चंडीगढ़ (सुरेंद्र राणा, ब्यूरो चीफ, पंजाब दस्तक):
चंडीगढ़ प्रशासन के एकतरफा फैसले ने ट्राइसिटी के हजारों युवाओं की रोजी-रोटी पर ताला लगा दिया है और आम जनता को महंगाई की आग में झोंक दिया है। बाइक टैक्सी पर लगाई गई रोक के बाद अब न सिर्फ चालक सड़कों पर प्रदर्शन करने को मजबूर हैं, बल्कि चंडीगढ़, मोहाली और पंचकूला के सेक्टरों में रहने वाले आम नागरिक, दफ्तर जाने वाले कर्मचारी, बुजुर्ग, महिलाएं और कॉलेज के छात्र भी खुलकर प्रशासन की मनमानी के खिलाफ बोलने लगे हैं।
पंजाब दस्तक की ग्राउंड रिपोर्ट: जनता का फूटा गुस्सा
पंजाब दस्तक की टीम ने जब चंडीगढ़ के सेक्टर 50, सेक्टर 17, सेक्टर 43 बस स्टैंड सहित मोहाली के विभिन्न इलाकों में ग्राउंड ज़ीरो पर जाकर लोगों की नब्ज टटोली, तो जनता का दर्द और आक्रोश साफ झलका।
छात्रों और युवतियों का दर्द: पंजाब यूनिवर्सिटी, विभिन्न कॉलेजों और कोचिंग संस्थानों में जाने वाले छात्रों व कामकाजी महिलाओं ने साफ कहा कि जब अकेले एक सेक्टर से दूसरे सेक्टर या दफ्तर जाना होता था, तो बाइक टैक्सी महज ₹50, ₹70, ₹100 के किफायती किराए में बिना ट्रैफिक में फंसे गंतव्य तक पहुंचा देती थी। आज उसी दूरी के लिए ऑटो या चार पहिया कैब वाले मनमाना ₹150 से ₹250 तक वसूल रहे हैं, जिससे महीने का पूरा बजट बिगड़ चुका है।
ट्रैफिक जाम से राहत: लोगों का कहना है कि जहां चार पहिया गाड़ियां पीक आवर्स में ट्रैफिक जाम में फंसी रहती हैं, वहीं बाइक टैक्सी समय बचाते हुए आसानी से निकाल लेती थी।
बेरोजगारों का सहारा: सैकड़ों युवा जो पढ़ाई के साथ-साथ पार्ट-टाइम बाइक चलाकर अपना और अपने परिवार का खर्च निकाल रहे थे, वे आज पूरी तरह बेरोजगार होकर दाने-दाने को मोहताज हो गए हैं।
पंजाब दस्तक का संपादकीय विश्लेषण व तीखे सवाल:
क्या प्रशासन का यह फैसला जनहित में है या केवल किसी विशेष लॉबी को फायदा पहुंचाने के लिए लिया गया है?
केंद्र की गाइडलाइंस का उल्लंघन क्यों? जब केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी स्पष्ट रूप से दोपहिया टैक्सियों को वैध मानकर देश भर के लिए गाइडलाइंस जारी कर चुके हैं, तो चंडीगढ़ प्रशासन केंद्र की पॉलिसी को लागू करने में आनाकानी क्यों कर रहा है?
सस्ता विकल्प छीनना कहां का न्याय? अगर किसी अकेले व्यक्ति को चंद किलोमीटर के सफर पर निकलना है, तो वह पूरी कैब बुक करके भारी-भरकम पैसे क्यों फूंके? लास्ट माइल कनेक्टिविटी के इस दौर में दोपहिया टैक्सी सबसे व्यावहारिक और सस्ता विकल्प है।
सुरक्षा के कड़े नियम बनाएं, पाबंदी हल नहीं: प्रशासन का दायित्व नियमन (रेगुलेशन) करना है, न कि पाबंदी लगाना। चालकों का पुलिस वेरिफिकेशन, हेलमेट की अनिवार्यता, जीपीएस ट्रैकिंग और स्पीड गवर्नर जैसे सख्त नियम तय किए जा सकते हैं, लेकिन सीधे पाबंदी लगाना जनता की जेब पर खुला डाका है।
पंजाब दस्तक की सीधी मांग:
प्रशासन अपनी कुंभकर्णी नींद से जागे और केंद्र की गाइडलाइंस के तहत पारदर्शी नीति बनाकर बाइक टैक्सी का संचालन तुरंत बहाल करे, ताकि बेरोजगारों को काम और जनता को सस्ता सफर मिल सके।
जनता की अदालत: आपकी क्या राय है?
क्या चंडीगढ़ में बाइक टैक्सी तुरंत शुरू होनी चाहिए? क्या आप भी महंगे ऑटो-कैब किराए से परेशान हैं? अपनी राय हमें कमेंट बॉक्स में लिखकर जरूर बताएं ताकि आपकी आवाज को सीधे शासन और प्रशासन तक पहुंचाया जा सके।
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