भूपराम ने आत्माराम के दावों पर उठाए सवाल

आत्माराम के झूठ का भूपराम ने किया महा-पर्दाफाश: सीएम के साथ अंदरखाने ‘रात की सेटिंग’ कर पेंशनरों के कम्यूटेशन पर साधी चुप्पी, 95% पेंशनर हमारे साथ—दो महीने में फिर दिखाएंगे शक्ति प्रदर्शन!

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​शिमला / विशेष ग्राउंड रिपोर्ट: मीनाक्षी (पंजाब दस्तक)
​हिमाचल प्रदेश में कर्मचारी-पेंशनर्स राजनीति और वेलफेयर एसोसिएशन के भीतर छिड़ा महासंग्राम अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है। पिछले कल आत्माराम द्वारा की गई प्रेस वार्ता में किए गए दावों की हवा निकालते हुए आज जॉइंट एक्शन कमेटी के एडिशनल जनरल सेक्रेटरी एवं वेलफेयर एसोसिएशन के अधिकृत जनरल सेक्रेटरी भूपराम ने कानूनी दस्तावेजों, कोर्ट के फैसलों, विधानसभा के रिकॉर्ड और अखबारों की कतरनों के साथ मीडिया के सामने पूरे घटनाक्रम का कच्चा-चिट्ठा खोलकर रख दिया। भूपराम ने सिलसिलेवार खुलासे करते हुए साफ किया कि आत्माराम गुट मीडिया को गुमराह कर रहा है और सरकारी तंत्र के दबाव में हुए आदेशों को अपनी फर्जी जीत बताकर कर्मचारियों की पीठ में छुरा घोंप रहा है।


​नोटिस लेने से बचते रहे, बिस्तर में छुपने तक की नौबत आई
​प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भूपराम ने सबसे पहले आत्माराम के दोहरे रवैये की पोल खोली। उन्होंने कहा, “जब संगठन की तरफ से आत्माराम को निष्कासन का नोटिस रिसीव करवाना था, तो हम लगातार उनके घर के चक्कर काटते रहे। सुबह भी जाते थे और शाम को भी, लेकिन वे इतने तंग आ गए कि अंदर बिस्तर में घुस जाते थे ताकि नोटिस न लेना पड़े।” भूपराम ने सवाल दागा कि जब वे मीडिया में दावा करते हैं कि उन्हें निष्कासन (एक्सपेल) की कोई चिट्ठी ही नहीं मिली, तो फिर वे डिप्टी रजिस्ट्रार को-ऑपरेटिव सोसायटीज की अदालत में अपनी बहाली की गुहार लगाने किस आधार पर पहुंच गए?


​मार्च में कार्यकाल समाप्त, फिर अप्रैल की बैठक पूरी तरह गैरकानूनी
​भूपराम ने संगठन के संविधान का हवाला देते हुए बताया कि आत्माराम वर्ष 2012 से खुद को परमानेंट प्रधान मानकर मनमानी चला रहे हैं। जबकि संविधान स्पष्ट कहता है कि हर 3 वर्ष में लोकतांत्रिक तरीके से चुनाव करवाना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि आत्माराम का कार्यकाल मार्च में ही समाप्त हो चुका था। कार्यकाल खत्म होने के बाद यदि आप एक दिन भी आगे बढ़कर कोई बैठक बुलाते हैं, तो वह पूरी तरह इल्लीगल (अवैध) और असंवैधानिक होती है। इसके बावजूद अप्रैल में मनमाने ढंग से बैठक बुलाकर नोटिस जारी किया गया और वेलफेयर एसोसिएशन व जॉइंट एक्शन कमेटी के प्रधान सुरेश ठाकुर को निष्कासित करने की साजिश रची गई। इस तानाशाही के खिलाफ जब सुरेश ठाकुर डिप्टी रजिस्ट्रार की कोर्ट में गए, तो अदालत ने इस पर अंतरिम स्टे दे दिया था।


​सरकारी दबाव में हुए आदेश, सेक्रेटरी को-ऑपरेटिव के पास अपील ड्राफ्ट तैयार
​हालिया आदेशों पर बोलते हुए भूपराम ने बड़ा आरोप लगाया कि ये आदेश सरकारी दबाव और प्रभाव में करवाए गए हैं। उन्होंने घोषणा की कि इस आदेश के खिलाफ अपील पूरी तरह ड्राफ्ट हो चुकी है और एक-दो दिन के भीतर पहली अपीलेट अथॉरिटी यानी सेक्रेटरी को-ऑपरेटिव सोसायटीज (आईएएस अधिकारी) के समक्ष इसे विधिवत दायर किया जा रहा है।
​उन्होंने याद दिलाया कि यह स्वयंभू नेता पहले भी हमारे खिलाफ दो कंटेम्प्ट पिटीशन दायर कर चुके हैं और रजिस्ट्रार को-ऑपरेटिव सोसायटीज की अदालत से दोनों बार मुंह की खा चुके हैं। इस बार भी कानूनी लड़ाई में दूध का दूध और पानी का पानी होकर रहेगा।


