विशेष ब्यूरो, हमीरपुर (उमांशी राणा)
बड़सर/महरे: जिला परिषद हमीरपुर के उपाध्यक्ष पद पर गुरदीप सिंह की ताजपोशी के ठीक बाद बड़सर भाजपा के भीतर सुलग रही चिंगारी अब एक भीषण सियासी लावे में तब्दील हो गई है। करेर वार्ड से निर्वाचित जिला परिषद सदस्य और नवनियुक्त उपाध्यक्ष गुरदीप सिंह ने पूर्व जिला अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक बलदेव शर्मा के खिलाफ सीधा मोर्चा खोलकर पूरी सियासत को गरमा दिया है। एक तरफ जहां बड़सर के कद्दावर विधायक इंद्रदत्त लखनपाल ने ‘पार्टी विरोधी तत्वों’ को सख्त चेतावनी दी है, वहीं दूसरी तरफ मुख्यमंत्री के एक हालिया बयान पर तीखा पलटवार कर सीधे प्रदेश सरकार को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है।
2027 के विधानसभा चुनावों से ठीक पहले हमीरपुर की इस हॉट सीट पर शुरू हुआ यह शह और मात का खेल अब दिल्ली और शिमला के गलियारों तक गूंजने लगा है।
मुख्यमंत्री के बयान पर लखनपाल का करारा पलटवार, कहा- “सरकार की मंशा असंवैधानिक”
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बड़सर के विधायक इंद्रदत्त लखनपाल ने मुख्यमंत्री के उस बयान पर कड़ा ऐतराज जताया, जिसमें कहा गया था कि ‘जिला परिषद सदस्य केवल एक दिन के सदस्य होते हैं।’ लखनपाल ने इस पर तीखा पलटवार करते हुए कहा, “यह पूरी तरह से एक असंवैधानिक वक्तव्य है, जिससे साफ पता चलता है कि मौजूदा सरकार की मंशा चुनी हुई लोकतांत्रिक संस्थाओं और विधानसभा सदस्यों की शक्तियों में कटौती करने की है। पंचायती राज संस्थाओं के जनप्रतिनिधियों का इस तरह अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”
इस मौके पर लखनपाल और नवनियुक्त उपाध्यक्ष गुरदीप सिंह ने सर्वसम्मति से अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद पर भाजपा समर्थित उम्मीदवारों का साथ देने के लिए सभी पार्षदों और संगठन का दिल से आभार भी प्रकट किया।
गुरदीप सिंह के संगीन आरोप: क्या बलदेव शर्मा पर किसी ‘बहुत बड़े नेता’ का वरदहस्त है?
प्रेस कॉन्फ्रेंस में जिला परिषद उपाध्यक्ष गुरदीप सिंह ने बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए पूर्व विधायक बलदेव शर्मा पर गंभीर आरोप मढ़े। 1998 से भाजपा के सक्रिय कार्यकर्ता रहे गुरदीप सिंह ने कहा कि संगठन का निर्णय हमेशा उनके लिए सर्वोपरि रहा है, लेकिन कुछ नेता लगातार भीतरघात कर रहे हैं।
कांग्रेस के लिए वोटिंग की अपील: गुरदीप सिंह ने आरोप लगाया कि विधानसभा उपचुनाव और हालिया जिला परिषद चुनाव के दौरान बलदेव शर्मा ने बकायदा लोगों को फोन करके पार्टी लाइन से हटकर कांग्रेस समर्थित प्रत्याशियों के पक्ष में मतदान करने का दबाव बनाया।
बड़ा सवाल—पीछे कौन है?: गुरदीप सिंह ने सियासी गलियारों को यह कहकर और गरमा दिया कि “क्या बलदेव शर्मा के सिर पर भारतीय जनता पार्टी के किसी बहुत बड़े शीर्ष नेता का हाथ है, जिसके दम पर वे लगातार अनुशासनहीनता कर रहे हैं?” उन्होंने ऐसे नेताओं को तुरंत पार्टी से निष्कासित करने की मांग की है।
