’50 से 55 हजार वोटों से पिछली सरकार बाहर ही इसलिए हुई क्योंकि दिया नहीं, अब बार-बार उनका नाम क्यों?’; स्वयंभू पर भड़के पेंशनर, बोले—16 से 22 के एरियर, ग्रेच्युटी व लीव इनकैशमेंट पर सुरेश ठाकुर की संयुक्त कार्यकारिणी से ही टेबल पर बात करे सरकार
ब्यूरो चीफ सुरेंद्र राणा (पंजाब दस्तक)
शिमला: हिमाचल प्रदेश के करीब 1 लाख 90 हजार पेंशनरों के लंबित वित्तीय लाभों, संशोधित वेतनमान और डीए को लेकर सचिवालय में मुख्यमंत्री के साथ हुई बैठकों व उसके बाद हुई प्रेस कॉन्फ्रेंसों के बाद राजधानी शिमला की फिज़ा में पेंशनरों की प्रतिक्रिया बेहद अहम हो गई है। पंजाब दस्तक ने पिछले दो से तीन दिनों तक ऐतिहासिक मालरोड, रिज मैदान, रिपोर्टिंग रूम के पास लगे बेंचों, सीढ़ियों और पेड़ों की छांव में बैठने वाले विभिन्न विभागों के करीब 200 से 250 बुजुर्ग पेंशनरों से लंबी चर्चा कर उनके विचार टटोले। यह किसी का प्रायोजित बयान नहीं, बल्कि 60, 65, 70 और 75 वर्ष की उम्र पार कर चुके वरिष्ठ नागरिकों का ज़मीनी दर्द और बेबाक विश्लेषण है।
सचिवालय, लोक निर्माण विभाग, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, उच्च व प्रारंभिक शिक्षा, वन विभाग, कृषि, बागवानी, पशुपालन, जल शक्ति विभाग, तकनीकी शिक्षा, राजस्व, विभिन्न विश्वविद्यालय, राज्य बिजली बोर्ड, हिमाचल पथ परिवहन निगम (HRTC), प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, पर्यटन विकास निगम (HPTDC), नागरिक आपूर्ति निगम, राज्य सहकारी बैंक, भूमि विकास बैंक, विभिन्न बोर्ड-निगमों के कॉरपोरेट सेक्टर सहित साथ जुड़े केंद्रीय पेंशनर संगठनों के वरिष्ठ नागरिक रोज़ाना अपनी दिनचर्या में यहां मिलते हैं। इन 250 से अधिक पेंशनरों से हुई बातचीत में पेंशनरों ने तथाकथित स्वयंभू के बयानों को पूरी तरह खारिज करते हुए असल मुद्दों को सामने रखा।
मुख्य पीड़ा: 2016 से 2022 का एरियर, ग्रेच्युटी और लीव इनकैशमेंट
पेंशनरों ने चर्चा के दौरान सबसे बड़ा और गंभीर मुद्दा 2016 से 2022 के लंबित संशोधित वेतनमान के एरियर, ग्रेच्युटी और लीव इनकैशमेंट का उठाया। भावुक होते हुए वरिष्ठ पेंशनरों ने कहा:
इस उम्र में कई साथी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं, दवाओं का खर्च बढ़ चुका है और कई बुजुर्ग पेंशनर अपना हक पाए बिना ही स्वर्ग सिधार गए।
आज के दौर में बच्चों के पास रोजगार के साधन सीमित हैं, ऐसे में बुजुर्गों की जीवनभर की कमाई और पेंशन ही परिवार का सबसे बड़ा सहारा होती है। अगर यह देय लाभ जीवनकाल में ही नहीं मिलेंगे, तो बाद में मिलने का क्या फायदा?