​10 लोगों के पास 14-15 हजार फूंकने का पैसा आ कहां से रहा है?
​भूपराम ने आत्माराम गुट की फंडिंग पर सीधा सवाल उठाते हुए कहा, “कल इन्होंने शिमला प्रेस क्लब में प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जहां 14 से 15 हजार रुपये का खर्च आता है। हमें समझ नहीं आ रहा कि यह पैसा आ कहां से रहा है? जो नेता खुद कहता है कि पहले मेरे साथ 5 लोग थे और अब 10 हो गए हैं, तो इन 10 लोगों के पास इतना पैसा कहां से बरस रहा है?”


​सीएम सुक्खू को आगाह: ‘लूटू टोला’ और ‘गुलदस्ता गैंग’ से बचकर रहे सरकार
​प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को सीधे मुखातिब होते हुए भूपराम ने कड़े शब्दों में चेतावनी दी। उन्होंने कहा, “लोकतंत्र में मुख्यमंत्री जी आपने जो यह ‘लूटू टोला’ और ‘फूल-दस्ता गैंग’ पाल रखा है, इनसे आप तुरंत दूरी बना लीजिए। हम पहले ही आगाह कर रहे हैं, बाद में मत कहिएगा कि कुछ गड़बड़ हो गई। मुख्यमंत्री जी से हमारा कोई व्यक्तिगत गिला-शिकवा नहीं है, वे प्रदेश के मुखिया हैं। हम न किसी को गाली दे रहे हैं, न गलत बोल रहे हैं; हम केवल कर्मचारियों और पेंशनरों का वाजिब हक मांग रहे हैं और हक लेकर रहेंगे।” साथ ही उन्होंने चुनौती दी कि जो लोग एफआईआर और गिरफ्तारी की धमकियां दे रहे हैं, वे थाने जाएं और खुलकर कार्रवाई करवाएं, कर्मचारी डरने वाले नहीं हैं।


​‘अपील खारिज’ की अखबारों में छपी खबर पूरी तरह झूठी और प्रायोजित
​भूपराम ने अमर उजाला अखबार की सुर्खी को मीडिया के सामने दिखाते हुए कहा कि अपील खारिज होने का दावा पूरी तरह झूठा और प्रायोजित है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अपीलेट अथॉरिटी सेक्रेटरी को-ऑपरेशन होते हैं, जहां अभी तक अपील दायर ही नहीं हुई थी, तो खारिज होने का सवाल ही नहीं उठता। पहले डिप्टी रजिस्ट्रार के पास पिटीशन थी, जिसमें हम जीते थे। मुख्यमंत्री के छह-छह सलाहकार और मंत्री आंखें मूंदकर बैठे हैं और ऐसी झूठी अफवाहें फैलाई जा रही हैं।


​पेंशनरों के कम्यूटेशन पर रात के अंधेरे में ‘सेटिंग’, गंभीर बीमारियों और बेटियों की शादी का दर्द
​आत्माराम द्वारा पेंशनरों की वित्तीय मांगों पर दिए गए बयान की बखिया उधेड़ते हुए भूपराम ने बड़ा सनसनीखेज आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कल की प्रेस वार्ता में यह स्वयंभू नेता 2016 से 2022 के बीच सेवानिवृत्त हुए कर्मचारियों के लीव इनकैशमेंट, ग्रेच्युटी, एरियर और डीए की बात तो कर रहा था, लेकिन पेंशनरों के सबसे बड़े हक कम्यूटेशन पर पूरी तरह चुप्पी साध गया। भूपराम ने कहा, “कम्यूटेशन का जिक्र क्यों नहीं किया गया? क्योंकि ये स्वयंभू नेता रात के अंधेरे में मुख्यमंत्री के पास जाकर गुपचुप बैठकें करते हैं और तय करते हैं कि अगले दिन मीडिया में क्या बोलना है। हमारे कई सेवानिवृत्त साथियों की चार-चार बेटियां हैं जिनकी शादियां होनी बाकी हैं, कई बुजुर्ग क्रॉनिक डिसीज (गंभीर बीमारियों) से जूझ रहे हैं और इलाज के लिए पाई-पाई को मोहताज हैं। ऐसे में कम्यूटेशन बंद करके पेंशनरों की कमर तोड़ दी गई है, लेकिन सरकारी दलाली करने वाले इस पर जुबान नहीं खोलते क्योंकि ये खुद वीआरएस लेकर मलाई काट चुके हैं।”


