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विशेष रिपोर्ट: सुरेंद्र राणा (ब्यूरो चीफ, ‘पंजाब दस्तक’, हमीरपुर)
’कभी हनुमान, कभी पार्टी मेरी मां’: हमीरपुर बीजेपी में अंदरखाने चल रहे खेल का हो गया पर्दाफाश!
हमीरपुर। भले ही भारतीय जनता पार्टी कांग्रेस सरकार को कमजोर मानकर अगली सत्ता में वापसी के बड़े-बड़े दावे कर रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट नजर आ रही है। फील्ड में खुद बीजेपी ही बीजेपी के रास्ते का सबसे बड़ा रोड़ा बनी हुई है।
प्रदेश में कई नेताओं की कार्यशैली अब खुलकर सामने आ चुकी है—”पद है तो पार्टी, नहीं तो पार्टी जाए भाड़ में!” इसी ढर्रे पर चलते हुए कुछ तथाकथित नेता अपनी मनमानी की धमाल चौकड़ी मचा रहे हैं।
सियासत के दोहरे रंग: कभी ज़ुबान पर हनुमान, तो कभी ‘पार्टी मेरी माँ’!
राजनीतिक गलियारों में इस समय एक ही चर्चा आम है कि सियासत में मुखौटे कैसे-कैसे बदले जाते हैं। पूरे जिला और पूरी बीजेपी जानती है कि अंदरखाने क्या खेल खेला जा रहा है और पर्दे के पीछे से कौन क्या कर रहा है!
हालात यह हैं कि जो लोग मंचों से ‘कभी हनुमान’ बनने का ढोंग रचते हैं और सार्वजनिक रूप से ‘पार्टी ही मेरी मां है’ के बड़े-बड़े बयान देते हैं, वही लोग पर्दे के पीछे से पार्टी को दीमक की तरह चाटने में लगे हैं। जनता और कार्यकर्ता सब अच्छी तरह जानते हैं कि बयानों के ये तीर और भीतरघात के ये खंजर किसकी शह पर चल रहे हैं।
अजीबोगरीब हालात: कांग्रेस राज में बीजेपी के बागियों की तूती!
जिले में इस वक्त हैरान कर देने वाली स्थिति बनी हुई है। कांग्रेस के शासनकाल में पार्टी के समर्पित कार्यकर्ताओं से ज्यादा उन नेताओं की तूती बोल रही है, जो खुद पार्टी विरोधी गतिविधियों के चलते बाहर का रास्ता देख चुके हैं या हाशिए पर हैं।
बड़ा आरोप: शासन हो या प्रशासन, बीजेपी के कर्मठ और निष्ठावान कार्यकर्ताओं को उन्हीं नेताओं के इशारों पर कांग्रेसी सत्ता या सिस्टम द्वारा चुन-चुनकर परेशान किया जा रहा है। जिस नेता को कभी यही कार्यकर्ता कंधों पर बिठाकर दशकों तक विधानसभा भेजते रहे, आज वही नेता पार्टी कार्यकर्ताओं के नाक में दम करने का काम कर रहा है।
कहा जा रहा है कि कभी पार्टी राग, कभी अनुराग और अब ‘सुख-आश्रय’ के फंडे पर प्रतिशोध की राजनीति करते हुए उक्त नेता एक बार फिर संगठन का सत्यानाश करने में जुटा हुआ है।
’एक वोट सीएम, एक वोट पीएम’ का वो विवादित नारा और ताजा बवाल
बीजेपी कार्यकर्ताओं को भली-भांति याद होगा कि बीते चुनावों में इस तथाकथित नेतृत्व की पार्टी विरोधी मुहिम “एक वोट सीएम, एक वोट पीएम” के नारे से शुरू हुई थी। इसी भितरघात ने पार्टी को शिखर से सीधे शून्य पर ला पटका।
अब खबर है कि उसी तथाकथित नेतृत्व ने पुरानी बीजेपी के राग पर नए-पुराने कार्यकर्ताओं को भ्रमित करने का नया नाकाम मसौदा तैयार किया है।