पेंशनरों ने कहा कि सरकार इस मुख्य विषय पर संवेदनशीलता दिखाए और सबसे पहले 2016 से 2022 के एरियर व सेवानिवृत्ति लाभों के भुगतान की ठोस रूपरेखा तय करे।
”अगर दिया होता तो सत्ता में रहते, 50-55 हजार वोटों से बाहर ही इसलिए हुए”
प्रेस वार्ताओं में बार-बार पूर्व सरकार और ‘डबल इंजन’ का राग अलापने वाले स्वयंभू पर पेंशनरों ने तीखा पलटवार किया। पेंशनरों ने साफ लहजे में कहा:
”यह स्वयंभू बार-बार पिछली सरकार का नाम लेकर किसे गुमराह कर रहा है? लगभग 50 से 55 हजार वोटों की ही कमी थी, जिसके चलते पूर्व सरकार सत्ता से बाहर हुई। अगर उन्होंने पेंशनरों के 2016 से 2022 के एरियर, डीए और भत्ते समय पर दिए होते, तो आज वे सत्ता में बैठे होते और पेंशनर उनकी सराहना करते। उन्होंने नहीं दिया, इसीलिए तो पेंशनरों ने उन्हें सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाया।”
पेंशनरों ने दो-टूक कहा कि जब पिछली सरकार को सबक सिखा दिया गया है, तो अब हर बात पर उनका नाम लेकर ध्यान भटकाने का क्या मतलब? पेंशनरों का किसी दल से सरोकार नहीं है; व्यक्तिगत विचार किसी के कुछ भी हों, लेकिन पेंशनर मंच पूरी तरह गैर-राजनीतिक है। जो वर्तमान में सत्ता में हैं, मांगें भी उन्हीं मुख्यमंत्री के समक्ष रखी जाएंगी।
”शीशे के सामने खड़े होकर देखें साथ कितने लोग हैं; दो साल शांति से बैठें”
बातचीत के दौरान जैसे ही उस तथाकथित व्यक्ति का जिक्र आया, पेंशनर भड़क उठे और उसका नाम तक लेने से साफ मना कर दिया। पेंशनरों ने कहा:
65-70 की उम्र पार कर चुके इस स्वयंभू को अपनी ज़िद और झूठा अहंकार छोड़कर कम से कम दो साल शांति से घर बैठना चाहिए। इस उम्र में प्रभु सिमरन करने के बजाय वह पेंशनरों के हितों का नुकसान कर रहा है।
पेंशनरों ने कहा कि वह शीशे के सामने खड़े होकर खुद से पूछे कि उसके साथ कितने पेंशनर हैं? वह आज तक किन पेंशनरों के प्रतिनिधिमंडल को लेकर गया? अकेले जाकर बयानबाज़ी करने से कोई पेंशनरों का प्रतिनिधि नहीं बन जाता।
15 सूत्रीय मांग पत्र और 18 संगठनों की अधिकृत कार्यकारिणी
तकरीबन 250 बुजुर्ग पेंशनरों ने एक सुर में कहा कि प्रदेश के 1.90 लाख पेंशनरों की वास्तविक नुमाइंदगी सुरेश ठाकुर जी, भूपराम जी, गंगाराम जी, बुद्धिराम जस्ता जी, नेगी जी और एडवाइज़र नीलम चौहान जी की चुनी हुई अधिकृत कार्यकारिणी ही कर रही है।
विभिन्न विभागों, बोर्डों, कॉरपोरेशनों और केंद्रीय संगठनों को मिलाकर बने 18 संगठनों का यह संयुक्त मंच पूरी तरह अधिकृत है, जिसमें 25 से 30 वरिष्ठ सदस्य शामिल हैं।
इस नेतृत्व ने 15 सूत्रीय मांग पत्र तैयार कर सरकार के समक्ष रखा है और धर्मशाला से लेकर शिमला तक तीन-तीन बड़े जनरल हाउस व रैलियां करके अपनी ज़मीनी ताकत साबित की है।
पेंशनरों ने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू एक मेहनती और संवेदनशील नेता हैं। वे प्रदेश की वित्तीय स्थिति को समझते हैं, लेकिन सरकार को केवल सुरेश ठाकुर की इस अधिकृत कार्यकारिणी के साथ ही टेबल पर बैठकर वार्ता करनी चाहिए ताकि संवाद से ही पेंशनरों के देय वित्तीय लाभों का स्थायी समाधान निकल सके।
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देखते रहें पंजाब दस्तक — सच की आवाज़, आपकी आवाज़।

