पंजाब में पुरानी पेंशन बहाली की मांग को लेकर प्रदर्शन करते सरकारी कर्मचारी

पंजाब सरकार का कर्मचारियों को चुनावी ‘लॉलीपॉप’? 18 नवंबर के अल्टीमेटम और तीखे सवालों के साथ गरमाया पुरानी पेंशन (OPS) का मुद्दा

Spread the love

​विशेष रिपोर्ट | पंजाब दस्तक | सुरेंद्र राणा (bureau chief)
​चंडीगढ़:पंजाब में विधानसभा चुनावों से महज़ कुछ ही महीने पहले, पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार और सरकारी कर्मचारियों के बीच टकराव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। चुनाव नजदीक आते ही सरकार की तरफ से कर्मचारियों को एक बार फिर बैठकों का ‘लॉलीपॉप’ थमाने का सिलसिला शुरू हो चुका है। बड़ा सवाल यह है कि जो मांगें और जो वादे पिछले चार सालों से फाइलों में दबे रहे, क्या वे अब चुनाव सिर पर आते ही पूरे किए जाएंगे? आखिर ये बैठकें और वादे दो-तीन साल पहले क्यों नहीं किए गए?


​चंडीगढ़ पंजाब भवन में वित्त मंत्री चीमा के साथ तीखी और तार्किक बैठक
​हाल ही में पंजाब भवन, चंडीगढ़ में वित्त मंत्री और कैबिनेट सब-कमेटी के चेयरमैन हरपाल सिंह चीमा की अध्यक्षता में सीपीएफ (CPF) कर्मचारी यूनियन के प्रतिनिधिमंडल के साथ एक अहम और लंबी बैठक हुई।
​यूनियन नेताओं ने अपनी सभी दलीलें पूरी तरह से दस्तावेज़ों और ठोस आंकड़ों के आधार पर सरकार के सामने रखीं। एनएमओपीएस (NMOPS) के तहत पुरानी पेंशन स्कीम की लड़ाई लड़ रहे कर्मचारी नेताओं ने हरियाणा के आंकड़ों का हवाला देते हुए सरकार को हर एक पहलू से पूरी तरह रूबरू कराया।


​यूनियन ने सरकार से दो-टूक शब्दों में कहा कि पंजाब का मुलाजिम अपने वादे के मुताबिक सिर्फ और सिर्फ पुरानी पेंशन स्कीम की बहाली मांगता है। पिछली सरकारों से कर्मचारी डीसीआरजी (DCRG), फैमिली पेंशन और लीव इनकैशमेंट जैसी सुविधाएं पहले ही ले चुके हैं। सरकार को इसमें कोई नया एहसान नहीं करना है, उसे तो बस सीपीएफ के खाते बंद करके कर्मचारियों के जीपीएफ (GPF) खाते खोलने हैं।
​यूनियन के नेताओं द्वारा रखे गए इन तर्कों और तूफानी शंकाओं का सरकार के पास कोई जवाब नहीं था। हालांकि, वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने इस बात पर सहमति जताई कि सरकार ओपीएस के इस मुद्दे को जल्द से जल्द हल करना चाहती है। इसी प्रभाव के चलते वित्त मंत्री ने यूनियन को आगामी 12 नवंबर को दोबारा बातचीत के लिए बुलाया है।


​18 नवंबर 2026 का अल्टीमेटम: पुतले फूंकने की चेतावनी
​यूनियन ने साफ कर दिया है कि वे केवल आश्वासनों पर बैठने वाले नहीं हैं। सरकार द्वारा 18 नवंबर 2022 को ओपीएस के संबंध में जो एक पन्ने का नोटिफिकेशन जारी किया गया था, उसे 18 नवंबर 2026 को पूरे चार साल पूरे हो जाएंगे।
​यूनियन ने कड़े शब्दों में अल्टीमेटम दिया है कि यदि 18 नवंबर 2026 से पहले सरकार ने पुरानी पेंशन बहाल नहीं की, तो राज्य के सरकारी कर्मचारी चुप नहीं बैठेंगे। 12 नवंबर की मीटिंग यदि सकारात्मक रहती है तो बहुत अच्छा, अन्यथा 18 नवंबर 2026 को पूरे पंजाब में जिला हेडक्वार्टर स्तर पर मार्च निकाले जाएंगे और मुख्यमंत्री पंजाब व वित्त मंत्री पंजाब के पुतले फूंक कर रोष प्रदर्शन किए जाएंगे।


​चार साल का ‘ढकोसला’ और राजनीतिक-प्रशासनिक सवाल
​याद दिलाना जरूरी है कि आम आदमी पार्टी ने सत्ता में आने से पहले पंजाब के मुलाजिमों को गारंटी दी थी कि सरकार बनने के एक साल के भीतर पुरानी पेंशन बहाल कर दी जाएगी। लेकिन चार साल बीतने के बावजूद वह पत्र केवल सरकारी फाइलों की शोभा बढ़ाता रहा।


​अब सबसे बड़ा सवाल यह पैदा होता है कि:
​क्या चुनाव सिर पर देखकर यह सरकार सिर्फ एक और नोटिफिकेशन का ‘लॉलीपॉप’ थमाकर पल्ला झाड़ना चाहती है?
​अगर यह सरकार चुनाव से ठीक पहले कोई घोषणा कर भी देती है, तो क्या यह आने वाली नई सरकार के लिए एक बड़ा राजनीतिक और आर्थिक सिरदर्द नहीं बन जाएगी?
​और सबसे अहम बात—पंजाब के सरकारी कर्मचारियों को 2016 के बाद का एरियर, करोड़ों रुपये की कम्यूटेशन, और लीव इनकैशमेंट का बकाया पैसा क्या सचमुच खातों में मिल पाएगा?


​आज 2,15,000 से अधिक कर्मचारियों का आक्रोश और उनके परिवारों का वोट बैंक इस चुनाव की दिशा तय करने जा रहा है। देखना यह होगा कि 12 नवंबर की बैठक कोई ठोस समाधान लाती है या फिर यह कर्मचारियों के साथ महज़ एक और चुनावी छलावा साबित होती है।
​पंजाब दस्तक सवाल उठाता है: क्या 18 नवंबर के अल्टीमेटम से पहले सरकार कर्मचारियों को उनका हक देगी, या फिर कर्मचारियों के खातों और अधिकारों पर यह चुनावी राजनीति भारी पड़ेगी?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *