कांगड़ा में 25.37 ग्राम चिट्टे के साथ दो आरोपी गिरफ्तार, CIA टीम की कार्रवाई

यूनिवर्सिटी के पास 25 ग्राम चिट्टे के साथ दो गिरफ्तार: क्या यह सिर्फ गश्त की सफलता है या नशे के धंधे में आपसी रंजिश और सौदे की गड़बड़?

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​धर्मशाला (पंजाब दस्तक):

हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में नशे के काले कारोबार पर पुलिस ने एक और शिकंजा कसा है। थाना पंचरुखी के अंतर्गत श्री साईं यूनिवर्सिटी मोड़ के पास सीआईए (CIA) टीम ने पैदल घूम रहे दो युवकों से 25.37 ग्राम चिट्टा (हेरोइन) बरामद कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया। पकड़े गए आरोपियों में 39 वर्षीय पलविंदर सिंह (निवासी दवाववाल कलां, बटाला, जिला गुरदासपुर, पंजाब) और 35 वर्षीय ऋषभ कुमार (निवासी अवेरी, तहसील बैजनाथ, जिला कांगड़ा) शामिल हैं। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।


​यूनिवर्सिटी के आसपास नशे का जाल: छात्रों को शिकार बनाने की साजिश?
​शिक्षण संस्थान के बिल्कुल पास चिट्टे की इतनी बड़ी खेप बरामद होना बेहद गंभीर और चिंताजनक है। सीआईए टीम अब इस नेटवर्क की तह तक जाने में जुटी है कि क्या इस खेप का सीधा निशाना यूनिवर्सिटी के छात्र और हॉस्टलों में रहने वाले नौजवान थे? पंजाब और कांगड़ा के दो व्यक्तियों का एक साथ होना साफ इशारा करता है कि यह अंतर्राज्यीय सप्लाई चेन का हिस्सा है, जिसकी जड़ें पंजाब से लेकर हिमाचल के शिक्षण संस्थानों तक फैली हो सकती हैं।


​बड़ा सवाल: क्या सिर्फ ‘शक’ पर हुई कार्रवाई, या रेट और मुखबिरी का था खेल?
​पंजाब दस्तक का जमीनी विश्लेषण:
पुलिस की आधिकारिक थ्योरी के मुताबिक, दोनों युवकों को संदिग्ध हालत में पैदल घूमते देख शक के आधार पर रोका गया और तलाशी में खेप पकड़ी गई। लेकिन इस दावे के बीच कुछ तीखे और बड़े सवाल खड़े होते हैं:
​हर राहगीर पर नजर क्यों नहीं?
सड़क पर हर रोज सैकड़ों लोग पैदल आते-जाते हैं। पुलिस सामान्य तौर पर हर राहगीर को रोककर तलाशी नहीं लेती। ऐसे में अचानक इन दो युवकों को ही रोकना क्या महज इत्तेफाक था?
​रेट की खटपट या मुखबिरी?
नशे के अवैध कारोबार में अकसर तब गिरफ्तारियां होती हैं जब खरीददार और सप्लायर के बीच ‘रेट’ को लेकर विवाद हो जाए या माल की डिलीवरी में कोई गड़बड़ी आ जाए। क्या यहां भी किसी अंदरूनी विवाद, रेट न बनने या किसी खास शिकायत के बाद सटीक मुखबिरी हुई थी?
​सिर्फ प्यादे पकड़े गए या सरगना तक पहुंचेगी आंच?
25.37 ग्राम चिट्टा कोई छोटी मात्रा नहीं है। सवाल उठता है कि यह खेप आगे किसे पहुंचाई जानी थी और इसका असली फाइनेंसर कौन है? क्या पुलिस जांच सिर्फ इन दो कैरियरों तक सीमित रहेगी या यूनिवर्सिटी तक नशा पहुंचाने वाले बड़े सौदागरों पर भी शिकंजा कसेगा?
​एसपी कांगड़ा कुलभूषण वर्मा के अनुसार, आरोपियों से गहन पूछताछ की जा रही है और नशे के स्रोत से लेकर इसके खरीदारों तक हर पहलू की बारीकी से जांच हो रही है।


​नशे के सौदागरों के खिलाफ हर सच और जमीनी हकीकत सबसे पहले जानने के लिए देखते रहें ‘पंजाब दस्तक’। इस खबर को शेयर करें, लाइक करें और चैनल को सब्सक्राइब व फॉलो करना न भूलें।

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