पंजाब दस्तक ब्यूरो
वरिष्ठ पत्रकार: काजल (पंजाब दस्तक)
शिमला:हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनावों के दौरान कांग्रेस पार्टी द्वारा हर घरेलू उपभोक्ता को 300 यूनिट मुफ्त बिजली देने की दी गई बड़ी गारंटी पर अब धरातल पर काम शुरू हो गया है। सुक्खू सरकार ने इस योजना को लागू करने की आधिकारिक प्रक्रिया तो शुरू कर दी है, लेकिन इसके दायरे में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। चुनाव के वक्त जनता से किया गया लोक-लुभावन वादा वर्तमान में पूरी तरह बदल चुका है, क्योंकि फिलहाल इस योजना का लाभ प्रदेश के सभी आम उपभोक्ताओं को नहीं, बल्कि केवल चिन्हित बीपीएल (BPL) परिवारों को ही दिया जा रहा है। सरकार के इस कदम से आम और मध्यमवर्गीय परिवारों में भारी निराशा देखने को मिल रही है।
चुनावी वादे का अब क्या होगा? जनता में आक्रोश
चुनावों के समय मंचों से यह जोर-शोर से दावा किया गया था कि राज्य के हर घर का बिजली बिल 300 यूनिट तक शून्य आएगा। इस लोक-लुभावन वादे के दम पर सत्ता की सीढ़ी चढ़ी सरकार अब वित्तीय संकट और कड़े नियमों का हवाला देकर जनता की उम्मीदों पर पानी फेरती नजर आ रही है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या बाकी आम उपभोक्ताओं को कभी इस योजना का लाभ मिल भी पाएगा या यह चुनावी वादा महज एक चुनावी स्टंट बनकर रह जाएगा? फिलहाल जिस तरह से शर्तें थोपी जा रही हैं, उससे साफ है कि सामान्य और मध्यम वर्ग के परिवारों को इस राहत से पूरी तरह महरूम रहना पड़ेगा, जिससे जनता के बीच सरकार की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं।
इन 3 दस्तावेजों के साथ करना होगा आवेदन
मुफ्त बिजली का लाभ उठाने के लिए बिजली विभाग ने प्रक्रिया को काफी सख्त कर दिया है। इसके तहत केवल उन्हीं उपभोक्ताओं को इस श्रेणी में शामिल किया जाएगा, जो विभाग के पास औपचारिक आवेदन के साथ निम्नलिखित तीन महत्वपूर्ण दस्तावेज जमा और सत्यापित करवाएंगे:
आधार कार्ड
बीपीएल (BPL) राशन कार्ड
नवीनतम बिजली का बिल
सीमित दायरे से आम जनता को झटका
बिजली विभाग के अनुसार, इन तीन अनिवार्य दस्तावेजों की गहन जांच और सामाजिक सत्यापन पूरा होने के बाद ही चिन्हित पात्र परिवारों को मुफ्त बिजली की राहत मिलनी शुरू होगी। वहीं, बाकी के सभी सामान्य श्रेणी के उपभोक्ताओं को फिलहाल इस चुनावी गारंटी के लाभ से पूरी तरह बाहर रखा गया है।
