का कानूनी घटनाक्रम
एक्ट हुआ रद्द: कार्मिक विभाग के आदेशानुसार, हिमाचल प्रदेश रिक्रूटमेंट एंड कंडीशंस ऑफ सर्विस ऑफ गवर्नमेंट एंप्लॉइज एक्ट 2024 को हाई कोर्ट ने 25 अप्रैल 2026 के फैसले में पूरी तरह रद्द कर दिया था और इसके आधार पर हुई कार्रवाई को अवैध ठहराया था। यह निर्णय सी डब्ल्यूपी नंबर 3361/2025 (देवेंद्र कुमार एवं अन्य बनाम हिमाचल प्रदेश सरकार) व अन्य संबंधित मामलों में दिया गया था।
सुप्रीम कोर्ट में अपील खारिज: हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ राज्य सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दायर अपील भी 29 जुलाई को खारिज हो गई।
वित्तीय लाभ देने की समयसीमा: सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को प्रभावित कर्मचारियों के सभी वित्तीय और अन्य सेवा लाभ चार माह के भीतर जारी करने के निर्देश दिए हैं।
सेवा लाभ और नियमितीकरण पर प्रशासनिक व्यवस्था
देवेंद्र कुमार मामले का संबंध हिमाचल प्रदेश प्रशासनिक ट्रिब्यूनल के ओए नंबर 3337/2016 और हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच के ताज मोहम्मद मामले (सी डब्ल्यूपी नंबर 2004/2017) से है। इनमें अनुबंध आधार पर नियुक्त कर्मियों के नियमितीकरण, सेवा लाभ और अनुबंध अवधि को सेवा लाभों में शामिल करने पर स्पष्ट व्यवस्था दी गई है।
सरकार ने सभी विभागाध्यक्षों और विशेष रूप से आहरण एवं संवितरण अधिकारियों (DDOs) को इन दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
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