शिमला (पंजाब दस्तक) | वरिष्ठ पत्रकार: मीनाक्षी
शिमला। हिमाचल प्रदेश के बहुचर्चित हाटी संशोधन मामले में माननीय उच्च न्यायालय ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। संसद द्वारा पारित संशोधन विधेयक के खिलाफ दायर लगभग 27-28 याचिकाओं पर केंद्र के सॉलिसिटर जनरल, एडवोकेट जनरल और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकीलों की तीखी बहस के बाद सुनवाई पूरी हुई। इस बीच सिरमौर के सामाजिक व राजनीतिक समीकरणों पर वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल कुमार ने ‘पंजाब दस्तक’ से खास बातचीत में कई बड़े और चौंकाने वाले खुलासे किए हैं।
15% राजनीतिक व संवैधानिक अधिकारों पर कोई समझौता नहीं
अधिवक्ता अनिल कुमार ने दोटूक शब्दों में कहा, “हमें माननीय न्यायालय पर पूरा भरोसा है। प्रदेश के लगभग 1.5 लाख एससी समुदाय के राजनीतिक प्रतिनिधित्व (15%), शिक्षा और सरकारी नौकरियों के अधिकारों पर कोई आंच नहीं आनी चाहिए। केंद्र सरकार के जवाब से यह स्पष्ट हो चुका है कि एससी समुदाय को एसटी सूची से बाहर रखकर उनके मूल अधिकारों की रक्षा की गई है, जो कि दलित समाज की बड़ी नैतिक जीत है।”
हाटी भी हमारा परिवार, लाभ मिले तो स्वागत
हाटी समुदाय को जनजाति दर्जा मिलने के सवाल पर अनिल कुमार का रुख बेहद सकारात्मक लेकिन स्पष्ट रहा। उन्होंने कहा, “जिला सिरमौर का हाटी समाज, राजपूत और ठाकुर बिरादरी भी हमारे ही परिवार का हिस्सा हैं। यदि सरकार के माध्यम से उन्हें कोई लाभ मिलता है, तो एससी समुदाय को कोई ऐतराज नहीं है, बल्कि हम इसका स्वागत करेंगे। किसी को लाभ मिलता है तो समाज में विरोध नहीं होना चाहिए।”
बड़ा खुलासा: अनिल कुमार ने एससी संरक्षण समिति से दिया इस्तीफा
कानूनी लड़ाई को निष्पक्ष रखने के लिए अधिवक्ता अनिल कुमार ने बड़ा ऐलान करते हुए बताया कि वे दो सप्ताह पहले ही ‘एससी अधिकार संरक्षण समिति’ से अपना इस्तीफा दे चुके हैं। उन्होंने कहा, “मैं एक अधिवक्ता हूँ और इस संवेदनशील मामले को विशुद्ध रूप से कानूनी और निष्पक्ष नजरिए से देखता हूँ। समिति मेरा इस्तीफा स्वीकार करे या न करे, लेकिन मैं पद छोड़ चुका हूँ।”
’पंजाब दस्तक’ की पैनी नजर:
न्याय की इस लड़ाई में कोर्ट का फैसला क्या होगा, इस पर पूरे प्रदेश की निगाहें टिकी हैं।
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