विधायक इंद्रदत्त लखनपाल ने भी इस सुर में सुर मिलाते हुए दोटूक कहा, “पार्टी के खिलाफ अंदरूनी तौर पर कार्य करने वाले लोगों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। बड़सर में कोई अलग धड़ा नहीं है। कोई नेता, एमएलए या जिला परिषद बाद में है, पहले संगठन और पार्टी है।” लखनपाल ने पूर्व में पंचायत चुनावों के दौरान दानदरू वार्ड से पार्टी की बागी रजनी पीला के पक्ष में प्रचार करने के लिए बलदेव शर्मा और उनकी पत्नी माया शर्मा की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठाए।
बलदेव शर्मा का दोटूक जवाब: “40 साल की निष्ठा को सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं”
इन तमाम चौतरफा हमलों और आरोपों को पूर्व विधायक बलदेव शर्मा ने सिरे से खारिज करते हुए इन्हें पूरी तरह बेबुनियाद करार दिया है।
पलटवार करते हुए बलदेव शर्मा ने कहा:
”मैं पिछले 40 वर्षों से भारतीय जनता पार्टी का एक वफादार और सच्चा सिपाही हूं। किसी के कुछ भी अनर्गल बोल देने भर से मेरी निष्ठा पर आंच नहीं आ सकती। यदि किसी के पास मेरे खिलाफ रत्ती भर भी कोई पुख्ता प्रमाण है, तो वो पीठ पीछे राजनीति करने के बजाय उसे सबके सामने लेकर आए। मुझे किसी भी नए-नवेले नेता से पार्टी के प्रति वफादार होने का ‘प्रमाण पत्र’ लेने की कोई जरूरत नहीं है। भाजपा मेरी मां है और मैंने हमेशा संगठन की इज्जत के लिए काम किया है।”
खोजी विश्लेषण: कैमरे के पीछे की वो बातें, जो हर कोई जानता है पर बोलता नहीं!
बड़सर की इस राजनैतिक जंग में जो बातें ऑन-कैमरा बोली जा रही हैं, उससे कहीं ज्यादा दिलचस्प वो बातें हैं जो कैमरे के पीछे और चौपालों में तैर रही हैं। जनता और राजनीतिक विश्लेषकों के बीच दबी जुबान में यह चर्चा बेहद आम है कि पूर्व विधायक बलदेव शर्मा आखिर किस बड़े नेता के ‘हनुमान’ बनकर यह पूरी बिसात बिछा रहे हैं? बड़सर के कई जागरूक मतदाताओं और व्हाट्सएप ग्रुप्स में यह सवाल तैर रहा है कि क्या बलदेव शर्मा को संगठन के ही किसी बेहद रसूखदार ‘शीर्ष चेहरे’ की अंदरूनी शह प्राप्त है? लोग दबी जुबान में कहते तो बहुत कुछ हैं, लेकिन कैमरे के सामने आने से कतराते हैं।
दूसरी तरफ, कांग्रेस और मुख्यमंत्री के खेमे द्वारा पूर्व में दिए गए बयानों (जैसे जिला भाजपा में धड़ेबाजी) को लेकर भी अब जमीन पर कयासों का दौर शुरू हो गया है। हालांकि, विधायक इंद्रदत्त लखनपाल के भाजपा में आने के बाद से उन्होंने अपनी बेदाग छवि, ईमानदारी और बिजली की रफ्तार जैसी सक्रियता से हर धड़े को एक सूत्र में पिरोने का बेजोड़ काम किया है। भाजपा का केंद्रीय और प्रांतीय शीर्ष नेतृत्व लखनपाल की इसी कार्यशैली से बेहद गदगद है। लेकिन पुराना बनाम नया का यह अंतर्विरोध अब खुलकर सतह पर आ गया है।
2027 के विधानसभा चुनाव अब ज्यादा दूर नहीं हैं; ऐसे में अगर इस गुटबाजी और भीतरघात पर आलाकमान ने तुरंत कड़ा हंटर नहीं चलाया, तो मिशन 2027 की राह में यह अंदरूनी कलह पार्टी के लिए परीक्षा की घड़ी साबित हो सकती है। अब गेंद पूरी तरह से भाजपा हाईकमान के पाले में है!
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