UPI चार्ज नोटिफिकेशन और NPCI के MDR नियमों की जानकारी

ब्रेकिंग की अंधी दौड़ में भ्रामक खबरें परोसने से बचें मीडिया संस्थान, पहले नोटिफिकेशन पढ़ें फिर चलाएं सच: पंजाब दस्तक

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​विशेष संपादकीय रिपोर्ट: ब्यूरो चीफ चंडीगढ़ न्यूज़ रूम से सुरेंद्र राणा
​पत्रकारिता की पहली शर्त ‘सच्चाई और प्रमाणिकता’ होती है, न कि जल्दबाजी में टीआरपी बटोरना। हाल ही में डिजिटल भुगतान (UPI) से जुड़े केंद्र सरकार के नए गजट नोटिफिकेशन को लेकर जिस तरह कुछ बड़े मीडिया संस्थानों और टीवी चैनलों ने बिना पूरा दस्तावेज पढ़े ‘₹2000 से ऊपर UPI पर चार्ज’ जैसी भ्रामक ब्रेकिंग न्यूज़ की बाढ़ ला दी, वह बेहद गैर-जिम्मेदाराना है।
​पंजाब दस्तक ऐसी जल्दबाजी और सनसनीखेज रिपोर्टिंग का पुरजोर खंडन करता है।


​जल्दबाजी बनी गलत संदेश की वजह:
बड़ी-बड़ी घोषणाओं और ब्रेकिंग न्यूज़ के चक्कर में कई नामी मीडिया संस्थानों ने सरकारी अधिसूचना की मूल भावना को समझे बिना ही आम जनता में भ्रम का माहौल बना दिया। जब कोई बड़ा चैनल बिना अधिसूचना पढ़े भ्रामक हेडलाइन चलाता है, तो पूरे प्रदेश, पूरे देश और यहां तक कि दुनिया भर में गलत संदेश जाता है।
​पत्रकारिता का धर्म यह सिखाता है कि भले ही खबर आधा घंटा देरी से जाए, लेकिन वह शत-प्रतिशत सटीक और पुख्ता होनी चाहिए। केवल पहले खबर देने की होड़ में सच की बलि नहीं चढ़ाई जा सकती।


​क्या है केंद्र सरकार और NPCI के नोटिफिकेशन का असली सच?
नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) और केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट की धारा 10A के तहत जारी अधिसूचना के संबंध में स्थिति पूरी तरह साफ कर दी है। पंजाब दस्तक बिना किसी लाग-लपेट के पूरे तकनीकी तथ्य सीधे जनता के सामने रख रहा है:


​आम ग्राहकों के लिए UPI शत-प्रतिशत मुफ्त: चाहे आप किसी परिचित को ₹500 भेजें या ₹50,000 का बड़ा भुगतान करें, बैंक-टू-बैंक सीधे होने वाले ट्रांजैक्शन पर आम नागरिक की जेब से एक भी पैसा अतिरिक्त सरचार्ज या टैक्स के रूप में नहीं कटेगा।
​P2P (व्यक्ति से व्यक्ति) ट्रांसफर पूरी तरह सुरक्षित: एक आम आदमी जब अपने किसी रिश्तेदार, दोस्त या परिवार के सदस्य के खाते में पैसे ट्रांसफर करता है, उस पर कोई सीमा या शुल्क लागू नहीं है। यह पहले की तरह पूरी तरह फ्री रहेगा।
​छोटे रेहड़ी-पटरी और दुकानदार पूरी तरह बाहर: गली-मोहल्ले के छोटे दुकानदार, सब्जी विक्रेता, चाय वाले या फल की रेहड़ी लगाने वाले व्यापारी (P2PM श्रेणी), जिनका मासिक डिजिटल कारोबार ₹1 लाख तक सीमित है, उन पर किसी भी तरह का MDR लागू नहीं होगा। उनके लिए यह व्यवस्था पूरी तरह ‘जीरो-चार्ज’ रहेगी।


​MDR केवल बड़े मर्चेंट्स (दुकानदारों/कंपनियों) के लिए: गजट अधिसूचना के तहत केवल ₹2,000 से अधिक के बड़े मर्चेंट भुगतानों पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) तय करने का रास्ता खुला है। यह दर अधिकतम 0.4% (अधिकतम ₹300 तक सीमित) या तय श्रेणियों पर नाममात्र शुल्क के रूप में बैंकों और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स के बीच बंटेगी।
​दुकानदार ग्राहक पर नहीं डाल सकते यह चार्ज: NPCI ने स्पष्ट नियम तय किया है कि अगर किसी बड़े मॉल, पेट्रोल पंप या ऑनलाइन मर्चेंट पर कोई MDR शुल्क बनता भी है, तो उसका भुगतान संबंधित कंपनी या व्यापारी को अपने मुनाफे से करना होगा। इसे किसी भी सूरत में ग्राहक के बिल में सरचार्ज या टैक्स के रूप में जोड़ना गैर-कानूनी है।


​मीडिया संस्थानों को आत्ममंथन की जरूरत:
सच्ची खबर ही जनता की असली आवाज होती है। सनसनी फैलाने के बजाय मीडिया संस्थानों को चाहिए कि वे शांत स्वभाव से नोटिफिकेशन का अध्ययन करें, तकनीकी पहलुओं की पुष्टि करें और उसके बाद ही कोई सूचना प्रसारित करें। आधी-अधूरी जानकारी से जनता और व्यापारियों में अनावश्यक भय पैदा करना किसी भी जिम्मेदार संस्थान को शोभा नहीं देता। पंजाब दस्तक सदैव प्रमाणिक, निष्पक्ष और सच्ची पत्रकारिता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराता है।

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