विशेष रिपोर्ट: काजल, वरिष्ठ पत्रकार
शिमला (पंजाब दस्तक)।
हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में दो साल का अनुबंध कार्यकाल पूरा कर चुके 920 प्रशिक्षित स्नातक शिक्षकों (TGT) के नियमितीकरण के आदेश जारी कर दिए गए हैं। प्रदेश सरकार के इस बड़े फैसले के तहत TGT आर्ट्स, मेडिकल और नॉन-मेडिकल श्रेणियों के पात्र शिक्षकों को नियमित (रेगुलर) कर दिया गया है। शिक्षा विभाग ने इस प्रक्रिया के तहत सेवा शर्तों, R&P नियमों और चरित्र सत्यापन को लेकर कड़े निर्देश भी जारी किए हैं।
R&P नियमों और स्वीकृत पदों के तहत मिली नियमितता
शिक्षा विभाग द्वारा जारी आधिकारिक आदेशों के अनुसार, इन शिक्षकों की नियमितीकरण प्रक्रिया भर्ती एवं पदोन्नति (R&P – Recruitment & Promotion) नियमों के तहत की गई है।
स्वीकृत रिक्त पद: यह पूरी प्रक्रिया स्वीकृत रिक्त पदों के विरुद्ध ही प्रभावी की गई है।
त्रिपक्षीय सत्यापन: स्कूलों के प्रधानाचार्यों की वेरिफिकेशन रिपोर्ट, प्रारंभिक शिक्षा उपनिदेशकों की जांच और निदेशालय स्तर की स्क्रीनिंग कमेटी की सिफारिश के बाद ही यह अंतिम आदेश जारी हुआ है।
पे-मैट्रिक्स और न्यूनतम वेतन: नियमित हुए शिक्षकों को हिमाचल प्रदेश सिविल सेवा (संशोधित वेतन) नियम, 2022 के तहत पे-मैट्रिक्स के लेवल-10 (सेल-1) में ₹38,100 का शुरुआती मूल वेतन मिलेगा। इसके साथ ही नियमानुसार अन्य भत्ते भी दिए जाएंगे।
2 महीने के भीतर चरित्र और दस्तावेजों की जांच अनिवार्य
विभाग ने शिक्षकों की सेवाओं की निरंतरता के लिए कड़े नियम तय किए हैं:
कैरेक्टर वेरिफिकेशन: संबंधित उपनिदेशकों या संस्थान प्रमुखों को निर्धारित दो माह (60 दिन) की अवधि के भीतर शिक्षकों के चरित्र और पूर्ववृत्त का संतोषजनक सत्यापन पूरा करना होगा।
फर्जी दस्तावेज पर सीधी कार्रवाई: यदि जांच के किसी भी स्तर पर अभ्यर्थी की योग्यता, हिमाचली बोनाफाइड, व्यावसायिक योग्यता, जन्मतिथि या अन्य दस्तावेज फर्जी पाए जाते हैं, तो उनकी सेवाएं तुरंत समाप्त कर दी जाएंगी।
घोषणा और रिकॉर्ड: शिक्षकों को भारतीय नागरिक होने का प्रमाण और यह शपथ पत्र देना होगा कि उन्हें किसी भी सरकारी या अर्ध-सरकारी विभाग से बर्खास्त नहीं किया गया है। आपराधिक रिकॉर्ड (यदि कोई हो) छिपाने पर सेवा से हटाने की कार्रवाई की जाएगी।
आरक्षित श्रेणियों और महिला शिक्षकों के लिए निर्देश
SC, ST, OBC, EWS, BPL, WFF और PWD श्रेणियों से संबंधित शिक्षकों के प्रमाण पत्रों की जांच तीन महीने के भीतर सक्षम प्राधिकारी से करवाई जाएगी। वहीं, विवाहित महिला शिक्षकों के मामले में पैतृक प्रमाण पत्र (Parental Certificate) संबंधी नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा।
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