​खाते में पाई-पाई आने पर ही धन्यवाद, झूठे दावों की खुली पोल
​दिवाली से पहले की जा रही बयानबाजी पर भूपराम ने दो टूक कहा कि पेंशनर न किसी के झांसे में आएंगे और न ही केवल खोखले बयानों पर धन्यवाद करेंगे। जब तक पेंशनरों के खातों में उनका पूरा हक, एरियर, डीए और कम्यूटेशन का पैसा नहीं आ जाता, तब तक कोई धन्यवाद नहीं होगा। उन्होंने मुख्यमंत्री को घेरते हुए कहा कि साढ़े तीन सालों में केवल झूठी घोषणाएं की गईं, यहां तक कि कसौली के विधायक के सवाल पर विधानसभा में गलत जानकारी दी गई कि 67 साल से ऊपर के सभी बुजुर्गों को देनदारियां दे दी गई हैं। जब सरकार सदन में ऐसा असत्य बोलेगी, तो क्या पेंशनर सड़कों पर भी न उतरें?


​‘असली-नकली’ का फैसला अवाम करेगी, 2 महीने बाद फिर शक्ति प्रदर्शन की चुनौती
​विपक्ष और जयराम ठाकुर को ज्ञापन सौंपने के आरोपों पर भूपराम ने कहा, “मैं वेलफेयर एसोसिएशन का अधिकृत जनरल सेक्रेटरी और जॉइंट एक्शन कमेटी का एडिशनल सेक्रेटरी हूं। हम पेंशनरों के हक के लिए राज्यपाल, विपक्ष, प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति—किसी के पास भी जा सकते हैं। इसके लिए किसी स्वयंभू की इजाजत की जरूरत नहीं है।”


​प्रेस वार्ता में संगठन में ‘असली और नकली’ के दावों पर विराम लगाते हुए भूपराम ने खुली चुनौती दी। उन्होंने कहा, “यह असली या नकली की बहस नहीं है। मीडिया और पूरी जनता देख चुकी है कि पेंशनर्स का भारी जनसैलाब किसके साथ खड़ा है। हमारे केवल जुबानी बोलने से कुछ नहीं होता, धरातल पर हमारा संख्याबल और 95 फीसदी पेंशनर हमारे साथ हैं। शिमला से लेकर धर्मशाला तक हमारा शक्ति प्रदर्शन पहले ही देखा जा चुका है। अगर किसी को संख्याबल पर शक है, तो हम ऐलान करते हैं कि दो महीने के भीतर एक बार फिर विशाल शक्ति प्रदर्शन करके दिखा देंगे कि असली ताकत किसके पास है।”


​”जेब से 40 हजार फूंककर फील्ड में डटे हैं हम, सरकार की शरण में बैठने वालों को जवाब देना जरूरी था”
​पत्रकारों द्वारा यह पूछे जाने पर कि जब उनके साथ कोई जनसमर्थन ही नहीं है तो उन्हें इतनी तवज्जो क्यों दी जा रही है? इस पर भूपराम ने बेबाक जवाब दिया। उन्होंने कहा, “हम उन्हें कोई तवज्जो नहीं दे रहे हैं। हमें मीडिया के सामने इसलिए आना पड़ा क्योंकि कल उन्होंने मीडिया में यह झूठा ढोल पीटा कि ‘हम जीत गए’। अगर वे झूठ बोलेंगे तो सच्चाई सामने लाना हमारी जिम्मेदारी थी। हम तो 24 घंटे फील्ड में रहते हैं, लगातार दौरों पर हैं। हमारे सोने, उठने और खाने-पीने का कोई ठिकाना नहीं है। दो-तीन लोगों के दौरे में हमने अपनी जेब से 40,000 रुपये खर्च किए हैं। हमें किसी से कोई निजी स्वार्थ नहीं है, हमें सब कुछ मिल चुका है, हम सिर्फ और सिर्फ बुजुर्ग पेंशनरों की बुलंद आवाज बनकर धरातल पर लड़ रहे हैं।”


​भूपराम ने सीधा वार करते हुए कहा, “दूसरी तरफ ये वो लोग हैं जिन्होंने मुख्यमंत्री की राजनीतिक शरण ले रखी है। मुख्यमंत्री कार्यालय से जैसा आदेश आता है, जैसी स्क्रिप्ट दी जाती है, ये वैसा ही सफर तय करते हैं और मीडिया में आकर बयान दाग देते हैं। सरकार के इस कठपुतली तंत्र और पेंशनरों के साथ हो रहे धोखे का पर्दाफाश करने के लिए ही हमें बार-बार जनता और मीडिया के बीच आना पड़ रहा है।”


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