इसी गुटबाजी का नतीजा रविवार को देखने को मिला, जब पूर्व केंद्रीय मंत्री व सांसद अनुराग ठाकुर के कार्यक्रम से ठीक पहले उक्त नेता और जिला बीजेपी अध्यक्ष के बीच तीखा बवाल हो गया। आरोप है कि उक्त नेता ने जिला अध्यक्ष को भी उसी व्यक्तिगत प्रतिशोध की लाठी से हांकने की कोशिश की, जिससे वह सालों से कार्यकर्ताओं को प्रताड़ित करता रहा है। लेकिन इस बार संगठन ने कड़ा रुख अपनाते हुए करारा जवाब दिया, जिससे नेताजी की अकड़ ढीली पड़ गई है।
हाईकमान की पैनी नजर, भितरघातियों पर गिर सकती है गाज
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला और मंडल स्तर से पल-पल का फीडबैक हाईकमान तक पहुँचाया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार:
संगठनात्मक रुख: हाईकमान के निर्देशों पर चलते हुए संगठन अनुशासन बनाए रखने के लिए हर कड़ा और कठोर निर्णय लेने के लिए पूरी तरह सक्षम है।
फ्रंटल विंग्स के साथ समन्वय: जिला स्तर पर सभी मोर्चों, प्रकोष्ठों और मंडलों के साथ समन्वय बनाकर आगे की रणनीति तैयार की जा रही है, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की पार्टी विरोधी गतिविधि पर सख्त अंकुश लगाया जा सके।
वरिष्ठ नेताओं का मानना: पार्टी किसी एक व्यक्ति या समूह की जागीर नहीं है। यह कार्यकर्ताओं के खून-पसीने और विचारधारा पर खड़ी है। व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा और प्रतिशोध की राजनीति से संगठन को जो नुकसान हो रहा है, उसे अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
जिला अध्यक्ष का कड़ा संदेश: “गद्दारी करने वालों को नहीं बख्शेंगे”
इस पूरे घटनाक्रम और अनुशासनहीनता पर प्रतिक्रिया देते हुए राकेश ठाकुर (जिला अध्यक्ष, बीजेपी) ने बेबाक और कड़ा रुख अपनाया है।
”बीजेपी का हर एक कार्यकर्ता हमारे लिए सर्वप्रिय और सर्वोपरि है। लेकिन जो लोग पार्टी के खिलाफ काम करेंगे या निर्देशों की अवहेलना कर व्यक्तिगत स्वार्थों के लिए संगठन को कमजोर करने की कोशिश करेंगे, उन्हें हरगिज़ बख्शा नहीं जाएगा। भारतीय जनता पार्टी किसी व्यक्ति विशेष की जागीर नहीं है। पार्टी हाईकमान के जो भी आदेश होंगे, उनका अक्षरशः पालन किया जाएगा।”
राकेश ठाकुर, जिला अध्यक्ष (बीजेपी)
निष्कर्ष: बीजेपी में छिड़ी यह अंदरूनी जंग अब आर-पार के मोड़ पर पहुँच चुकी है। ‘कभी हनुमान’ बनने का नाटक करने वाले चेहरे अब बेनकाब हो चुके हैं। एक तरफ जहाँ भितरघाती अपनी जमीन तलाशने के लिए कार्यकर्ताओं को गुमराह करने में जुटे हैं, वहीं दूसरी तरफ बीजेपी संगठन ने स्पष्ट कर दिया है कि अनुशासनहीनता के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी और पार्टी का सत्यानाश करने वालों को अब और छूट नहीं मिलेगी।
देखते रहें ‘पंजाब दस्तक’ – सच की आवाज़, हर खबर आपके साथ!
